Found

The document has moved here.


Apache/2.2.23 (Unix) mod_ssl/2.2.23 OpenSSL/0.9.8o PHP/5.3.20 Server at spamcheckr.com Port 80
Subscribe to RSS
कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे mediadarbar@gmail.com पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

मेरा तो सिर्फ यही सवाल है, कि रात को दिन कैसे कह दूं…?

 

-सतीश चंद्र मिश्र ।।

अन्ना हज़ारे: अपनों ने भी ठगा?

असली मदारी (यानि सरकार) का डमरू (मीडिया) जो कुछ दिनों के लिए नौसिखिये मदारियों (टीम अन्ना) को उधार दिया गया था अब अपने सही मदारी के पास वापस आ गया और देश की जनता को जीत के झूठे गीत सुनाने में व्यस्त हो गया है। नौसिखिये मदारियों ने भी इसके सुर में सुर मिलाने में ही भलाई समझी और जैसे तैसे अपनी जान बचाई है।

आप स्वयं विचार करिए ज़रा…. अन्ना टीम द्वारा 16 अगस्त का अनशन जिन मांगों को लेकर किया गया था। उन मांगों पर शनिवार को हुए समझौते में कौन हारा कौन जीता इसका फैसला करिए।

पहली मांग थी : सरकार अपना कमजोर बिल वापस ले। नतीजा : सरकार ने बिल वापस नहीं लिया।

दूसरी मांग थी : सरकार लोकपाल बिल के दायरे में प्रधान मंत्री को लाये। नतीजा : सरकार ने आज ऐसा कोई वायदा तक नहीं किया। अन्ना को दिए गए समझौते के पत्र में भी इसका कोई जिक्र तक नहीं।

तीसरी मांग थी : लोकपाल के दायरे में सांसद भी हों : नतीजा : सरकार ने आज ऐसा कोई वायदा तक नहीं किया। अन्ना को दिए गए समझौते के पत्र में भी इसका कोई जिक्र नहीं।

चौथी मांग थी : तीस अगस्त तक बिल संसद में पास हो। नतीजा : तीस अगस्त तो दूर सरकार ने कोई समय सीमा तक नहीं तय की कि वह बिल कब तक पास करवाएगी।

पांचवीं मांग थी : बिल को स्टैंडिंग कमेटी में नहीं भेजा जाए। नतीजा : स्टैंडिंग कमिटी के पास एक की बजाए पांच बिल भेजे गए हैं।

छठी मांग थी : लोकपाल की नियुक्ति कमेटी में सरकारी हस्तक्षेप न्यूनतम हो। नतीजा : सरकार ने आज ऐसा कोई वायदा तक नहीं किया। अन्ना को दिए गए समझौते के पत्र में भी इसका कोई जिक्र तक नहीं।

सातवीं मांग : जनलोकपाल बिल पर संसद में चर्चा नियम 184 के तहत करा कर उसके पक्ष और विपक्ष में बाकायदा वोटिंग करायी जाए। नतीजा : चर्चा 184 के तहत नहीं हुई, ना ही वोटिंग हुई।

उपरोक्त के अतिरिक्त तीन अन्य वह मांगें जिनका जिक्र सरकार ने अन्ना को दिए गए समझौते के पत्र में किया है वह हैं।

(1)सिटिज़न चार्टर लागू करना,

(2)निचले तबके के सरकारी कर्मचारियों को लोकपाल के दायरे में लाना,

(3)राज्यों में लोकायुक्तों की नियुक्ति करना। प्रणब मुखर्जी द्वारा इस संदर्भ में आज शाम संसद में दिए गए बयान (जिसे भांड न्यूज चैनल प्रस्ताव कह रहे हैं ) में स्पष्ट कहा गया कि इन तीनों मांगों के सन्दर्भ में सदन के सदस्यों की भावनाओं से अवगत कराते हुए लोकपाल बिल में संविधान कि सीमाओं के अंदर इन तीन मांगों को शामिल करने पर विचार हेतु आप (लोकसभा अध्यक्ष) इसे स्टैंडिंग कमेटी के पास भेजें। कौन जीता…? कैसी जीत…? किसकी जीत…?

सतीश चंद्र मिश्र

देश 8 अप्रैल को जहां खड़ा था आज टीम अन्ना द्वारा किए गए कुटिल और कायर समझौते ने देश को उसी बिंदु पर लाकर खड़ा कर दिया है। जनता के विश्वास की सनसनीखेज सरेआम लूट को विजय के शर्मनाक शातिर नारों की आड़ में छुपाया जा रहा है….. फैसला आप करें। मेरा तो सिर्फ यही कहना है कि रात को दिन कैसे कह दूं…..?

 

 

 

 

(लेखक लखनऊ के जाने माने पत्रकार हैं। उनसे फेसबुक पर http://www.facebook.com/#!/satishchandra.mishra2 लिंक के जरिए संपर्क किया जा सकता है।)

संबंधित खबरें:

कृपया अपनी खबरें, सूचनाएं या फिर शिकायतें सीधे mediadarbar@gmail.com पर भेजें | इस वेबसाइट पर प्रकाशित लेख लेखकों, ब्लॉगरों और संवाद सूत्रों के निजी विचार हैं। मीडिया के हर पहलू को जनता के दरबार में ला खड़ा करने के लिए यह एक सार्वजनिक मंच है। पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं। हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो। आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें -मॉडरेटर

11 comments

#1Bobby patelAugust 28, 2011, 10:11 PM

आप अगर दिन को रात नहीं कह सकते , लेकिन क्या आप नहीं चाहते की आने वाला कल एक नयी सुबह देसके लोगों के लिए लाकर आये .आज जनता ६४ सालों के बाद इन काले अन्ग्रेजोकी गुलामी से कब आज़ादी मिले उसकी राह देख रही थी .आप खुद अख़बार पढ़ रहे हो तो खुद तय कीजेये की सर्कार को यह जन लोकपाल बिल को नजर में रख कर कुछ कार्यवाही शुरू नहीं करनी चाहिए.शुरुआत पहले आपनी पार्टी से करते और दूसरी पार्टी के लोगो को भी सजा करते लेकिन ऐसा हुआ नहीं क्यों की ऐसा करने से कांग्रेस को यह डर था की वोह निलुम्बित हो सकती है संसद मैं से.उनके लोग ज्यादा शामिल थे दूसरों से ज्यादा.कृपया जवाब दीजिये ,फिर मिलेंगे. वन्दे मातरम.

    #2विकास चौहानAugust 28, 2011, 11:17 PM

    आप पहले खुद तय कर लें बॉबी पटेल साहब कि आप कहना क्या चाहते हैं.. अखबार जिस झूठ को प्रचारित कर रहे हैं उसी से तो पर्दा उठाया है इस लेख के लेखक ने।

#3ajay choudharyAugust 28, 2011, 4:45 PM

बिलकुल सही कहा मिश्र जी देश की जनता के साथ खूब खिलवाड़ हुआ है. जब से टीम अन्ना ने अपना नया समझोता सत्ता पक्ष को भेजा था तुब ही पता चल गया था की ये सुब दिखावा है न तो टीम अन्ना को लोकपाल से कुछ लेना देना है और नहीं जिस कारन अनशन किया गया था उससे कोई सरोकार है सब अपने फायदे के लिए कर रहे थे. राहुल गाँधी के बयान पर बवाल हुआ न तो कारन समाज में आया और न ही रिजल्ट अगर राहुल उस दिन इतना गलत थे तो आज कौनसी ऐसी बात हुई है जिसे जनता अपनी जीत माने न तो लोकपाल पास हुआ और न ही ये समय सीमा तय हुई की कुब तक पास होगा फिर जीत और उसका जश्न सब दिखावा लगता है जो टीम अन्ना के सदस्यों ने कह दिया जनता ने मान लिया.में तो कल से ही येही देख रहा था की कैसे NGO चलाने वाले अपना उल्लू सीधा करने के लिए अन्ना का इस्तेमाल कर रहे है इनके लिए कल लालू प्रसाद यादव ने बिलकुल सही कहा की ये लोग अन्ना जी को इस्तेमाल कर रहे है.लकीन पूरी गलती हम लोगो की है जो दूसरो के फायदे के लिए इस्तेमाल होने को तयार और तत्पर रहते है.
आज में आपके माध्यम से भाई अरविन्द केजरीवाल,प्रशांत भूषण, बहिन किरण बेदी से ये पूछना चाहता हूँ की लड़ाई क्यों की थी अन्ना को अनशन पर क्यों बैठाया था इसके लिए इन सबको कारन बताओ पत्र भेजना चाहिए क्यों इन लोगो ने अपने फायदे के लिया अन्ना का तथा पूरे देश का इस्तेमाल किया
वन्दे मातरम जय हिंद जय भारत

#4KAMAL MURARAKAAugust 28, 2011, 4:21 PM

लगे रहो भाई साहब हम आपके साथ है
कमल मुरारका रतनगढ़
चुरू

#5vikasAugust 28, 2011, 2:46 PM

अच्छा है

#6Dr.O.P.VermaAugust 28, 2011, 1:14 PM

excellent analysis ,deserve appreciation for enlightening about real facts

    #7Bobby patelAugust 28, 2011, 11:26 PM

    डॉ वर्मा साहब आपने मिश्राजी को बधाई तो दी लेकिन मैं एक सवाल आपसे करता हु की जो लड़ाई भ्रस्टाचार के खिलाफ अन्ना हजारे ने जो शुरुआत की इसमें क्या गलत था.सिर्फ वोही के वोह सरकार के खिलाफ बैठे .उनको क्या जिसने भ्रस्टाचार किया है उनके सामने बैठना चाहिए था? वोह भी तो कांग्रेस के थे.तो कांग्रेस न्र उनको ६ mahine जेल से ज्यादा क्या सजा की.इस बात की alnalysis मिश्राजी क्यों नहीं की. यह बात आप के दिम्माग मैं नहीं आई.

      #8Dr.O.P.VermaAugust 29, 2011, 12:28 PM

      bobbyji ,तथ्यों की पहचान करना ज़रूरी है .जो लोग एक सीधे सादे आदमी अन्नाजी को ढाल बनाकर बंदूक चलाकर अपना उल्लू सीधा करना चाहते थे .उनकी चालाकी ये रही की उन्होंने एक सही समय ,सही जगह और सही मुद्दे को लेकर अन्ना का इस्तेमाल किया जिससे मिडिल क्लास के नोजवान भ्रमित हो गये और सडको पर आ गए .यह आप भी जानते हैं की भ्रष्टाचार इस बिल के आने से नहीं मिट सकता उस पर थोडा बहुत अंकुश लग सकेगा,बाकी आने वाला समय ही बतायेगा .ये लोग दावा करते रहे की १२० करोड़ जनता ने साथ दिया जनलोकपाल के लिए ,तो पहले अपना maths तो ठीक कर लें –इस मुल्क के गाँव की ८०% जनता के नुमाइंदे कहाँ दिखाई दिए,गरीब फटेहाल मजदूर कहाँ दिखे ,जो सांसद चुनकर संसद मैं बैठे हैं या अनेक पार्टियों के समर्थकों की राय जानने की कोई कोशिश नहीं की गयी- बस जो भी मंच पर इस त्रिमूर्ति ने कहा उसे चेनलों के माध्यम से देश की बाकी जनता को मूर्ख बनाने की चाल मैं ये लोग कामयाब हो गए .ये टीम खुद कहती है की देश के ९०-९५% लोग भ्रष्ट है तो इसका मतलब ये हुआ की रामलीला मैदान मैं जितने भी समर्थक जमा हुए उनमे से भी ज्यादातर भ्रष्ट ही रहे होंगे..निचोड़ ये है की हमे ,हरेक नागरिक को ही अपने अंदर झांककर अपनेआपको सुधारना होगा –जैसा की आखिर मैं अन्ना और उनकी टीम ने भी स्वीकार किया की हमे प्रण लेना होगा न घूस देंगे न घूस लेंगे कायदे कानूनों से आंशिक सफलता ही मिल सकती है . इसमें राजनीति,पार्टीबाजी,छेत्रवाद या जातिवाद की बात करना ही बेमानी है

        #9m.p.singhAugust 29, 2011, 1:20 PM

        वर्मा जी मै और मेरे मित्र आपकी बात से सहमत हैं ये सब भोली भली जनता को मुर्ख बनाने के अलावा और कोई दूसरी बात नहीं है अन्ना एंड पार्टी ने जनता के विश्वास को छला है आज भ्रस्ताचार के मुख्या केंद्र मीडिया और स्वयंसेवी संगठन बने हुए हैं मै ये नहीं कहता की और किसी भी जगह भ्रस्ताचार नहीं है लेकिन मीडिया और स्वयंसेवी संगठन को जन लोकपाल बिल से दूर क्यों रखा गया है इसका जबाब भारत की मासूम जनता को दो …….. मैं अजय जी की बात से भी सहमत हु इन लोगो को कारन बताओ नोटिस जारी किया जाना चाहिए
        …………..
        वन्दे मातरम जय हिंद जय भारत

          #10Dr.O.P.VermaAugust 29, 2011, 1:43 PM

          जी हाँ सिंह साहब अपने सही प्रश्न उठाया है ,इस आन्दोलन से मीडिया की biased एकतरफा भूमिका भी उजागर हो गयी है ये मीडिया के भ्रष्टाचार की तरफ भी इशारा करता है वह अपनी ज़िम्मेदारी भली प्रकार से नहीं निभा रहा है . किरण बेदी की नौटंकी और om पुरी के मंच पर गलत तरीके से भड़ास निकलने के खिलाफ संसद की तरफ से अवमानना नोटिस दिया गया है वह काबिलेतारीफ है .

#11Rajiv VermaAugust 28, 2011, 9:16 AM

Excellent analysis,
I fully agree to your points Mr. Satish. Whole drama is shifted to end fast of this old man

Add your comment

Nickname:
E-mail:
Website:
Comment:

Other articlesgo to homepage

Filmmaker Ravi Jadhav launched music of Aditi Productions “When I Had You”

Filmmaker Ravi Jadhav launched music of Aditi Productions “When I Had You”(0)

-Kulbir Singh Kalsi|| Mumbai, Marathi ace filmmaker Ravi Jadhav, launched music video of Aditi Productions “When I Had You” sung by Ruby. The video is directed by Ms Natasha Tendulkar, who assisted Dibakar Banerjee on Bombay Talkies,  Edited by Mr Nitesh Rathod, editor of Marathi film timpass, and very creative DOPs Mr Saurabh Kolhe and

जी न्यूज संवाददाता शिवम भट्ट की हरियाणा में सड़क दुर्घटना में निधन..

जी न्यूज संवाददाता शिवम भट्ट की हरियाणा में सड़क दुर्घटना में निधन..(0)

सुबह तकरीबन 4 बजे बरवाला से कवरेज करके चंडीगढ़ जा रहे कुछ पत्रकारों का कैथल से पेहवा के बीच गाँव कुलतारण के पास एक्सिडेंट हो गया जिसमे एक पत्रकार की मौके पर ही मौत हो गई और बाकी गभींर घायलों को पीजीआई चंडीगढ़ भेज दिया, जबकि ड्राइवर सकुशल है। जी न्यूज के पत्रकार शिवम भट्ट

सलील दा एक उम्दा संगीतज्ञ ही नहीं बेहतरीन इन्सान भी थे..

सलील दा एक उम्दा संगीतज्ञ ही नहीं बेहतरीन इन्सान भी थे..(0)

-सैयद एस.तौहीद|| बंगाल का मार्क्सवादी आंदोलन, हृषीकेश मुखर्जी फिर देश की पहली गीत रहित फिल्म कानून, मलयालम की महान प्रस्तुति चीमन एवं असम के चाय बगानों को एक सुत्र में पिरोने वाले…सलील चौधरी याद आ रहे हैं. असम के चाय बगानों के सान्निध्य में आपका बचपन बीता,पिता यहां पर चिकित्सक थे. मोज़ार्ट-हेडन-बिथोवन की पश्चिमी क्लासिक

Hindi Music Album “Dil Uspe Hai Marta” Launched..

Hindi Music Album “Dil Uspe Hai Marta” Launched..(0)

-Kulbir Singh Kalsi|| Chandigarh, There was a music and video release/launch today of first Hindi Music Album “Dil Uspe Hai Marta” by singer Sandy Juneja. The music launch was witnessed by media friends and some popular names from film industries. Singer Sandy Juneja told the media, that its his first music album and the video has

मेवाड़ में दसवां पत्रकार प्रोत्साहन पुरस्कार समारोह 24 दिसम्बर को

मेवाड़ में दसवां पत्रकार प्रोत्साहन पुरस्कार समारोह 24 दिसम्बर को(0)

- दिल्ली-एनसीआर के पत्रकारों से आवेदन मांगे – विजेता पत्रकारों को किया जाएगा पुरस्कृत – पुरस्कार में मिलेगी नकद धनराशि] स्मृति चिह्न] शाल व प्रशस्ति पत्र भी गाजियाबाद. वसुंधरा स्थित मेवाड़ ग्रुप आफ इंस्टीट्यूशंस आगामी 24 दिसम्बर को महामना पंडित मदन मोहन मालवीय जयंती पर दसवें पत्रकार प्रोत्साहन पुरस्कार समारोह का आयोजन करेगा. इसके लिए

read more

प्रसिद्ध खबरें..

  • Sorry. No data yet.
Ajax spinner

ताज़ा पोस्ट्स

Contacts and information

मीडिया दरबार - जहाँ लगता है दरबार. आप ही राजा हैं इस दरबार के और कटघरे में है मीडिया. हम तो मात्र एक मंच हैं और मीडिया पर अपनी निगाह जमायें हैं, जहाँ भी मीडिया में कुछ गलत होता दिखाई देता है उसे हम आपके सामने रख देते हैं और चलाते हैं मुकद्दमा. जिसपर सुनवाई करते हैं आप, जहाँ न्याय करते हैं आप. जी हाँ, यह एक अलग किस्म का दरबार है. मीडिया दरबार...

Social networks

Most popular categories

© 2014 All rights reserved.