/आसाराम आशीर्वाद देने के बहाने लड़कियों के निजी अंगों से छेड़छाड करते थे…

आसाराम आशीर्वाद देने के बहाने लड़कियों के निजी अंगों से छेड़छाड करते थे…

विवादों के करीबी रिश्तेदार आसाराम को अभी पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पा रही सिर्फ सम्मन देकर खानापूर्ति कर रही है मगर आसाराम के खिलाफ हर तरफ से आवाजें उठने लगी हैं. यही नहीं अब रायपुर से खबर है कि एक और लड़की सामने आई है और आसाराम पर यौन दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है. इस लड़की का कहना है कि आसाराम हमेशा से ही कम उम्र की लड़कियों के साथ कुकृत्य करते आए हैं. वह खुद इस तरह की घटना का शिकार हो चुकी है.asaram1

रायपुर से सामने आई लड़की का नाम है टीना (बदला हुआ नाम). टीना का दावा है कि वह आसाराम के सत्संग में कई बार शामिल हो चुकी है. उसने बताया कि आसाराम अक्सर कम उम्र की लड़कियों के साथ गलत हरकतें करते हैं. उसके मुताबिक, वह आसाराम की वासना का शिकार होते-होते बची है. आसाराम ने उसके अंगों के साथ जो छेड़छाड़ की इस घटना की, वह उसे अभी तक भूल नहीं पाई है.

मीडिया में आसाराम की खबरें देखने के बाद टीना के दिमाग में करीब 9 साल पुरानी वो घटना ताजा हो गई. टीना के अनुसार, यह घटना तब की है जब वह संत आसाराम सत्संग करने रायपुर आये थे. उस दौरान वह भी सत्संग में मौजूद थी.

आम भक्तों के साथ जब इस लड़की ने संत आसाराम बापू के पैर छुए तो उसे आशीर्वाद की उम्मीद थी, लेकिन हुआ कुछ और. टीना ने बताया कि आशीर्वाद के बहाने आसाराम ने उसके प्राइवेट पार्ट्स से छेड़छाड़ की. टीना ने कहा, ”ये सन 2004 की बात है, जब आसाराम हमारे शहर में प्रवचन देने आये थे. मैं उस समय दसवीं कक्षा में NCC  में थी. वो आशीर्वाद देने के बहाने लड़कियों के निजी अंगों से छेड़छाड़ करते थे. वह सभी कम उम्र की लड़कियों के साथ ऐसा ही करते थे. हमें यह अच्छा नहीं लगता था. हम छोटे थे और परिवार के डर से कुछ कहते नहीं थे. हमें डर लगता था कि वे इतने बड़े संत हैं, इसलिए हम चुप रहते थे.”

(सौ:आजतक)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.