/आसाराम के बाद वंजारा ने फच्चर फंसाया मोदी के दिल्ली पहुँचने में…

आसाराम के बाद वंजारा ने फच्चर फंसाया मोदी के दिल्ली पहुँचने में…

पीएम इन वेटिंग नरेन्द्र मोदी से कुछ उनके अपने लोग भारत के प्रधानमंत्री पद की कुर्सी दूर सरका रहे हैं. पहले नाबालिग लडकी से दुराचार के मामले में आसाराम ने खुदको कानून और सरकार से ऊपर साबित करने के चक्कर में नरेंद्र मोदी को शर्मिन्दा किया आखिर तंग आकर नरेन्द्र मोदी को आसाराम से अपना पल्ला झाडना पड़ा. अभी आसाराम का मामला तंदूर पर तप ही रहा था कि डीजी वंजारा के इस्तीफे बम ने नरेन्द्र मोदी की राह में कांटे बिछा दिए. इस मुद्दे पर चेहरों की किताब याने फेसबुक पर गरमागर्म बहस चल रही है. पढ़िए प्रसिद्ध साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता मोहन श्रोत्रिय की फेसबुक वाल पर छिड़ी बहस..

#दिल्ली पहुंचने का मामला जैसे ही पक्का माना जाने लगता है, कोई न कोई फच्चर फंस ही जाता है.vanzara-amit-shah-narendra-modi-asaram

कहानी में अचानक एक “ट्विस्ट” आ जाता है. एक ही आए तो सिलट भी लिया जाए, अचानक फिर दूसरा “ट्विस्ट” आ जाता है.

पहले *असंत* ने झंझट पैदा किया, और अब इस वंज़ारा को क्या सूझी कि उसी ने झोल डाल दिया. खैर, यह तो समय ही बताएगा कि अभी और कुछ होना बाक़ी है, या तूफ़ान टल गया.

आज सबसे बड़े ताज्जुब की बात यह रही कि गुजरात सरकार के टीवी पर प्रवक्ता जयनारायण व्यास उर्फ़ *चटरपटर* उर्फ़ *खाऊं-फाडूं* आज अपने स्वाभाव के विपरीत एक भी वाक्य बोलने से पहले *चार-वाक्यों-जितना-मौन* साधे रहे.

कहीं सच में ही मामला संगीन तो नहीं है?

-मोश्रो
Meenu Jain यह कांग्रेस का नया पैंतरा लगता है

Ashok Kumar Pandey कुछ भी संभव है )

अंजू शर्मा क्या कहा जा सकता है सर ….अभी दिल्ली बहुत दूर है….

Meenu Jain मोदी का बस चले तो सारे कॉग्रेसियों को क़त्ल करवा दे

Ashok Kumar Pandey http://www.ndtv.com/article/cheat-sheet/10-quotes-from-gujarat-cop-vanzara-s-letter-bomb-413924

धनपत स्वामी चुनावी है रंग। माहौल ।मुर्दे तो दोनों ओर से जागेंगे अब। बोलेंगे भी।

Mohan Shrotriya वैसे चिट्ठी में एक वाक्य ऐसा है जिससे लगता है कि कोई साहित्यिक योगदान भी मिला है, वंज़ारा को. “गुजरात सरकार की सही जगह जेल में है, गांधीनगर में नहीं.” ऐसा वाक्य तो किसी कथा-उपन्यास में ही मिल सकता है.

Meenu Jain एक आइ पी एस कविह्रदय भी तो हो सकता है , मोश्रो जी

Mohan Shrotriya इन 10 Quotes में वह रह गया, जिसका सार मैंने अभी दिया है. सार इसलिए कह रहा हूं क्योंकि चिट्ठी में उन जेलों के नाम भी दिए गए हैं जहां गुजरात सरकार की असल जगह बताई गई है.

दिनेशराय द्विवेदी दिल्ली इत्ती आसान नहीं है। मैं ही चार महिने से कार्यक्रम बना रहा हूँ हर बार आगे सरक जा रहा है। पर इस बार पक्का है हिन्दी दिवस वहीं मनाउंगा।

Ashutosh Kumar पक्का पक्का है ?

Shahid Akhtar Dilli dur ast…. bhut dur!

Himanshu Kumar वंजारा की चिट्ठी का जेल से लीक होने के पीछे मुझे तो मुझे तो कांग्रेस , सोनिया , राहुल और माओवादियों की चाल लग रही है .
बाकी आप लोग खुद समझदार हो , जानते ही होंगे कि मोदी जी के प्रधान मंत्री बनने से कौन कौन डरा हुआ है ?

Meenu Jain //One more brown-shirt left in the lurch…Berlin falling?
Brown-Shirts: The Sturmabteilung (SA) Storm Detachment or Assault Division functioned as the original paramilitary wing of the Nazi Party. It played a key role in Adolf Hitler’s rise to power in the 1920s and 1930s.//
Sanjiv Bhatt , IPS ( Guajarat )

दिनेशराय द्विवेदी बिलकुल पक्का है जी, रिजर्वेशन हो चुका है।

Virendra Singh If it’s a conspiracy, it’s a serious one. A Modi loyalist senior police officer having been behind the bar for last seven years must have access to ‘some special information’ which if leaked out can immensely jeopardize Modi’s dream March to Delhi. Can…See More

Misir Arun एक दूसरे की पोल-पट्टी खोलने में दोनों ही नंगे हुए जा रहे हैं …अच्छा है |

Mohammad Sabir Ansari Vanjara’ letter? Impact: legal nill but politically is like a bomb

Indra Mani Upadhyay अब बंजारा कांग्रेस की ओर से चुनाव लड़ने के काबिल हो गए।

Bharat Doshi Guj ki jail me rahega

Mp Chaturvedi Modi to pm banega nahin ye saf hai lekin jo bane huye hain unse nijat pane ka rasta kya hai ?

डॉ. विक्रम जीतः संजीव भट्ट-प्रकरण का प्रभाव तो देख ही लिया; अब इनका देखना है कि कितना संगीन है!
वैसे यह कोई नहीं बता रहा कि मोदी को क्या करना चाहिये था इनके लिए! और CBI मोदी की क्रीतदासी तो है नहीं; फिर क्यों नहीं पकड़कर डाल देती है नमो को जेल में?

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.