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आसाराम का फट गया ढोल, नरेन्द्र मोदी ने पल्ला झाड़ा…

By   /  August 29, 2013  /  13 Comments

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अहमदाबाद: एक नाबालिग लड़की से बलात्कार करने के आरोप में साधू बने शैतान आसाराम को कल तक गिरफ्तार किये जाने की पूरी पूरी संभावना है. गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी अब इस ढोंगी से अपने पल्ले झाड लिए हैं.Asaram8

मोदी ने भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेताओं को सख्त सूचना दे दी है कि वे आसाराम के समर्थन में बयान न दें. गौरतलब है कि उमा भारती ने आसाराम के पक्ष में बयान दिया था.

जोधपुर पुलिस द्वारा आसाराम को 30 अगस्त तक थाने में हाजिर रहने का  नोटिस दिया गया है. राजस्थान पुलिस का कहना है कि यदि आसाराम ने नोटिस का पालन नहीं किया तो उन्हें गिरफ्तार किया जा सकता है.

इस नोटिस के खिलाफ उसके समर्थको ने आज कई जगह प्रदर्शन किये. नोटिस लेकर आई पुलिस को आसाराम ने एक चिठ्ठी दे कर थाने में हाजिर होने की मियाद बढाने की मांग की जो जोधपुर पुलिस अधिकारियों ने यह कह कर खारिज कर दी कि आसाराम पर नाबालिग लड़की द्वारा लगाए आरोंप बहुत गंभीर हैं.

आसाराम देश छोड़ कर कही भाग न जाए इसके लिए राजस्थान पुलिस ने केंद्र सरकार को भी सावधान कर दिया है. देश से बाहर जाने के सभी रास्तों पर उसे पुलिस खोज रही है ऐसी सूचना दे दी गयी है.

इस बीच जोधपुर पुलिस ने आसाराम के आश्रम में खोज बीन कर यह भी पुख्ता कर लिया है कि 15  अगस्त के दिन त्रासित बालिका और उसके माता पिता घटना स्थल पर वाकई मौजूद थे.

वहीँ, आसाराम ने आज कहा कि सोनिया गांधी और उनके पुत्र राहुल गांधी ने उसे फंसाने के लिए यह साज़िश रची है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

13 Comments

  1. Agar Baba bharti ki kahani padhi hoti to aisa na karte…..Hindu sanskriti aur sabhyata ke shatru,

  2. Narendra Singh says:

    Aabid Surti sahib, I will take you to the distant past. Thousands of years ago, we find that different type of laws were in vogue in this sub-continent. These had been compiled by a scholar named Manu in a book called MANUSMRITI. According to those laws, for the same crime there were 4 sets of punishments. The punishment depended upon the VARNA of the accused. The lightest punishment was for the person belonging to the HIGHEST varna, that is Brahmin & severest punishment was reserved for the person of the lowest VARNA, namely Shudra. ■Now my question is whether the mentality of the people of this land has since changed, or is it at the same wave length and level as it was during the time of MANU ?? ●●Of course our colonial masters gave us different set of laws , namely IPC, Cr PC etc.

  3. Sahaj Sahaj says:

    कानून को अपना काम करने दिया जाना – हमारे संविधान के अनुच्छेदों/प्रावधानों के अनुसार अपेक्षित है.अपराध को सिर्फ 'अपराध' और अपराध करनेवाले को सिर्फ 'अपराधी' के रूप में ही देखा जाना चाहिए और वह भी काला-नीला-हरा या किसी भी रंग का चश्मा लगाये बिना. दोष सिद्ध होने पर कानूनी प्रावधानों के अनुसार सजा अवश्य दी जानी चाहिए – बिना नाम-हैसियत अथवा अन्य भेद- भाव के.आसाराम की गिरफ़्तारी कानूनसम्मत है ,लेकिन इतना लम्बा समय दिया जाना सवालिया निशान लगाता है- सीधा सरकार/ पुलिस पर. अमन पसंद- तरक्की पसंद-प्रगतिशील/बुद्धिजीवियों व आंम जनता से अपेक्षा है कि सलाखों के पीछे खड़े अपराधी के साथ कोइ सहानुभूति अथवा गिरफ़्तारी के विरुद्ध विरोध जैसी कार्यवाहियों/ गतिविधियों से कानून-संविधान का मज़ाक नहीं उड़ायेंगे और देश का अमन-चैन बरकरार रहने में अपनी महती भूमिका का निर्वहन करेंगे. विशेष उल्लेखनीय है की आज प्रातः (कल रात्री) १२.३६ बजे उन्हें इंदौर से गिरफ्तार कर आज उन्हें जोधपुर सिटी मजिस्त्रते के सामने पेश किया गया, जहाँ उन्हें १ दिन के पुलिस रिमांड पर पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.अब उनके साथ सिर्फ आरोपी की तरह व्यवहार होना चाहिए-सामान्य नागरिक/ आरोपी जैसे.

  4. Sahaj Sahaj says:

    कानून को अपना काम करने दिया जाना – हमारे संविधान के अनुच्छेदों/प्रावधानों के अनुसार अपेक्षित है.अपराध को सिर्फ 'अपराध' और अपराध करनेवाले को सिर्फ 'अपराधी' के रूप में ही देखा जाना चाहिए और वह भी काला-नीला-हरा या किसी भी रंग का चश्मा लगाये बिना. दोष सिद्ध होने पर कानूनी प्रावधानों के अनुसार सजा अवश्य दी जानी चाहिए – बिना नाम-हैसियत अथवा अन्य भेद- भाव के.आसाराम की गिरफ़्तारी कानूनसम्मत है ,लेकिन इतना लम्बा समय दिया जाना सवालिया निशान लगाता है- सीधा सरकार/ पुलिस पर. अमन पसंद- तरक्की पसंद-प्रगतिशील/बुद्धिजीवियों व आंम जनता से अपेक्षा है कि सलाखों के पीछे खड़े अपराधी के साथ कोइ सहानुभूति अथवा गिरफ़्तारी के विरुद्ध विरोध जैसी कार्यवाहियों/ गतिविधियों से कानून-संविधान का मज़ाक नहीं उड़ायेंगे और देश का अमन-चैन बरकरार रहने में अपनी महती भूमिका का निर्वहन करेंगे. विशेष उल्लेखनीय है की आज प्रातः (कल रात्री) १२.३६ बजे उन्हें इंदौर से गिरफ्तार कर आज उन्हें जोधपुर सिटी मजिस्त्रते के सामने पेश किया गया, जहाँ उन्हें १ दिन के पुलिस रिमांड पर पुलिस हिरासत में भेज दिया गया.अब उनके साथ सिर्फ आरोपी की तरह व्यवहार होना चाहिए-सामान्य नागरिक/ आरोपी जैसे.

  5. Aabid Surti says:

    "…Kya is deshme rapist dabang ho to uske liye alag kanoon hote hai?" Jo sawaal maine uchaala hai uskaa la-jawaab jawaab aaj ke DNA editorial me jam kar diya gayaa hai. Padh kar aisa laga maano mere dil ki aawaz unhone sun li ho. Pesh hai ek zhalak- "…If there is one takeaway from this entire incident, then it is the hypocrisy of the political leaders (all shades including Congress) in dealing with a high-profile accused. When the Delhi gang-rape happened, the BJP had gone hammer and tongs against the Congress. In April BJP's Sushma Swaraj had demanded capital punishment in child rape cases and called for the new anti rape law to be made more stringent…" Please read the full editorial on-line that is eye-opener. DNO ko aadab.

  6. I am now convinced that our system /police /legal loopholes make delivery of justice a joke.Such criminals be dealt in Bengali (rural) style, where public handles them, police finds only dead body & no eye witnesses, what happened to Nirbhay's case, Hon Home Minister did not think it proper to meet the protesters, he probably watched the protesters from his North Block office Window, barely stone's throw away. Can we expect justice.

  7. Chanchal Bhu says:

    बगैर किसी भेद भाव के दोनों को गिरफ्तार किया जाना चाहिए. दोनों धर्म की आड़ में पाप करते रहे हैं.

  8. Jodhpur Police ko Nakaaraa bane ghoomna pad raha hai ,,,,ho saktaa hai vo naakaara hee ho …Sad…

  9. Babao kaa savaal nahee hai ,,,Vote kii chintaa hai ,,,bheed jo babajii ke saath dikhtee hai dar uskaa hai …….Hats off to Mumbai Police ….they traced d Accused and brought them under trial,,,they did d right job …

  10. Meenu Jain says:

    babaon our rasookhdaron ke liye alag kanoon hai , Aabid ji

  11. Pankaj Sufi says:

    Sahi Kaha Aapne Is Dho'ngi Ko Turant Giraftaar Kiya Jaana Chahiye, Pata Nahi Rajasthan Sarkar Kyu Dari Hui Hai…

  12. Aabid Surti says:

    Ek baat samajh nahi aayi. Mumbai k pancho balatkariyon ko dam bhar ka bhi samay nahi diya gaya. Police shikaari kutton ki bhanti unke peeche pad gayi. Is rapist ko kyon chand din diye jaa rahe hai? Kya is deshme rapist dabang ho to uske liye alag kanoon hote hai?

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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