Loading...
You are here:  Home  >  राजनीति  >  Current Article

गोरखाओं ने बिगाड़ा चाय का स्वाद…

By   /  August 27, 2013  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

दार्जिलिंग चाय का निर्यात ठप्प और अब सारे चाय बागानों के बंद होने की आशंका…

-एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास||

बंगाल में चाय बागानों में मृत्यु जुलूस का सिलसिला अभी थमा भी नहीं है. एक के बाद एक चाय बागान बंद होते जा रहे हैं. कभी इन्हीं चाय बागानों में सक्रिय मजदूर आंदोलन के कार्यकर्ता व्यापक पैमाने पर गोरखालैंड अलग राज्य का पताका उठाये हुए हैं.पृथक राज्य का मुद्दा राजनीतिक है, जिसे केंद्र, राज्य सरकार और आंदोलनकारियों की त्रिपक्षीय वार्ता में ही सुलझाया जा सकता है.Darjeeling_Tea

अस्सी के दशक में जब सुबास घीसिंग के नेतृत्व में शुरु गोरखालैंड आंदोलन की वजह से भारतीय पर्यटन मानचित्र में दार्जिंलिंग की शीर्ष वरीयता ख़त्म हो गयी, तब से लेकर अब तक दार्जिलिंग देश के पर्यटन कारोबार में पिछड़ता ही जा रहा है. अब ताजा आंदोलन ने चाय का निर्यात भी बंद कर दिया है. देर सवेर अब सारे के सारे चाय बागानों में काम बंद हो जाने की आंशंका है. उत्पादन हो तो भी क्या फायदा, चाय बाजार तक पहुंचाने के सारे रास्ते बंद कर दिये गये हैं.

पर्यटन ठप्प और चाय बागान बंद, बाकी क्या बचेगा पहाड़ों में जिसे लेकर नए राज्य का गठन करना चाहते हैं गोरखालैंड के दीवाने?

यूरोप में जहां ब्रिटिश हुकूमत से दार्जिलिंग चाय की लत लगी हुई है, अब सही मायने में टी ब्रेक हैं. अलग राज्य बने या न बने, दार्जिलिंग, पहाड़ और चायबागानों की अर्थव्यवस्था पर राजनीति जो घाव कर रही है,  वे अश्वथामा के सदाबहार जख्म बनकर उभर रहे हैं. न दार्जिंलिंग और न बाकी बंगाल के इस बेइंतहा नुकसान से उबरने के कोई आसार है.

आंदोलन चले लेकिन कारोबार बाधित न हो, गोरखा जनसमुदाय के लिए यह सर्वश्रेष्ठ विकल्प था. लेकिन आंदोलन चलाने के लिए दार्जिलिंग चाय का उत्पादन को ही नुकसान पहुंचा बैठे आंदोलनकारी और बाहर के लोगों के लिेये दार्जिंलिंग चाय अब भूली बिसरी यादे हैं. हालत यह है कि हालात सुधरने के बावजूद चाय के कारोबार में जोखिम उठाने की कोई हिम्मत शायद ही करें. ताजा आंदोलन की वजह से करीब 7.35 लाख किलो चाय उत्पादन से हाथ धोना पड़ा है.

दार्जिलिंग टी एसोसिएशन के चेयरमैन एस एस बगारिया के मुताबिक गोरखालैंड आंदोलन की वजह से कारोबार ही ठप नहीं हो रहा है बल्कि अब चाय बागानों क चालू रखना भी दिनोंदिन कठिन होता जा रहा है. उन्होंने कहा कि चाय कारोबार फिलहाल पूरी तरह ठप्प है.कारखानों को चालू रखने के लिए कोयला और ईंधन की आपूर्ति आर्थिक नाकेबंदी की वजह से पूरी तरह बंद हो चुकी है. न माल तैयार किया जा सकता है और न कहीं भेजा जा सकता है.

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

पाकिस्‍तान ने नहीं किया लेकिन भाजपा ने कर दिखाया..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: