/जोगी एक्सप्रेस को पटरी से उतारने के पीछे दिग्गी तो नहीं…

जोगी एक्सप्रेस को पटरी से उतारने के पीछे दिग्गी तो नहीं…

-गौरव शर्मा “भारतीय”||

रायपुर. छत्तीसगढ़ की कांग्रेसी प्लेटफार्म से अजित जोगी एक्सप्रेस के बेपटरी होने की ख़बरों के बीच कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव व दस जनपथ के पुराने सिपहसालार दिग्विजय सिंह की भूमिका को अहम माना जा रहा है. प्रदेश के राजनैतिक गलियारों में चर्चा है कि अपने पुराने शागिर्दों को सत्ता के सिंहासन तक पहुँचाने के लिए दिग्गी राजा ने ही कांग्रेस आलाकमान को जोगी के खिलाफ सख्त कार्रवाई के लिए तैयार किया है.Jogi-diggi

दिग्गी राजा और जोगी में छत्तीस का आंकड़ा माना जाता है. जोगी ने नक्सली हमले में शहीद कांग्रेसियों की शोकसभा में उन पर जम कर निशाना भी साधा था. माना जा रहा है कि दिग्गी इसी वजह से जोगी एक्सप्रेस को कांग्रेसी पटरी से उतारने की पटकथा लिख रहे हैं. जोगी की गतिविधियों से कांग्रेस आलाकमान को अवगत कराने से लेकर आदिवासी एक्सप्रेस की हवा निकालने तक में दिग्गी राजा की भूमिका अहम मानी जा रही है.

यही वजह है कि प्रदेश की राजनीति में दिग्गी के खास व जोगी के धुर विरोधी माने जाने वाले भूपेश बघेल सबसे पहले न केवल जोगी के खिलाफ खड़े हुए बल्कि उन्होंने जोगी विरोधी नेताओं को लामबंद भी कर दिया और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गाँधी से मिलकर जोगी एक्सप्रेस को रेड सिग्नल दिखाने की गुहार भी लगा दी. प्रदेश के राजनैतिक विश्लेषकों की मानें तो भूपेश की इस मुहिम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष डॉ. चरणदास महंत व नेता प्रतिपक्ष रविन्द्र चौबे भी साथ थे. गौरतलब है कि महंत, चौबे व भूपेश इन दिनों कांग्रेस की राजनीति में अहम पदों पर हैं. तीनों नेता दिग्विजय सिंह के शागिर्द माने जाते हैं. किसी ज़माने में तीनों नेता दिग्गी राजा के मंत्रिमंडल में अहम जिम्मेदारी संभाल चुके हैं. यही वजह है कि अब दिग्गी राजा पर अपने शागिर्दों को सत्ता के सिंहासन तक पहुँचाने के लिए जोगी को किनारे करने के लिए पटकथा लिखने का जिम्मेदार माना जा रहा है.

इसकी समीक्षा पत्रकार करें : भूपेश

जोगी को पटरी से उतारने के पीछे दिग्गी का हाथ होने के सवाल पर कांग्रेस के कार्यक्रम समन्वयक भूपेश बघेल ने कहा कि ऐसा मैं नहीं कह सकता यह पत्रकारों की सोच हो सकती है. उन्होंने कहा कि समीक्षा करने का कार्य और अधिकार पत्रकारों का है, मेरा नहीं. जोगी और हरिप्रसाद के मुलाकात के संबंध में भूपेश ने कहा कि उन्होंने अपनी भावनाओं से पार्टी हाईकमान को अवगत करा दिया है रहा सवाल जोगी पर कार्रवाई का तो इस संबंध में कांग्रेस हाईकमान द्वारा ही निर्णय लिया जाएगा.

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.