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मेट्रो स्टेशन बने ऐयाशी के अड्डे, DMRC करेगा जाँच…

महज पांच सौ रुपये लेकर प्रेमी युगलों को दिल्ली मेट्रो परिसर में ऐयाशी करने के लिए एकांत जगह मुहैया कराने के मामले को डीएमआरसी (दिल्ली मेट्रो रेल निगम) ने गंभीरता से लिया है.  जी न्यूज़ ने एक स्टिंग आपरेशन कर इसका राज फ़ाश किया था. अब डीएमआरसी ने पूरे प्रकरण की जांच के आदेश दिए हैं. डीएमआरसी ने आरोपी कर्मियों की पहचान के लिए समाचार चैनल को नोटिस जारी कर स्टिंग की सीडी मांगी है.Delhi_Metro

जी न्यूज़ चैनल द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन में दिखाया गया है कि मेट्रो स्टेशन परिसर में बने शौचालय से लेकर सफाई कर्मचारियों को सामान रखने के लिए महफूज स्थान दिए गए हैं. कर्मचारी दो सौ से पांच सौ रुपये लेकर कैमरों की जद से बाहर इन स्थानों को प्रेमी युगलों को धड़ल्ले से मुहैया करा रहे है.

मंगलवार अपराह्न में जैसे ही यह स्टिंग आपरेशन को दिखाया गया, सभी सकते में रह गए. आनन-फानन में डीएमआरसी प्रशासन ने चैनल से संपर्क कर स्टिंग की सीडी जांच के लिए मांगी और उसे डीएमआरसी के मुख्य सुरक्षा आयुक्त को सौंप दी. स्टिंग में मेट्रो के 18 स्टेशनों पर इस तरह की गतिविधि होने का उल्लेख है. मेट्रो स्टेशन पर जहां-तहां लगे सीसीटीवी कैमरे की जद से बाहर शौचालय वाले हिस्से को एकांत जगह के रूप में दिखाया गया है. मेट्रो प्रशासन का कहना है कि शौचालय परिचालन का जिम्मा गैरसरकारी संस्था को दिया है. संस्था के कर्मचारी इसमें लिप्त पाए गए तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी.

गौरतलब है कि दिल्ली की लाइफलाइन कही जाने वाली मेट्रो में गत जुलाई में सुरक्षा में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद प्रेमी युगलों का एमएमएस सार्वजनिक होने पर जबरदस्त हंगामा हुआ था. तब भी डीएमआरसी ने मामले को संज्ञान लेते हुए जांच के आदेश दिए थे, लेकिन जांच रिपोर्ट अब तक नहीं आई है.

डीएमआरसी के कार्यकारी निदेशक (जनसंपर्क) अनुज दयाल का कहना है कि ‘हमने जांच के आदेश दे दिए हैं. अगर कोई दोषी है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.’

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.