/पूजा की चोरी और यौनकर्मियों को पूजा की इजाजत नहीं…

पूजा की चोरी और यौनकर्मियों को पूजा की इजाजत नहीं…

-एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​|| 

पश्चिम बंगाल में इस बार दुर्गोत्सव हर मायने में खास है. वामपंथी शासन में सीधे तौर पर नेताओं मंत्रियों की पूजा में भागेदारी वैचारिक तौर पर निषिद्ध थी. सार्वजनिक तौर पर धार्मिक आयोजनों में शामिल होने की मनाही थी. दिवंगत सुभाष चक्रवर्ती ही इस लक्ष्मणरेखा के अतिक्रमण की हिम्मत करते थे. अब हालत एकदम उलट है. मुख्यमंत्री तक धार्मिक आयोजनों में खुलकर भाग ले रही हैं. मंत्री अरुप विश्वास की ख्याति बतौर पूजा आयोजक की ही रही है. पूजा आयोजन से दूसरे नेता मंत्री भी जुड़े है. जाहिर है कि इस दुर्गोत्सव में सत्ता की गंध खूब होगी.durga-puja

दूसरी ओर कोलकाता के गंगातट का सौदर्यीकरण की धूम है और पर्यटन बचाने के लिए राज्य सरकार दुर्गोत्सव की मार्केटिंग कर रही है. विदेशी पर्यटक न सिर्फ पंडालों में हाजिर रहेंगे बल्कि गंगा की जलयात्रा मार्फत वे इस त्योहार का आनंद उठायेंगे.

अर्थ संकट के बावजूद

देशभर में भारी आर्थिक संकट, बोनस में कटौती, रुपये में गिरावट और दमतोड़ू मंहगाई के बावजूद पूजा बाजार बूम बूम है.

इसी के मध्य पहली बार कोलकाता में पूजा चोरी का आरोप भी लग रहा है. बाकायदा पूजा आयोजन बेदखल. इसके साथ ही सोनागाछी के यौनकर्मियों को पूजा की अनुमति न देने का मामला अदालत में पहुंच गया है.

पुलिसिया मदद और राजनीतिक संरक्षण

वैसे तो दुर्गोत्सव के दौरान चोरी राहजनी की वारदातें खूब बढ़ जाती है. लेकिन पूजा के ही चोरी हो जाने की कोई नजीर नहीं. इस बार की कोलकतिया पूजा की यह शायद सबसे सनसनीखेज खबर है. आरोप है कि इस चोरी के पीछे भी पुलिसिया मदद और राजनीतिक संरक्षण दोनों है.

जागरणी की पूजा

गड़ियाहाट के गोलपार्क के नजदीक जागरणी नामक संस्था पिछले 75 सालों से लगातार दुर्गापूजा का आयोजन करती रही है. अब उस पूजा के दखल की लड़ाई तेज है. बाहरी लोग इस पूजा पर कब्जा करके जागरणी को हाशिये पर डालने की कोशिश में हैं. वे लोग कह रहे हैं कि अबसे जागरणी नहीं, बल्कि वे ही पूजा का आयोजन करेंगे. इस मामले में वे बाकायदा रंग बाजी कर रहे हैं.

जागरणी के पूजा सचिव देवाशीष ने कहा कि बाहरी लोग उनसे पूजा का आयोजन छोड़ने को कह रहे हैं और उनकी पूजा की सरे आम चोरी हो रही है.

नगर निगम की अनुमति कूड़ेदान में

जागरणी की इस 75 साल पुरानी पूजा के लिेये नगर निगम की इजाजत है. अनुमोदन किया है लेक पुलिस थाना ने भी. चंदे की रसीद पर पुलिस की मुहर भी है. तमाम दस्तावेजों में पूजा सचिव और दूसरे सदस्यों के नामोल्लेख हैं. लेकिन वे सारे दस्तावेज अब कूड़ेदान में हैं.

सत्ता की गंध

पूजा के दखलदार सत्तादल से जुड़े लोग बताये जा रहे हैं. सरे आम पूजा कमेंटी के लोगों को डराया धमकाया जा रहा है. पुलिस में रपट दर्ज करने के बाद चोरी के बाद सीनाजोरी बढ़ गयी है. पुलिस सत्ता संरक्षण के खिलाफ पूजा कमेटी की कोई मदद करने को तैयार नहीं है. नतीजा भयानक निकलता दीख रहा है.

सोनागाछी में पूजा की अनुमति नहीं

कोलकाता हाईकोर्ट ने कोलकाता पुलिस से बाकायदा जवाब तलब किया है कि वह बतायें कि यौनकर्मियों को पूजा की अनुमति क्यों नहीं दी जा सकती. न्यायाधीश संजीव बंद्योपाध्याय ने यौनकर्मियों की संस्था दरबार महिला समन्वय समिति की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया है. अगली सुनवाई 17 अक्तूबर को है. तब तक पूजा निपट भी जायेगी.

अनुमति नहीं तो हाईकोर्ट में मामला

गौरतलब है कि सोनागाछी में पूजा के लिए बड़ताला थाने में दरख्वास्त दिया दरबार ने. दरबार की ओर से वकील अनिंद्य बंद्योपाध्याय ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर दी.

सरकारी दलील

पुलिस व राज्य सरकार के वकील ने अनुमति दिये जाने का विरोध करते हुए दलील दी कि सोनागाछी की घनी आबादी के बीच पूजा की इजाजत दी गयी तो विधि व्यवस्था की समस्या उत्पन्न हो जायगी. जिसे सुलझाना पुलिस के लिए संभव नहीं होगा.

पहले भी पूजा हुई है

दरबार के वकील का जवाब था कि अविनाश कविराज स्ट्रीट की जिस जगह पूजा की अनुमति मांगी गयी है, वहां विशाल पंडाल में पहले भी गणेश पूजा हुई है. तो गणेश पूजा के लिए जब अनुमति दी गयी तो उसी जगह दुर्गा पूजा की भी इजाजत दी जा सकती है.

न्याय की उम्मीद

दरबार सचिव भारती डे ने उम्मीद जतायी है कि हाईकोर्ट में उन्हें न्याय मिलेगा.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.