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नंगी पूनम पांडे बोले, बलात्कारों के लिए दोष मुझे क्यों…

By   /  August 28, 2013  /  2 Comments

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मुंबई (मीडिया दरबार): अपनी नग्नता को सफलता की सीढियां बनाने वाली पूनम पांडे ने बयान दिया है कि देश में बढ़ रहे यौन शोषण और बलात्कारों के लिए कृपया उनपर उंगली न उठाएं. दरअसल, आजकल पूनम काफी हैरान और परेशां हैं, क्योंकि सोशल नेटवर्किंग साईट ‘ट्विट्टर’ पर उनके प्रशंसक उन्हें बढ़ते यौन अपराधों के लिए जमकर कोस रहे हैं.Poonam pandey

ट्विट्टर पर पूनम के फालोवर्स आजकल उन्हें जमकर परेशान कर रहे हैं. उनका मानना है कि इंटरनेट और पत्रिकाओं में पूनम की उत्तेजक तस्वीरें महिलाओं के लिए अहितकर साबित हो रही हैं.

पूनम ने कहा कि मुंबई में महिला फोटो पत्रकार के साथ सामूहिक दुष्कर्म की घटना के बाद से ही उन्हें बार बार और लगातार खुद को दोषी मानने पर मजबूर किया जा रहा है. पूनम ने हाल ही में फिल्म `नशा` से बॉलीवुड में प्रवेश किया है. उन्होंने कहा कि मेरी तस्वीरें महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों के लिए जिम्मेदार हैं, क्या सचमुच यही बात है. दिल्ली दुष्कर्म के समय भी मुझ पर इस तरह के आरोप लगाए गए थे. मैं उन सभी लोगों से एक सवाल पूछना चाहती हूं जो मुझे इन सब के दोषी मान रहे हैं कि क्या मेरे चर्चा में आने से पहले महिलाओं के खिलाफ अपराध नहीं होते थे.

पूनम का मानना है कि लोग अपनी कमजोरियां छिपाने के लिए हमेशा कोई बलि का बकरा ढूंढते हैं. उन्होंने कहा कि समाज में व्याप्त बुराईयों के लिए आप मुझे दोष क्यों दे रहे हैं. मैं केवल एक लड़की हूं जो दुनिया में अपने लिए जगह तलाश रही है. जब कानून व्यवस्था नाकाम होती है तो वे लोग किसी और को दोषी बता देते हैं. लेकिन मुझे दोष क्यों दे रहे हैं? मैंने क्या किया है?

पूनम पहली बार चर्चा में तब आई थीं जब 2011 में क्रिकेट विश्व कप के दौरान उन्होंने ऐलान किया था कि भारतीय टीम ट्रॉफी जीतती है, तो भारत की जीत की खुशी में वह भारतीय खिलाड़ियों के समक्ष निर्वस्त्र होंगी.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. puanam pandy koa kucha kam nhya hay kya nagahonya ka siwya.

  2. Amod Shastri says:

    vastutah samaaj me sanskaar kaa koiee sthaan rah hi nahi gayaa hei | netiktaa k updesh dene waale khud sabse adhik anetik ho chuke hein | gyaan k abhaaw avam manushya jivan ki saarthaktaa ko nahi samajhne k kaaran maataa pitaa apne children ko sahi shikshaa nahi de paa rahe hein | maanaw jivan vigyaan ko sahi tareeke se saarvjanik roop se paribhaashit nahi kiyaa jaa rahaa hei , Hindu college jese pratishthit college k teachers log aapas me haathaa-paayi kar rahe hein , media k log samaaj ko wahi kureeti & andh-vishwaas k taraf le jaa rahe hein , netaa k baare me to baat karni hi beieemaani hei | aesi sthiti me Bhartiy samaaj ki kyaa durdashaa honi chaahiye yah kalpnaa kaa vishay hei , yaani jo ho rahaa hei wo inhiee baaton kaa dushparinaam hei & media (news papers & news channels) kaa kaam only hallaa karnaa & majaa lenaa rah gayaa hei |.

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