/गिर्दा के जन्मदिन पर समाज को बेहतर बनाने पर चर्चा…

गिर्दा के जन्मदिन पर समाज को बेहतर बनाने पर चर्चा…

-अयोध्या प्रसाद ‘भारती’||

रुद्रपुर (उत्तराखंड), उत्तराखंड के प्रख्यात जनकवि, रंगकर्मी और जनआंदोलनकारी गिरीश तिवारी गिर्दा का जन्मदिन 10 सितंबर को सांस्कृतिक नाट्य संस्था शैलनट के तत्वावधान में मनाया गया. इस दौरान उनके गीतों को गाते हुए सांस्कृतिक यात्रा भी निकाली गई. कार्यक्रम में देहरादून, अल्मोड़ा, नैनीताल, पिथौरागढ़, रुद्रपुर और अन्य स्थानों से आये जाने-माने पत्रकारों, रंगकर्मियों, कवियों, साहित्यकारों, शिक्षकों, आंदोलनकारियों आदि ने प्रतिभाग किया. नगर निगम सभागार में आयोजित कार्यक्रम में गिर्दा के जीवन पर विनय पांथरी ने विस्तार से प्रकाश डाला.Girda Geet

गिर्दा के सहयोगी रहे वरिष्ठ पत्रकार, आंदोलनकारी और नैनीताल समाचार के संपादक राजीव लोचन शाह ने 1977 में गिर्दा से पहली भेंट से लेकर 2010 में उनकी मृत्यु तक के अपने अनुभव बताए. कहा कि गिर्दा देश और दुनिया में होने वाली जनविरोधी गतिविधियों पर चिंतित रहते थे और हालातों को बदलने के लिए जनएकजुटता पर जोर देते थे तथा जनता के आंदोलनों में अग्रिम पंक्ति में रहते थे. वरिष्ठ पत्रकार राजीव नयन बहुगुणा ने गिर्दा की याद के बहाने अमीर खुसरो से लेकर अब तक के संस्कृति, रंग और साहित्य कर्म के महत्त्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कला, साहित्य, पत्रकारिता के लोगों के जनता के बीच जाने से उनकी समस्याएं, उनके शब्द, उनकी सभ्यता और संस्कृति का पता चलता है, जिससे आपका ज्ञान समृद्ध होता है. इन्हें जनता की चेतना को उन्नत करने के उद्देश्य से अपना कला, रंग, साहित्य अथवा पत्रकारिता कर्म करना चाहिए. बहुगुणा ने आज के तथाकथित विकास और इस विकास के कारण बढ़ रहे अपराधों, संवेदनहीनता, आर्थिक संकट पर बात रखते हुए कहा कि समाज के संवेदनशील लोगों का कर्तव्य है कि वे जनता के बीच इन सब चीजों के बारे में चेतना जागृत करें और समाज, सभ्यता संस्कृति संरक्षण के लिए तैयार करें.

बहुगुणा ने हारमोनियम के साथ फैज अहमद फैज का गीत ‘हम देखेंगे…’ सुनाकर हॉल में मौजूद लोगों को आह्लादित कर दिया. कार्यक्रम के बीच में शैलनट द्वारा गिर्दा की याद में की गई नन्धौर नदी अध्ययन पदयात्रा की डॉक्यूमेंटरी का प्रदर्शन किया गया. यह अध्ययन यात्रा इसी वर्ष मार्च में डॉ0 डीएन भट्ट के नेत्त्व में नैनीताल जिले के सबसे पिछड़े इलाके ओखलकांडा में की गई. इस यात्रा के दौरान इस अति पिछड़े क्षेत्र की शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, संचार, रोजगार, पर्यटन लोक संस्कृति व महिलाओं की स्थिति पर रिपोर्ट तैयार की गई. अध्यक्षता करते हुए प्रो0 प्रभात उप्रेती ने कहा कि व्यवस्था लगातार जनविरोधी होती जा रही है, समाज निरंतर पतन की ओर जा रहा है ऐसे में गिर्दा बहुत प्रासंगिक हैं और जबकि गिर्दा की याद में विभिन्न स्थानों पर आयोजन हो रहे हैं, यह आशा जगती है कि समाज और व्यवस्था को सही राह दिखाने, सही रास्ते पर लाने के लिए अभी काफी लोग हैं, इन्हें अपनी मुहिम को जन-जन तक ले जाना चाहिए और अपने अभियान से युवाओं को खासतौर से जोड़ना चाहिए. अन्य वक्ताओं ने नवउदारवाद के समाज पर पड़ रहे कुप्रभावों पर चिंता प्रकट की और इस तरह के जनजागरूकता बढ़ाने वाले कार्यक्रमों के अधिकाधिक आयोजनों पर बल दिया.

महिला कल्याण संस्था दिनेशपुर की टीम ने ढोलक और हारमोनियम की धुन पर गिर्दा का गीत प्रस्तुत किया. कार्यक्रम का संचालन उमेश डोभाल पुरस्कार प्राप्त पत्रकार भास्कर उप्रेती ने किया. बाद में शैलनट संस्था के कार्यकर्ताओं व गिर्दा के सहयोगियों ने उनके गीतों को गाते हुए सांस्कृतिक जनयात्रा निकाली, शुरुआत राजीव लोचन साह ने गिर्दा का गीत ‘जैंता एक दिना तो आलो उ दिन यो दुनि में’ गाकर की. जनयात्रा में गिर्दा, बल्ली सिंह चीमा, हीरा सिंह राणा के गीतों सहित और तमाम गीत गाये गये. जनयात्रा नगर के विभिन्न मार्गों से होती हुई गांधी पार्क पहुंची और सभा में तब्दील हो गयी. यहां वक्ताओं ने इस संकल्प के साथ सभा समाप्त की कि गिर्दा और इस तरह के तमाम सचेत लोगों का जो समाज और व्यवस्था को हिंसा, भ्रष्टाचरण रहित सहज, सरल, सत्य, संवेदनशील बनाने का सपना था, उसे पूरा करने के लिए जी-जान से प्रयास करेंगे. कार्यक्रम में डॉ0 एलएम उप्रेती, डॉ0 मनमोहन सिंह, पवन अग्रवाल, चंद्रशेखर करगेती, डा. डीएन भट्ट, प्रवीन भट्ट, दीप पाठक, विवेक पांडे, दिनेश कर्नाटक, शैलनट संस्था के अध्यक्ष हेम पंत, मदनमोहन बिष्ट, वीसी सिंघल, अयोध्या प्रसाद ‘भारती’, रूपेश कुमार खेमकरण ‘सोमन’, हषवर्धन वर्मा, सुनील पंत, प्रेरणा गर्ग, विजय गुप्ता समेत विभिन्न स्थानों से आए रंगकर्मी, साहित्यकार आदि मौजूद थे.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.