/आसाराम की मुश्किलें और बढ़ी…

आसाराम की मुश्किलें और बढ़ी…

नाबालिग छात्रा पर यौन हमले के आरोपों से घिरे आसाराम की न्यायिक हिरासत तीस सितम्बर तक बढ़ा दी गयी है. वहीँ, उसकी जमानत याचिका पर उच्चन्यायालय में आज सुनवाई होनी है मगर खुद आसाराम के चेले ही आसाराम को जेल में सड़ने देने के लिए भरपूर सामान जुटा रहे हैं.asaram-in-custody

आसाराम के एक कथित समर्थक द्वारा पीड़ित लड़की के पिता को बयान बदलवाने के लिए कथित रूप से धमकाने का मामला सामने आया है. पीड़ित पक्ष के वकील मनीष व्यास ने रविवार को एक ऑडियो टेप मीडिया में जारी किया. इसमें शाहजहांपुर आश्रम का सेवादार श्याम पेंटर पीड़ित के पिता के दोस्त शिवनाथ से कह रहा है कि यदि लड़की ने बयान नहीं बदला तो उसे जान से मार दिया जाएगा. हालांकि, यह बातचीत 30 अगस्त की है, तब आसाराम गिरफ्तार नहीं हुए थे.

वकील मनीष व्यास ने कहा कि वह कोर्ट को बताएंगे कि आरोपी द्वारा परोक्ष रूप से गवाहों को डराया और धमकाया जा रहा है. ऐसे में जमानत याचिका खारिज किया जाना न्यायसंगत होगा. उन्होंने कहा कि गवाह की सुरक्षा के लिए आरोपी का जेल में रहना जरूरी है. संभावना है कि जेल में 14 दिनों से बंद आसाराम की ज्यूडीशियल कस्टडी फिर से बढ़ाई जा सकती है.

सेवादार श्याम पेंटर पीड़ित के पिता के दोस्त शिवनाथ को फोन पर दी गई धमकी कुछ इस तरह है:

शिवनाथ: हां, श्याम भाई बोलो.

श्याम: बापू ने कहा है कि वह मेरा पक्का चेला है, बहकावे में ऐसा कर रहा है, उसे समझाओ.

शिवनाथ: अब वह ब्रह्मज्ञानी डर क्यों रहा है?

श्याम: डर नहीं रहे, जो लोग पैसे और धमकी से बापू के खिलाफ ये करवा रहे हैं, वे कितने दिन साथ देंगे? सोनिया की सरकार 6 माह बाद नहीं रहेगी, फिर? उसे कहो, बयान बदल दे फायदे में रहेगा.

शिवनाथ: बयान बदलने से फायदा होगा?

श्याम: नहीं बदलेगा तो उसे जान से मार देंगे. बापू के लाखों शिष्य हैं. कुछ भी कर सकते हैं. तुम उसके दोस्त हो, उसे समझाओ कि पैसा ले और बयान बदल दे.

शिवनाथ: वह तो बुरी तरह डरे हुए हैं.

श्याम: डरेंगे तो सही. बुद्धि भ्रष्ट हो चुकी है. सेवादार पीछे नहीं हटेंगे. बयान नहीं बदला और साथ देने वाले भी छूट जाएंगे तो वह घर का रहेगा, न घाट का.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.