/“आस्था” पर दिखाई आसाराम ने “मर्दानगी”, अब उतार रही है पुलिस…

“आस्था” पर दिखाई आसाराम ने “मर्दानगी”, अब उतार रही है पुलिस…

-संगीता शर्मा||
जोधपुर, विवादास्पद आध्यात्मिक संत आसाराम को उनके अनुयायी भगवान से कम नहीं मानते है और उनके मुख से निकले प्रवचनों को अपनी जिदंगी में उतार कर अपनी बुरी आदतों को दूर करने का प्रयास करते है. उनको क्या पता कि उनके कथित भगवान के आभा मंडल के पीछे कितनी कालिख छुपी हुर्इ है. संयम रखने की सीख देने वाले बापू खुद ही अपना संयम खो बैठे और एक नाबालिग लड़की की अस्मत से खेलने का प्रयास ही नहीं बलिक लाखों अनुयायियों के विश्वास को तार तार कर दिया है. asaram-arrested
आश्रम में बच्चों की संदिग्ध मौत के बाद दिल्ली के बस बलात्कार कांड में पीड़ित युवती को ही गुनाहगार ठहराने वाले बापू खुद अब एक नाबालिग लड़की “आस्था” (बदला हुआ नाम) से यौन शोषण के आरोप मे घिर आए है. अब वे खुद और उनके अंधे अनुयायी सच्चार्इ सामने आने पर आसाराम के खिलाफ साजिश बता रहे है लेकिन क्या उस लड़की को साजिश करने वालों ने जोधपुर बुलाया था और उसे उनके कमरे में जबरदस्ती भेजा था?.
सवाल यह उठता है कि क्यों आस्था को जोधपुर भूत उतारने के बहाने बुलाया गया?. इस घटना से यह साबित हो गया कि आसाराम के एकांतवास में ऐसे ही नाबालिग लड़कियों को परोसा जाता रहा है. यह अलग बात है कि इतने बडे संत के दुराचार के खिलाफ आज तक कोर्इ आवाज नहीं उठा पाया. यही बडी वजह है कि आसाराम जैसे संत की इस उम्र भी ऐसी हरकतों पर पर्दा पड़ा रहा और उनके हौसले बुलंद होते रहे. तभी तो आस्था को एक बडी प्लानिग के तहत छिदंवाडा से जोधपुर बुलाया गया.
कोर्इ उनसे पूछे कि वे रात के समय कौनसा भूत उतार रहे थे. सबसे बडी शर्मनाक बात यह कि आसाराम को अपने कृत्य पर पश्चाताप करने की बजाए बेशर्मी अभी बरकरार है. बापू पुलिस को पूछताछ में यह सवाल करते है कि क्या वे एकांतवास में अपनी पोती समान शिष्या के साथ कुल पल नहीं रह सकते है. अपनी जिंदगी के आखिरी पड़ाव में शिष्यों को प्रवचन में मर्दानगी के नुस्खे बताने वाले आासाराम यह भूल गए कि नाबालिग लड़की के साथ रात में कमरे में बुलाकर अश्लील हरकतें करना भी कानूनन घोर अपराध है. बंद कमरे में अकेले कौन सा भूत उतार रहे थे. अपने को भगवान मानने वाले आसाराम अनुयायियों को पाप पुण्य का पाठ पढ़ाते है, फिर यह क्यों भूल गए कि मासूम की अस्मत को अपनी धरोहर मान खेलने की कोशिश करना भी धार्मिक रूप से घोर पाप है. कोर्इ उनसे यह सवाल क्यूँ नहीं करता कि क्या वे अपनी पोती के साथ भी एकांतवास में ऐसे ही बैठते रहे है?.
विंडबंना यह है कि लोग उनके धाराप्रवाह प्रवचनों और धार्मिक आंडबरों की वजह से आस्था के सैलाब में इस कदर बह गए कि उनका असली चेहरा भी देख पाने की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे. उनकी गिरफ्तारी का विरोध करने वाले अनुयायियों से पूछा जाए कि उनकी बेटी या पोती के साथ भी ऐसी हरकत होती तो क्या तब भी वह चुप रहते?.
अब चाहे आसाराम कितनी सफार्इ दे और उनके अनुयायी हंगामा मचाए. यह तय है कि आसाराम ने गलत हरादे से उस लडकी को जोधपुर बुलाया और रात में उसके साथ दुराचार किया था. उनके बचाव में उनकी उम्र और संत होने का तर्क दिया जा रहा है लेकिन पुलिस जाँच, मर्दानगी परीक्षण की रिपोर्ट पोजिटिव पाए जाने और पीड़ित लड़की के हर बयान की तस्दीक होने से यह प्रमाणित हो गया है कि आसाराम ने घिनौना कृत्य किया है.
जोधपुर पुलिस के उपायुक्त अजयपालसिंह लांबा भी यही दावा करते है कि आसाराम के खिलाफ तमाम सबूत है इसलिए केस भी मजबूत बनाया गया है. लेकिन वे यह भी मानते है कि कोर्ट में उनके खिलाफ लगार्इ धाराएं कितनी टिक पाती है. उनका यह अनुमान किसी हद तक सही भी है क्योकि कि धर्म की आड़ में चार सौ करोड़ रूपए से अधिक की सालाना आमदनी वाले आसाराम के पक्ष में कानूनी दाँवपेच लड़ने वाली वकीलों की फ़ौज खड़ी होने वाली है. धन के बल पर पीड़िता के परिवार को भी खरीद कर बाद में बाइज्जत बरी हो जाए तो आश्चर्य नहीं होगा, मगर हर वक्त उनके लिए आलीशान बिस्तर और मर्सडीज में घूमने वाले आसाराम को एक रात तो बिना नींद लिए एयरपोर्ट और अब एक चटार्इ पर पुलिस पहरे में रात बितानी पड़ी. अब उन्हें जोधपुर जेल में फिल्म अभिनेता सलमान खान वाली काल कोठरी में कुछ राते तो गुजारनी ही पड़ेगी.
इस सारे घटनाक्रम से यह भी स्पष्ट हुआ है कि आसाराम ने चाहे आस्था पर अपनी मर्दानगी दिखार्इ है तो जोधपुर पुलिस ने भी लंबे अरसे बाद अभिनेता सलमान की तरह इस बार एक संत पर शिकंजा कसने की हिम्मत दिखार्इ है. अब यह वक्त उन अंधे अनुयायियों का है जो महज भावनाओं में बहकर हंगामे मचाने के बजाय उस पीड़ित लड़की का साथ दे ताकि दुबारा कोर्इ संत किसी अस्मत और विश्वास को तार तार नहीं कर सके. इस घटना ने संत बिरादरी को तो कठघरे में खड़ा किया ही है और साथ ही आम लोगों के ऐसे संतो के प्रति अविश्वास की भावना पनपा दी है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.