/रिलायंस और एअरटेल को एक रुपये की टोकन फीस पर 4 जी स्पेक्ट्रम चालू करने की इजाजत…

रिलायंस और एअरटेल को एक रुपये की टोकन फीस पर 4 जी स्पेक्ट्रम चालू करने की इजाजत…

-एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास||

कोलकाता में रिलायंस और एअरटेल को एक रुपये के टोकन फीस के बदले फोर जी स्पेक्ट्रम चालू करने की इजाजत दी जा रही है. शुक्रवार को कोलकाता नगर निगम और रिलायंस के अधिकारियों के बाच सहमति के तहत कोलकाता में फोर जी सेवा चालू होने का रास्ता साफ हो गया. मुंबई में मुकेश अंबानी के साथ बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बैठक  के बाद फोर जी स्पेक्ट्रम संबंधी मुद्दे सुलझाने में नगर निगम की ओर से पहल की गयी. रिलायंस सूत्रों के मुताबिक इस साल के अंत तक बंगाल में 56 स्थानों पर रिलायंस की फोर जी स्पेक्ट्रम सेवा चालू हो जायेगी.4g-networks

रिलायंस जिओ इन्फोकॉम लिमिटेड के पूर्वांचलीय प्रमुख तरुण झुनझुनवाला, मेयर पार्षद इंजीनियरिंग अतीन घोष और नगर निगम अफसरान की बैठक में टोकन फी के बदले लाइसेंस देने का फैसला हो गया.खास बात यह है कि मेयर शोभनदेव चट्टोपाध्याय के अन्यत्र बिजी होने की वजह से अतीन घोष ने ही यह सौदा पटाया.

गौरतलब है कि शुरु से नगरनिगम लाइसेंस फीस पर अड़ा हुआ था. जिसके लिए मामला आगे नहीं बढ़ रहा था. अब रिलायंस के साथ साथ एक मुश्त एअरटेल की भी लाटरी निकल गयी. अब रिलायंस बाकी टैक्स भरने के लिए तैयार है. नगरनिगम इसे ही उपलब्धि मान रहा है.

नगरनिगम की तरफ से इस सहमति के बारे में खुलासा कर दिया गया है लेकिन रिलायंस की ओर से आधिकारिक बयान नहीं आया. हालांकि तरुण झुनझुनवाला ने सबकुछ टीक हो जाने का दावा किया है.

अब नगरनिगम के कानून विभाग के साथ रिलायंस की बैठक होगी और लाइसेंस देने की औपचारिकता पूरी कर ली जायेगी.

नगर निगम के मुताबिक एअरटेल के अधिकारियों के साथ भी मामला फाइनल है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.