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प्रकाश पोहरे बने ‘इलना’ के उपाध्यक्ष…

By   /  September 14, 2013  /  No Comments

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महाराष्ट्र के नागपुर एवं अकोला से प्रकाशित राष्ट्रीय समाचार पत्र देशोन्नति (मराठी) के ग्रुप एडिटर प्रकाश पोहरे को भारतीय भाषाई समाचार पत्र संगठन (इलना) का उपाध्यक्ष चुना गया है. पिछले दिनों आगरा में आयोजित संगठन की 72वीं वार्षिक बैठक में प्रकाश पोहरे को सर्वसम्मति से चुना गया. इस दौरान परेश नाथ (दिल्ली प्रेस) को सर्वसम्मति से दुबारा अध्यक्ष पद के लिए चुना गया.Prakash Pohare

बैठक में देश भर से आए 160 प्रकाशकों ने हिस्सा लिया. अपने अध्यक्षीय संबोधन में परेश नाथ ने भाषाओं के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि भाषाई समाचार पत्र ही देश के लोकतंत्र की जान हैं. इनके बगैर हमारा कोई भी संवैधानिक या कानूनी अधिकार सुरक्षित नहीं है. प्रकाश पोहरे ने खुद को उपाध्यक्ष चुनने के लिए इलना के सभी सदस्यों का धन्यवाद किया. उन्होंने कहा कि वो इस नई जिम्मेदारी को पूरी लगन से निभाएंगे. विदर्भ पब्लिकेशन के कर्ता-धर्ता प्रकाश पोहरे का नाम महाराष्ट्र के पत्रकारिता जगत में काफी सम्मान से लिया जाता है. इसी पब्लिकेशन के अखबार देशोन्नति (मराठी) और राष्ट्रप्रकाश (हिन्दी) को विदर्भ में किसानों की आवाज माना जाता है.

श्री पोहरे के नेतृत्व में विदर्भ, खानदेश और मराठवाड़ा में सबसे ज्यादा प्रसारित इस पत्र समूह ने अपनी सफलता के झंडे गाडे हैं. फिलहाल पोहरे इलना के माध्यम से भाषायी समाचार पत्रों के अधिकार के लिए लड़ रहे हैं. गौरतलब है कि अपने गठन के बाद इलना ने भाषायी समाचार पत्रों को एक मंच दिया है. इसके माध्यम से छोटे अखबार समूहों को नई ताकत मिली है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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