/सपा विधायक महेंद्र सिंह मौज मस्ती करते धरे गए…

सपा विधायक महेंद्र सिंह मौज मस्ती करते धरे गए…

यूपी के सीतापुर जिले की सेवता विधानसभा सीट से 55 साल के सपा विधायक महेंद्र सिंह उर्फ झीन बाबू गोवा गए तो थे मौज-मस्ती मारने और मस्ता भी रहे थे मगर रंग में भंग तब पड़ गया जब गोवा पुलिस ने उन्हें मंगलवार तड़के तीन बजे पणजी के होटल विवा-गोवा से छह कॉलगर्ल्स के साथ गिरफ्तार किया गया.mahendra singh mla

विधायक के साथ पांच अन्य लोगों को भी दबोचा गया है. इनमें से एक सीतापुर का अजय प्रताप सिंह और दूसरा लखनऊ का धर्मेंद्र प्रसाद है.

होटल से छह लड़कियों को भी मुक्त कराया गया है. इनमें से चार दिल्ली और दो मुंबई की हैं. रैकेट का मास्टरमाइंड फरार हो गया.

अदालत ने सभी गिरफ्तार लोगों को छह दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है. जबकि मुक्त कराई गई लड़कियों को सरकारी संरक्षण गृह में भेजा गया है.

पुलिस इंस्पेक्टर राजेंद्र प्रभुदेसाई ने बताया कि होटल से तेज म्यूजिक की शिकायत पर छापा मारा गया था. इस दौरान गिरफ्तार आरोपियों को युवतियों के साथ आपत्तिजनक स्थिति में पाया गया. विधायक ने कुबूला कि वे पहले भी साथियों के साथ गोवा आते रहे हैं.

प्रभुदेसाई ने बताया कि विधायक ने गिरफ्तारी से पहले पुलिस पर दबाव बनाने की कोशिश की लेकिन उनकी एक न चली. महेंद्र सिंह 1996 से विधायक हैं.

पुलिस उपाधीक्षक महेश गावंकर के मुताबिक पूछताछ में यह बात सामने आई कि गिरफ्तार लोगों में सपा विधायक भी हैं. इसके बाद उत्तर प्रदेश के विधानसभा अध्यक्ष माता प्रसाद पांडे को विधायक की गिरफ्तारी की सूचना दी गई.

विधायक ने बताया कि वे होटल पहुंचने से पहले एक कैसिनो में भी गए थे. महेंद्र उत्तरी गोवा के एक टापू पर बने होटल में ठहरे थे, लेकिन मौज-मस्ती के लिए विवा-गोवा आए थे.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.