/आसाराम के भक्तों को लगने लगा डर…

आसाराम के भक्तों को लगने लगा डर…

दुष्कर्म के आरोपी आसाराम के समर्थन में बंटवा रहे पर्चे..कोर्ट में मामला लंबित, लेकिन पर्चे में आसाराम दोष मुक्त…पीडि़ता पर दबाव बनाने की कोशिश…

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व्यंगचित्र: विनय कुल्ल

-प्रतीक चौहान||
नाबालिग लड़की से यौन शोषण के आरोपों से घिरे अपने आप को भगवान बताने वाले आसाराम भले ही सलाखों के पीछे हो लेकिन उनके भक्त न केवल आसाराम के समर्थन में पर्चे बांट रहे है बल्कि पीडि़त लड़की और उसके परिवार वालो पर भी कई सवाल खड़े कर रहे है. सफेद कलर के इस पर्चे में सात तथ्य बताए गए है जो आसाराम के खिलाफ षडयंत्र को उजागर करने का दावा कर रहे हैं. इस पर्चे में न केवल मीडिया बल्कि जोधपुर पुलिस के डीसीपी के खिलाफ भी कई सवाल खड़े किए गए है. aasharam bapu scan
आसाराम के समर्थकों द्वारा बांटे जा रहे इस पर्चे में मेडिकल रिपोर्ट की बात कही गई है जिसमें दुष्कर्म की बात खारिज की गई हैं. जब कि ऐसे कोई भी मेडिकल रिपोर्ट अब तक सामने नहीं आई जिसमें दुष्कर्म की बात को खारिज किया गया हो.

पर्चे में पीडि़ता और उसके परिवार के उपर भी कई आरोप लगाए गए है. पर्चे में कहां गया है कि पीडि़ता लड़की शाहजहांपुर की रहने वाली है, पढ़ती छिंदवाड़ा में है, दुष्कर्म की बात जोधपुर की और एफआईआर दर्ज पीडि़ता ने दिल्ली में कराई ऐसा क्यों ?

इसके साथ ही पर्चे में लिखा गया है कि पीडि़ता लड़की ने 7 अगस्त को अपनी सहेलियों से कहा था कि मैं इस गुरूकुल को बदनाम कर दूंगी. बदनामी होगी तो अपने- आप गुरुकुल बंद हो जाएगा. इतना ही नहीं पर्चे में दिल्ली पुलिस को भी नहीं छोड़ा गया है. पर्चे में लिखा गया है कि दिल्ली पुलिस ने आसाराम को बदनाम करने के लिए धारा 376 लगाई.
इसके लिए राजस्थान पुलिस द्वारा दिल्ली पुलिस को फटकार भी लगाई गई. इन सभी बातो से लोगों में आसाराम की छवि सुधारने की कोशिश की गई है. पर्चे किसने बटवाए इस बात की अभी पुष्टि नहीं हो पाई है. क्योंकि पर्चे में किसी भी समर्थक के नाम का उल्लेख नहीं किया गया है.aasharam bapu scan1

पर्चे में यह भी कहा गया है कि जोधपुर पुलिस जब इंदौर पहुंची उस समय आसाराम को ट्राई जेमिनल न्यूराल्जिया की भयंकर पीड़ा का अटैक था और ब्लड प्रेशर भी बढ़ गया था डॉक्टर द्वारा आसाराम को आईसीयू में भर्ती करने की बात कही गई थी. लेकिन पुलिस ने दबाव में आकर आसाराम को गिरफ्तार किया. पर्चे बटवाने के पीछे क्या मनशा है यह तो कहना संभव नहीं है लेकिन पर्चे बांट रहे आसाराम के समर्थकों ने पीडि़ता और पुलिस पर ही आरोपों की झड़ी लगा दी है.

कानूनी राय

इस तरह के पर्चे यदि बांटे जा रहे है तो ये गैर कानूनी है. इससे पुलिस के द्वारा की जा रही जांच में भी बाधा उत्तपन्न करने की कोशिश की जा रही है. इस तरह के पर्चो से पीडि़ता पर भी दबाव बनाने की कोशिश की जा रही हैं.
सुनील सेन (अधिवक्ता)

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.