/मोदी बना रहे हैं मुज़फ्फरनगर को गोधरा…

मोदी बना रहे हैं मुज़फ्फरनगर को गोधरा…

-नचिकेता देसाई||

गोधरा हत्याकांड के सहारे गांधीनगर की गद्दी पर काबिज नरेन्द्र मोदी ने यह ऐलान कर दिया है कि अब देश को गुजरात मॉडल के आधार पर चलाना जरूरी है. इस गुजरात मॉडल की नींव गोधरा की जगह अब मुजफ्फरनगर में रखी जा रही है. गुजरात की रण नीति को समूचे देश में कैसे लागू किया जाए इसका प्रयोग पश्चिमी उत्तर प्रदेश में शुरू हो चुका है. अंगीठी में आग लग चुकी है और इसे दावानल बनाने की तमाम कोशिश जारी हैं – प्रसार और प्रचार के सभी माध्यम इस में लग चुके हैं. भाजपा के राष्ट्रीय प्रचारक रह चुके मोदी मीडिया मैनीपुलेशन में माहिर हैं.modi (1)

मुजफ्फरनगर के दंगो की आग अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जिलों के नगरो और देहातो में फैल चुकी है. इस आग में ४० से ऊपर लोग मारे जा चुके हैं. इस से पहले बिहार के कई इलाको में भी  सांप्रदायिक दंगे हो चुके हैं. उत्तर प्रदेश और बिहार पिछले दो दशको से दंगा मुक्त राज्य रहे हैं लेकिन समाजवादी पार्टी के सत्ता पर आने के बाद ही अचानक दंगे होने शुरू हुए. आखिर क्यों? आज ये राज्य अचानक फिर से संवेदनशील हो गए हैं. दोनों ही राज्यों में भाजपा विरोधी सरकार हैं. समाजवादी पार्टी की सरकार ने जहाँ  विश्व हिन्दू परिषद् की अयोध्या परिक्रमा यात्रा को विफल बनाया वहीं बिहार के नितीश कुमार ने मोदी की सांप्रदायिक राजनीति को चुनौती देते हुए भाजपा को अपनी सरकार से अलग कर दिया.

मुजफ्फरनगर में एक लड़की की छेड़खानी जैसी छोटी सी घटना के बाद हुई तीन हत्याओं के बाद भाजपा के एक विधायक ने सोशल मीडिया पर पाकिस्तान में बनी दो साल पुरानी एक वीडियो को लगा दिया, जिसमे एक भीड़ को दो युवको को जान से मारते हुए दिखाया है. इस वीडियो को यह कह कर प्रचारित किया गया कि उसे शहर में हाल में हुई घटना के समय लिया गया. इस भ्रामक प्रचार के कारण मुजफ्फरनगर और उसके आस पास के इलाको में सांप्रदायिक हिंसा भड़क उठी.

पिछले विधान सभा चुनाव में भाजपा की हुई भारी हार के बाद पहली बार उत्तर प्रदेश में सांप्रदायिक ध्रुवीकरण होना शुरू हुआ है, जिसका सीधा सीधा लाभ भाजपा को मिलेगा ऐसा माना जा रहा  है. हाल ही में हुई हिंसा के द्वारा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मुसलमान और जाट समुदाय के बीच जो खाई खोद दी गई है इसका लाभ किसको मिलेगा इस बात की अटकल लगाई जा रही है.

अभी तो हालात ऐसे हैं कि मुख्यमंत्री अखिलेश यादव तथा उसके पिता मुलायम सिंह यादव तक दंगा प्रभावित इलाको में घुस नहीं सकते.

राजनैतिक विश्लेषको का मानना है कि यदि आज उत्तर प्रदेश में चुनाव हो तो निश्चय ही इन में भाजपा को भारी फायदा होगा. उनको इस बात की भी आशंका है कि साम्प्रदायिक ध्रुवीकरण कराने के लिए मुज़फ्फरनगर जैसी घटना देश के अन्य हिस्सों में भी कराई जा सकती हैं.

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आपातकाल में भूमिगत पत्रिका रणभेरी निकाल कर पत्रकारिता की शुरुआत की. हिंदी तथा अंग्रेजी भाषा में १९७८ से आज तक विभिन्न पत्र पत्रिका तथा समाचार संस्थानों में काम किया.