/आसाराम के चेले शिवा के पास है आसाराम का सीडी बम…

आसाराम के चेले शिवा के पास है आसाराम का सीडी बम…

नाबालिग लड़की से यौन प्रताड़ना के आरोप में जेल के सींखचों के पीछे दिन काट रहे आसाराम के बारे में उनके प्रमुख सेवादार शिवा ने पुलिस को कई महत्वपूर्ण जानकारियां दी हैं. राजस्थान के एडिशनल एडवोकेट जनरल आनंद पुरोहित ने सेशन कोर्ट को बताया कि शिवा ने पुलिस को बताया है कि आसाराम महिलाओं से नियमित रूप से अकेले में ‘ध्यान की कुटिया’ में उनका इलाज करने के लिए मिलते थे.Shiva

पुलिस को उम्मीद है कि शिवा के पास आसाराम के एकांतवास की कुछ सीडियां भी मौजूद हैं. शिवा की हिरासत बढ़ाने के लिए पुलिस ने कोर्ट में कहा कि उसके पास आसाराम की सीडी और क्लिपिंग हैं. इनकी बरामदगी के लिए अहमदाबाद जाना पड़ेगा, इसलिए पांच दिन का रिमांड बढ़ाया जाए. कोर्ट ने पुलिस को तीन और दिनों के लिए शिवा की हिरासत दे दी.

आनंद पुरोहित ने कहा कि शिवा ने जो जानकारी दी है, उससे आसाराम के खिलाफ केस मजबूत होता है. रविवार को पुलिस ने शिवा को गिरफ्तार किया था और तब से उससे पूछताछ की जा रही है. जांचकर्ताओं का दावा है कि उनके पास इस बात के पुख्ता सबूत हैं कि नाबालिग लड़की को छिंदवाड़ा से जोधपुर लाने की साजिश में आसाराम, शिवा और होस्टल की वॉर्डन शिल्पी शामिल थी.

पुलिस का कहना है कि फोन कॉल डिटेल बताते हैं कि शिल्पी, आसाराम और पीड़ित के परिवार के साथ लगातार संपर्क में थी और यौन शोषण की घटना से पहले दोनों के बीच काफी बातें हुई हैं. जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि है कि शिल्पी और आसाराम ने पीड़ित लड़की की स्थिति पर बात की और शिल्पी ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उन्हें लड़की को ‘रोगमुक्त’ करने का मौका मिलेगा.

शिवा को कथित पीड़ित लड़की को जोधपुर रेलवे स्टेशन से आसाराम के आश्रम तक लाने का काम सौंपा गया था. शिवा ने बताया कि वह पीड़ित लड़की और उसके परिवार को लेने खुद स्टेशन नहीं गया बल्कि उसने उन्हें ऑटो से आने के लिए कह दिया और वह फोन से उनके संपर्क में रहा.

 

जांच अधिकारियों का मानना है कि मुमकिन है कि इन लोगों के बीच एसएमएस भी हुए होंगे, जिसे रीट्रीव करने की कोशिश की जा रही है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.