/इंदौर के अख़बार दबंग दुनिया के मालिक ने दबंग ढोंगी बापू आसाराम को दी शरण…

इंदौर के अख़बार दबंग दुनिया के मालिक ने दबंग ढोंगी बापू आसाराम को दी शरण…

मीडिया दरबार ने पता लगा लिया है कि आसाराम कहाँ छुपा बैठा है.. आसाराम का पुत्र नारायण साईं बरगला रहा है प्रेस और पुलिस को..मीडिया दरबार की एक्सक्लूसिव खबर…

यौन हमले के आरोपी आसाराम के हर दाव उलटे पड़ने के बाद आसाराम अपनी गिरफ्तारी पक्की मान चुका है और अपनी गिरफ्तारी के भय से आसाराम अपने इंदौर आश्रम में नहीं है बल्कि इंदौर के एक प्रतिष्ठित उद्योगपति तथा दबंग दुनिया अखबार मालिक किशोर वाधवानी, के इंदौर के खंडवा रोड स्थित फार्म हाउस के फार्म में जा छिपा है.scared asaram

आसाराम को अब यह विश्वास हो चुका है कि अब उसे गिरफ्तार होने से कोई नहीं बचा सकता मगर आसाराम ने आखिरी दाव खेलते हुए अपने आपको अपने ही शिष्य किशोर वाधवानी के हवाले कर दिया है. इन वाधवानी ने वैसे तो आसाराम को विश्वास दिलाया है कि “उसके इस फार्म हॉउस की पुलिस को भनक भी नहीं है और पुलिस का आपको ढूँढने यहाँ तक पहुंचना संभव ही नहीं है.” अब यह बात दूसरी है कि पुलिस तो नहीं पर मीडिया दरबार इस फार्म हॉउस तक जा पहुंचा.

मीडिया दरबार को मिली जानकारी के अनुसार अब आसाराम की रणनीति है कि जब तक संभव हो पुलिस से आंख मिचौली खेली जाये और सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में अग्रिम जमानत याचिका पेश कर किसी भी कीमत पर सोमवार को ही सुनवाई करवा ली जाये. यदि इस बीच में आसाराम गिरफ्तार हो जाता है तो वह अनशन पर बैठ कर अपने समर्थकों को भड़का सकता है.

गौरतलब है कि आसाराम को शरण देने वाला किशोर वाधवानी भाजपा का समर्थक है और उसकी निकटता लाल कृष्ण अडवाणी से भी है.

आसाराम से निकटता की वजह से अपनी छवि ख़राब हो जाने की सम्भावना को देखते हुए गुजरात के मुख्य मंत्री नरेन्द्र मोदी ने तो तत्काल आसाराम से अपना पल्लू झाड लिया है. वैसे भी अहमदाबाद में उसके आश्रम में दो बालको की संदिग्ध हालत में मौत के बाद वातावरण आसाराम के अनुकूल नहीं रहा था.

इसी कारण, आसाराम को अहमदाबाद छोड़ना पड़ा था और वहां से भाग कर मध्य प्रदेश चला गया. मध्य प्रदेश में भाजपा का शासन होने की वजह से स्थानीय पुलिस प्रशासन भी लाचार है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.