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कांग्रेस कार्यकर्ता सम्मेलन में अश्लील डांस परोसा…

-अंकित मुत्रिजा||

रुपया रसातल पर पहुंच रहा है और देश के महान अर्थशास्त्री प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह इस आर्थिक मर्ज की दवा खोज पाने में लाचार दिख रहे हैं. कुछ समय पहले उन्होंने देश की आवाम के नाम एक संदेश में उपदेश देते हुए अपनी एक चमत्कारी खोज के बारे में बताते हुए कहा था – “पैसा पेड़ पर नहीं लगता”. पर उसके बाद भी यूपीए सरकार की अगुवा कांग्रेस के नेतागण चुनावी समर के आगे प्रधानमंत्री के इस उपदेश की सरेआम धज्जियां उड़ाने में लगें हैं. दिल्ली में होने वालें विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र कांग्रेस पार्टी ने दिल्ली के किराड़ी इलाके में कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया.congressdance

इस सम्मेलन में महंगाई की मार झेल रहीं बेबस जनता के आगे कांग्रेसियों ने मनोरंजन के नाम पर फूहड़ डांस परोसा. पूर्वांचली मतदाताओं को लुभाने की जुगत में जमकर मंच पर अश्लील डांस करवाया गया. इतना ही नहीं, इससें आगे बढ़ते हुए फूहड़ डांस को वोट बैंक का खजाना समझ रहें कांग्रेसी नेताओं ने डांसर्स पर जमकर नोट बरसाएं. अश्लीलता और राजनीति का ये कॉकटेल इलाके के स्थानीय कांग्रेसी नेता नीरज झा ने पेश किया था. ठुमकों के दम पर वोट पाने की कवायद के तहत लोकतंत्र का सरेआम मखौल उड़ाने वाले नीरज इसी इलाके से विधानसभा चुनाव लड़ने का मंसूबा बना चुके हैं. देखना होगा कि इस तरह के अनैतिक शक्ति-प्रदर्शन दिखाने के तरीकों से वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ‘वाह नीरज कहते हैं’ या आहत हो कर ‘हाय नीरज’ कहते हैं .

आपको याद होगा कुछ समय पहले दिल्ली की मुख्यमंत्री ने बिजली के बिल से लगने वालें झटकों से जनता को निजात दिलाने की जगह आदरणीय प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के नक़्शे कदम पर चलते हुए ही बिजली का अनियंत्रित इस्तेमाल करने को लेकर बिजली बचाओ उपदेश दिया था. अब सवाल ये है कि क्या प्रदेश के सिंहासन पर विराजमान शीला दीक्षित क्या यहीं लेक्चर अपने नेताओं को देना भुल गईं ? मुख्यमंत्री शीला दीक्षित ही क्यों, कांग्रेसी नेता ज़रा सी भी श्रद्धा अपनी पार्टी की सर्वेसर्वा सोनिया गांधी के प्रति भी रखते होते तो उनकी मानसिकता का इतना बुरा सूरत-ए-हाल न होता. सोनिया गांधी ने भी महिलाओं के सशक्तीकरण को लेकर महिला मैसेंजर के उद्घाटन समारोह में भारतीय महिलाओं की स्थिति को लेकर अपने विचार प्रकट किए. शायद, वो स्पीच देते वक़्त अपने लिखित भाषण में महिलाओं की उन्नति में जिन रूकावटों को उल्लेखित कर रहीं थी वहीं गुण उनकी पार्टी के इन नेताओं में शुमार हैं जो महिलाओं को डांस करवाकर वोट बैंक भरने की मशीन समझते हैं. बहरहाल, अहम बात ये है कि आगामी विधानसभा चुनावों में जनता कांग्रेसी नेताओं की ऐसी कारगुजारियों का क्या जवाब देती हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.