Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

वी के सिंह ने कर दी संतोष भारतीय की चमगादड़ जैसी हालत…

By   /  September 28, 2013  /  4 Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-नचिकेता देसाई||

अपना उल्लू सीधा करने के लिए किसी भी हद तक जाने वाले वरिष्ठ पत्रकार संतोष भारतीय को इस बार उन्हीं की जात बिरादरी वाले वी के सिंह ने बुरे राजनैतिक संकट में फंसा दिया है. पत्रकार महोदय की स्थिति कुछ सांप – छछूंदर जैसी हो गयी है. न तो वे वी के सिंह को निगल पा रहे हैं और नहीं उगल पा रहे. राजनैतिक रंग मंच पर भारतीय उस चमगादड़ की तरह लटक रहे हैं जिसे पशु और पक्षी दोनों ही अपनी जाति में मानने को तैयार नहीं हैं.santosh bhartiya and vk singh

लोक नायक जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण आन्दोलन में सक्रियता का दावा कर और स्वयं ठाकुर जाति से हैं, इस बिना पर कलकत्ता के हिंदी साप्ताहिक ‘रविवार’ के अंश कालिक संवाद दाता के रूप में नियुक्त होने के बाद भारतीय ने उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्य मंत्री राम नरेश यादव की सरकार में तबादले से ले कर ठेके दिलवाने का खुल कर व्यापार किया.

‘रविवार’ साप्ताहिक के बैनर का भर पूर फायदा उठाते हुए भारतीय ने उत्तर प्रदेश तथा दिल्ली के सत्ता के गलियारों में अपनी अच्छी खासी घुस पैठ बना ली. एक चतुर कलाकार की तरह भारतीय अपनी चिकनी चुपड़ी बातों से लोगो के विश्वसनीय बनने का महारथ रखते हैं. सो, जल्दी ही उन्होंने पूंजीपति कमल मुरारका का विश्वास जीत लिया और उन्हें एक नया साप्ताहिक अख़बार ‘चौथी दुनिया’ शुरू करने को राजी कर दिया. चौथी दुनिया के संपादक बनने के बाद भारतीय ने कमल मोरारका को राज्य सभा सदस्य बनवाने में मदद की और स्वयं वी पी सिंह से ठाकुरवाद के जोर पर लोक सभा चुनाव  लड़ा और जनता मोर्चा की लहर के बल पर जीता.

ठाकुरवाद के चलते वी पी सिंह के प्रधान मंत्री न रहने पर संतोष भारतीय ने चन्द्रशेखर से मेल जोल बढ़ाना शुरू कर दिया ताकि उनकी दुकानदारी चलती रहे. इसी समय उन्होंने गुजरात के मुख्य मंत्री चिमन पटेल द्वारा एक विधवा की जमीन हड़प कर लेने का पर्दाफाश करने वाली खोजी रपट को प्रीतिश नंदी से मिल कर Illustrated Weekly of India में  छपने से रुकवा दिया. इस सेवा के बदले भारतीय को संतुष्ट करने के लिए चिमनभाई ने क्या दिया यह तो सिर्फ दिवंगत मुख्य मंत्री या स्वयं संतोष भारतीय ही बता सकते हैं.

कुछ समय बहुजन समाज पार्टी की नेता मायावती की चाटुकारिता करने के बावजूद चुनावी राजनीति में असफल हो जाने के बाद भारतीय ने फिर से कमल मोरारका को ‘चौथी दुनिया’ अख़बार को पुनर्जीवित करने के लिए राजी कर लिया. ‘चौदू’ के पुन: प्रकाशन पर भारतीय ने  फिर से अपनी खोयी ताकत वापस पा ली और इस बार वे अन्ना हजारे की नाव पर सवार हो गए. यहाँ भी उनका ठाकुरवाद काम आया.  पूर्व सेना अध्यक्ष वी के सिंह को सामने ला कर भारतीय ने भोले भाले अन्ना हजारे को अपना करिश्मा दिखा कर प्रभावित कर दिया.

अन्ना हजारे को जब अमेरिका जाने का न्योता मिला तो उनके साथ वी के सिंह और संतोष भारतीय भी लग लिए. अमेरिका में हजारे पर डॉलर बरसे जिसका हिसाब किसने रखा यह तो अनुमान लगाने की बात है.

अब जब वी के सिंह ने भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेन्द्र मोदी के साथ एक मंच से सेना के पूर्व जवानो की रैली को संबोधित किया तो भारतीय का ऊँट किस करवट बैठे? अब तक तो भारतीय अपने आप को सेक्युलर कहलाते आये हैं. क्या अब वोह भाजपा में शामिल होंगे?

कहा जाता है कि राजनीति में दुश्मन के साथ एक बिस्तर शेयर करना पड़ता है.

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

आपातकाल में भूमिगत पत्रिका रणभेरी निकाल कर पत्रकारिता की शुरुआत की. हिंदी तथा अंग्रेजी भाषा में १९७८ से आज तक विभिन्न पत्र पत्रिका तथा समाचार संस्थानों में काम किया.

4 Comments

  1. Brastachar,Riswathkor,Kaladhan Papiyon ku,Jan Lok Pal Bill pass karneku Darnevale Lutere Nethavon ku ,Anna ji ke sath chod kar Naya party (AAP)banaye viswasi yonku, Teek kistarrah karna hai Samaj ke sabhi vargke log…Anna Hazare Jaise bane tho, kushal aasakega hai-na, jinda-hokr-Murdaka-Jeevan Kya Jeena.. Jai Hind..Ammika Rangaiah Goud, Social Activist, Anna Hazare Foundation-AP( Jantantramorcha ) Hyd.

  2. Shashi Shekhar says:

    Santosh Bhartiya ab AAP se apne aadmion ko ticket nahin dilwapaane ke karan Arvind Kejriwal ji ki buraayi kartey nazar aa rahe hain .. Lekin Arvindji inki kaali neeyat ke kaaran pahle se hi satark thhey ..

  3. Mehra Vipul says:

    nachiketa is of same category

  4. Santosh is a typical oppotunist person,can join party to gain money power

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

एक जज की मौत : The Caravan की सिहरा देने वाली वह स्‍टोरी जिस पर मीडिया चुप है..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: