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अखिलेश चले माया की डगर…

By   /  August 30, 2013  /  No Comments

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पंचम तल पर मंत्री व विधायकों के प्रवेश पर लगी रोक..मुख्यमंत्री के बुलावे पर ही पहुंच जा सकेंगे सीएम कार्यालय में…अब तक बगैर रोक-टोक जाते थे माननीय….

-आशीष सुदर्शन||

बहुजन समाज पार्टी की सुप्रीमो मायावती की राह पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव भी चल पड़े हैं. मायावती से दो कदम आगे निकलते हुए उन्होंने पंचम तल स्थित अपने कार्यालय पर मंत्री व विधायकों के प्रवेश तक पर रोक लगा दी है. यह माननीय पंचमतल में तभी प्रवेश कर सकते हैं जब स्वयं मुख्यमंत्री उन्हें बुलाएं. भले ही दूसरे राज्यों में मुख्यमंत्री से मुलाकात बहुत कठिन काम न हो, लेकिन उत्तर प्रदेश में कुछ रसूखदारों को छोडकर अन्य लोगों की मुलाकात बहुत कठिन है. हां, जनता दरबार अथवा कुछ अन्य अवसरों पर जरुरी लोगों से उनकी मुलाकात हो जाती है. वहीं, जनप्रतिनिधियों की आसानी से उनसे मुलाकात हो जाती थी.akhilesh-yadav_27

यह पहला मौका नहीं है जब मुलाकात समस्या है, बल्कि इस परंपरा की शुरुआत बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने शासनकाल में कर दी थी. मायावती ने अपने मुख्यमंत्रित्वकाल के पहले चरण में यह रोक पत्रकारों पर लगायी गयी थी किन्तु मुख्यमंत्री से संबंधित समाचार के कवरेज करने वाले पत्रकारों को पंचमतल पर जाने के लिए अलग से व्यवस्था की गई थी. परन्तु अचानक तत्कालीन मुख्यमंत्री के एक सचिव के आदेश पर समस्त पत्रकारों पर मुख्यमंत्री कार्यालय यानि पंचमतल पर पत्रकारों के जाने पर पूर्णतया प्रतिबन्ध लगा दिया गया था. यह सिलसिला वर्तमान सरकार में भी जारी है. इस सिलसिले को आगे वर्तमान मुख्यमंत्री ने बढ़ा दिया है.

पंचमतल स्थित मुख्यमंत्री सचिवालय के एक वरिष्ठ अधिकारी द्वारा जारी किए गए एक आदेश में कहा गया है कि जब तक मुख्यमंत्री पंचमतल पर अपने कार्यालय में बैठे रहेंगे, तब तक कोई भी व्यक्ति पंचमतल में प्रवेश नहीं कर सकेगा. यह आदेश मंत्रियों और विधायकों पर भी लागू हो गया है. पंचमतल पर मंत्रियों और विधायकों के प्रवेश पर पहली बार प्रतिबन्ध लगाया गया है. इस आदेश में यह छूट दी गयी है कि जिस मंत्री या विधायक को मुख्यमंत्री स्वयं बुलाएंगे उसे पंचमतल पर जाने की छूट रहेगी. गौरतलब है कि अब तक मंत्री व विधायक सीएम आफिस तक बेरोकटोक आते जाते रहते थे.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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