/आसाराम क्यों करवा रहे हैं इमोशनल ब्लैकमेलिंग…

आसाराम क्यों करवा रहे हैं इमोशनल ब्लैकमेलिंग…

आसाराम द्वारा नाबालिग लडकी को यौन प्रताड़ित करने के केस में आसाराम और उनके अनुयायी हर संभव तरीके से इस मामले को दबाने का प्रयास कर रहे हैं. आसाराम के पुत्र पीड़ित लडकी को पागल घोषित करने में जुटे हैं तो आसाराम की दत्तक पुत्री और शिष्या पूजा बेन पीड़िता के घर पहुँच साम और दाम नीति के ज़रिये उसे केस वापिस लेने के लिए मनाने लगी.asaram2

यौन शोषण का आरोप लगाने वाली नाबालिग लड़की के पिता ने कहना है कि आसाराम अपने भक्तों के जरिए उन पर केस वापस लेने के लिए दबाव बना रहे हैं. उन्होंने आशंका जताई है कि आसाराम उन्हें ब्लैकमेल करने के लिए कोई साजिश भी रच सकते हैं. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वह किसी भी कीमत पर दबाव में नहीं आने वाले हैं, चाहे उनकी जान ही क्यों न चली जाए.

पीड़ित लड़की के पिता ने कहा, ‘आसाराम की शिष्या पूजा बेन ने मेरे घर आकर पत्नी के पैर पकड़े और कहा कि बापू से गलती हो गई है माफ कर दो.’ उन्होंने कहा कि आसाराम संत नहीं शैतान हैं और उनके रुद्रपुर गांव में स्थित आश्रम में अब सत्संग नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने कहा, ‘अगर आसाराम को यह सब साजिश लग रही है तो वह सीबीआई जांच करा लें. जांच में यदि वह दोषी पाए जाते हैं तो उन्हें फांसी दे दी जाए, नहीं तो आसाराम को फांसी पर चढ़ा दिया जाए.’

हालांकि, इस सबके बीच उन्हें किसी साजिश के जरिए जाल में फंसाकर ब्लैकमेल किए जाने की भी आशंका है. पिता ने बताया, ‘बुधवार की शाम आसाराम की एक महिला भक्त मुझसे मिलने आई थी. घरेलू संबंध होने के कारण मैंने महिला शिष्या को अंदर बुला लिया. उनके साथ एक अनजान व्यक्ति भी था. हमारी बातचीत के दौरान वह व्यक्ति मोबाइल से रिकॉर्डिंग कर रहा था. मुझे इस बात का पता तब चला जबा अचानक उसके कैमरे का फ्लैश चमका.’

उन्होंने कहा कि जब मैंने आपत्ति जताई तो उसने बहाना बनाते हुए मोबाइल जेब में रख लिया. तब मुझे ध्यान नहीं आया कि उस व्यक्ति के मोबाइल से विडियो क्लिप डिलीट करवा दूं. उन्हें आशंका है कि अब आसाराम उनके विडियो पर किसी और की आवाज के जरिए नकली विडियो तैयार कर ब्लैकमेल कर सकते हैं या फिर समझौते के लिए दबाव बना सकते हैं.

दूसरी ओर आसाराम ने कहा है कि अगर कोई लड़की को पीड़ित साबित कर दे तो उसे पांच लाख रुपये का इनाम दूंगा. आसाराम ने यह भी कहा कि लड़की को पीड़ित साबित करने वाले का मैं गुलाम बन जाऊंगा. उन्होंने प्रवक्ता के एक विवादित बयान को लेकर भी माफी मांगी है जिसमें पीड़ित लड़की को पागल बताया गया था.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.