/मुजफ्फरनगर में हिंसा, सेना तैनात…

मुजफ्फरनगर में हिंसा, सेना तैनात…

मुजफ्फरनगर में पिछले सात दिनों से हो रही छिटपुट हिंसक घटनाओं व बने तनाव का माहौल शनिवार को सांप्रदायिक टकराव के रूप बदल गया. हिंसा की लपटों में पड़ोसी जिले मेरठ के हस्तिनापुर और रामराज कस्बे भी झुलस गए. जिले में अलग-अलग स्थानों पर दो संप्रदायों के बीच हुई मारपीट, चाकूबाजी और फायरिंग में अब तक बारह लोगों की मौत हो गई. मरने वालों में एक टीवी चैनल का पत्रकार भी शामिल है. विभिन्न स्थानों पर तीन दर्जन लोगों के घायल होने की खबर है. हालात बेकाबू देख मुजफ्फरनगर के तीन थाना क्षेत्रों में क‌र्फ्यू लगा दिया गया और देर रात सेना तैनात कर दी गई. पूरे प्रदेश को अलर्ट कर दिया गया है.Muzaffarnagar

गत 27 अगस्त को कवाल गांव में युवती से छेड़छाड़ को लेकर हुई हिंसा में उसके दो भाइयों की मौत हो गई थी. पुलिस द्वारा दोषियों के खिलाफ कार्रवाई न किए जाने से क्षुब्ध इलाके के लोगों ने प्रशासन को चेतावनी देने के बाद शनिवार को नंगला मंदौड़ में महापंचायत आयोजित की थी. पंचायत में जा रहे लोगों पर बसी गांव में संप्रदाय विशेष के लोगों ने पथराव और फायरिंग कर दी. हमले में आधा दर्जन से अधिक लोग घायल हो गए.

जैसे ही घायल लोग महापंचायत स्थल पर पहुंचे तो भीड़ में आक्रोश फैल गया. पंचायत स्थल से थोड़ी दूरी पर मिले एक युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. इसकी सूचना शहर में पहुंची तो शहर के मीनाक्षी चौक, अबुपुरा, किदवईनगर, कृष्णापुरी, खादरवाला, शेरनगर समेत कई स्थानों पर दोनों समुदाय के लोगों में आमने-सामने आ गए और घंटों पथराव और फायरिंग हुई. अबुपुरा में कवरेज करने पहुंचे टीवी चैनल के पत्रकार राजेश वर्मा की गोली लगने से मौत हो गई. इसी दौरान पुलिस द्वारा नियुक्त फोटोग्राफर इसरार को भी मार डाला गया. जौली गंगनहर व मीरापुर के मुझेड़ा के पास भी जमकर फायरिंग और पथराव हुआ.

यहां पर चार लोगों की मौत हो गई. जनपद के हालत बिगड़ते देख पुलिस प्रशासन ने शाम पांच बजे शहर में क‌र्फ्यू घोषित कर दिया और बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात कर दिया. लेकिन इससे हालात नियंत्रित नहीं हुए. देर रात तक कई इलाकों में हिंसा जारी होने की खबर है. प्रदेश के आइजी कानून व्यवस्था आरके विश्वकर्मा ने बताया है कि हालात पर काबू पाने का प्रयास जारी है. हिंसा में दस लोग मारे गए हैं. मुजफ्फरनगर शहर के तीन थाना क्षेत्रों में क‌र्फ्यू घोषित कर दिया गया है.

वहीं, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने पुलिस तैनाती के बावजूद मुजफ्फरनगर में हिंसा होने पर नाराजगी व्यक्त की है. उन्होंने हिंसा को शीघ्र काबू करने के लिए उपद्रवियों से सख्ती से निपटने और भाईचारा कायम करने के अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं. मुख्यमंत्री ने हिंसा में मारे गए टीवी पत्रकार राजेश वर्मा के परिजनों को 15 लाख रुपये की आर्थिक मदद का एलान किया है, जबकि बाकी मृतकों के परिजनों को दस-दस लाख रुपये की आर्थिक सहायता मिलेगी. सरकार ने 27 अगस्त की हिंसा में मारे गए तीनों युवकों के परिजनों को भी आर्थिक सहायता देने का एलान किया है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.