/जोगी की शरण में पहुंचे चरण, छुए पैर, जोगी के समर्थकों ने खीची तस्वीर…

जोगी की शरण में पहुंचे चरण, छुए पैर, जोगी के समर्थकों ने खीची तस्वीर…

-प्रतीक चौहान||

रायपुर, छत्तीसगढ़ के पीसीसी अध्यक्ष और केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री चरण दास महंत का समय कुछ ठीक नहीं चल रहा है.  या यू कहे कि उनका समय उनका साथ नहीं दे रहा है.  कभी सोनिया के कहने पर झाडू पोछा लगने की बात हो या अजीत जोगी के पैर छुने वाली ये फोटो.   हालांकि श्री मंहत, अजीत जोगी को कैमरों के सामने अपना बड़ा भाई मानते है. लेकिन मीडिया में आई इस तसवीर से कई सवाल खड़े हो गए है.  jogi 1

महंत ने जोगी के घर लगभग एक घंटे चर्चा की.  लेकिन उस चर्चा की एक भी तस्वीर मीडिया में नहीं आई.  इस पूरे वाक्ये में केवल दो ही तस्वीरे सामने आई एक वो जिसमें श्री महंत जोगी के पैर छु रहे है.  दूसरी श्री महंत हाथ बांधे श्री जोगी के पीछे खड़े कुछ सोच रहे है. ये दोनो तसवीरे श्री जोगी के समर्थकों द्वारा जारी की गई है. लगता तो ऐसा है कि ये फोटो पहले से प्री प्लान कर ली गई थी. शायद इसी लिए जब पीसीसी अध्यक्ष ने जब अजीत जोगी के पैर छुए तब श्री जोगी उनकी तरफ देख भी नहीं रहे है.

jogi 2कुछ महीनों पहले ही चरण दास महंत ने अपने राजनैतिक आका के लिए वफादारी का भोंडा प्रदर्शन करते हुए कहा था कि वह सोनिया के कहने पर पोंछा लगाने को भी तैयार हैं.  25 मई को बस्तर में हुए नक्सली हमले में पार्टी अध्यक्ष नंदकुमार पटेल की हत्या कर दी गई थी.  उसके बाद महंत को राज्य का संगठन सौंपा गया.  इस बारे में जब उनसे पूछा गया कि दोहरी जिम्मेदारी वह कैसे निभा पा रहे हैं, तो महंत ने जवाब दिया, अगर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी मुझसे झाड़ू उठाकर राज्य कांग्रेस दफ्तर साफ करने को कहेंगी, तो मैं वह भी करूंगा.

इन सभी बातो का मतलब क्या निकाला जाए

ये तो राजनीति करने वाले राजनेता ही अच्छे से   बता पाएंगे.  लेकिन लोगों के बीच हो रही बातचीत पर यकीन किया जाए तो ये बात छन कर बाहर आ रही है कि श्री जोगी ने श्री महंत के होश उड़ा दिए है.  इसी लिए उन्होंने अपने कथित बड़े भाई के पैर छुकर उनका मनाने की कोशिश की है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.