/अवैध पोस्टरों के ज़रिये टीम मोदी उतरी मैदान में…

अवैध पोस्टरों के ज़रिये टीम मोदी उतरी मैदान में…

आगामी लोकसभा चुनावों में कैसे कैसे हथकंडे आजमाए जा सकते हैं, इसकी बानगी मिलती है इन अवैध पोस्टरों से..क्या मोदी ने लगवाये सोनिया और राहुल गांधी के पोस्टर..छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर को रंग दिया गया है इन कार्टून वाले पोस्टर्स से..कांग्रेसियों को पता ही नहीं…पोस्टर में बताया सोनिया और राहुल देश के लुटेरे…

-प्रतीक चौहान||

अब तक फर्जी आईडी बनाकर सोशल मीडिया पर सोनिया गाँधी और राहुल गांधी के ख़िलाफ़ अभद्र और अपमानजनक तस्वीरों के ज़रिये चल रहा अभियान नरेन्द्र मोदी को भाजपा की तरफ से प्रधानमंत्री पद का दावेदार घोषित करते ही अवैध पोस्टरों के ज़रिये सडकों पर भी उतर आया है.

sonia poster

यही नहीं इन पोस्टरों पर न तो किसी प्रेस का नाम छपा है और न ही किसी छपवाने वाले का. जिससे इन पोस्टरों की वैधता भी संदेह के घेरे में है. यही नहीं प्रिंटिंग प्रेस के लिए बने कानूनों के अनुसार बिना क्रेडिट लाइन दिए पोस्टर छापना दंडनीय अपराध है.

नरेंद्र मोदी की आलोचना में व्यस्त कांग्रेस के तमाम नेताओं को अपनी ही पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी की कितनी चिंता है ये भी इन पोस्टरों से रायपुर की दीवारें पोत दिए जाने से सामने आ गयी है.

सोनिया और राहुल गांधी के पोस्टर रायपुर के मुख्य चौक जयस्तंभ चौक में पिछले 4 दिन से लगे हुए है. लेकिन कांग्रेसियों को इस अवैध पोस्टर की वास्तविकता जानने और हटवाने में कोई भी दिलचस्पी नहीं है.

sonia poster1चुनाव के नजदीक आते ही तमाम राजनीति पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप लगाना तो आम बात है. लेकिन अभी चुनाव में कुछ महीनों का वक्त बचा है. लेकिन प्रदेश की राजनीति चुनाव के पहले ही गर्मा गई है. प्रदेश कांग्रेस तमाम अखबारों में प्रदेश के मुख्यमंत्री का कार्टून छपवा रही है. वही कांग्रेस अध्यक्षा सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी के कार्टून वाले पोस्टर राजधानी के तमाम चौक-चौराहों पर चिपकाए गए है. इस पोस्टर में सोनिया गांधी और राहुल गांधी देश के लुटेरे बताए गए है.

पोस्टर में स्विस बैंक का भी जिक्र किया गया है. इसके अलावा पोस्टर में सोनिया गांधी, राहुल गांधी को आशीर्वाद देती नजर आ रही है. उनके हाथ से सोने और चांदी के सिक्के राहुल गांधी की पोटली में भरने का वरदान देते पोस्टर में दिखाया गया है. इसके अलावा पोस्टर में किसी के भी नाम का जिक्र नहीं किया गया है. इस लिए ये कहना मुश्किल है कि पूरे शहर में सोनिया और राहुल के पोस्टर किसने लगाया है.

जय स्तंभ चौक को भी नहीं छोड़ा

जय स्तंभ चौक को राजधानी का ह्रदय स्थल माना जाता है. यह वही स्थल है जहां रायपुर के प्रथम वीर सेनानी वीर नारायण सिंह शहीद हुए थे. पोस्टर लगाने वाले लोगों ने इस वीर भूमि को भी नहीं छोड़ा. इस चौक में भी सोनिया गांधी और राहुल गांधी के पोस्टर लगाए गए है. इसके अलावा भी इस चौक में प्रचार-प्रसार के लिए कई पोस्टर लगाए गए है.

अधिनियम 1951 की धारा 127-ए का उल्लंघन
इन नियम के तहत प्रिंटिंग प्रैस को किसी भी प्रचार प्रसार की सामग्री या छपने वाले पोस्टर में अपने प्रिंटिंग प्रैस का नाम व पता मुद्रित करना जरूरी होता है. लेकिन इस पोस्टर में किसी भी प्रैस का नाम नहीं है. जो सीधे सीधे अधिनियम 1951 की धारा 127 -ए का उल्लंघन है.

इनका कहना है..

ऐसे किसी पोस्टर की जानकारी मुझे नहीं है. यदि ऐसे पोस्टर लगाए गए है तो वो भारतीय जनता पार्टी के द्वारा ही लगाए गए होंगे. हम अज्ञात लोगों के खिलाफ थाने में इसकी शिकायत करेंगे.

-आरपी सिंह (कांग्रेस प्रवक्ता)

भाजपा के पास इतना समय नहीं है कि वो सोनिया और राहुल गांधी के खिलाफ शहर में पोस्टर लगवाए. भारतीय जनता पार्टी ऐसी ओछी राजनीति नहीं करती.

– सच्चिदानंद उपासने, प्रवक्ता ( भाजपा)

मैं अभी दिल्ली में हूं. ऐसे किसी भी पोस्टर की जानकारी मुझे नहीं है. यदि ऐसे पोस्टर लगे है तो युवा कांग्रेस इसकी शिकायत थाने में कराएगी और पोस्टर लगाने वालों को जल्द से जल्द गिरफ्तारी की मांग करेगी.

सुनील कुकरेजा (युवा कांग्रेस रायपुर लोकसभा अध्यक्ष)

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.