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ताप्ती पर राजनीति महँगी पड़ सकती है शिवराज को…

By   /  September 18, 2013  /  2 Comments

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आखिर बर्दाश्त की एक सीमा होती है..ताप्ती और भक्तों को सीमा लांघने को मजबूर न करे शिवराज…नर्मदा की तरह ताप्ती के बारे में नहीं सोचा तो तख्ता पलट जाएगा…

बैतूल, इस बात में कोई अतिश्योक्ति नहीं कि एन वक्त पर ताप्तीचंल में बसे बैतूल जिले में जन आर्शिवाद लेने के लिए आने वाले शिवराज सिंह चौहान अपना कार्यक्रम ही बदल डाले. बैतूल जिले में इस समय मध्यप्रदेश गान में मां सूर्यपुत्री ताप्ती का नाम शामिल न किए जाने के चलते फैले जन आक्रोष की खबर सीएम हाऊस तक पहुंचने के बाद अब इस बात को लेकर आशंका जतलाई जा रही है कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह ने मुलताई में सूर्यपुत्री पुण्य सलिला मां ताप्ती की महिमा का बखान करके मध्यप्रदेश गान में मां ताप्ती का नाम शामिल करवाने की घोषणा की थी.tapti

इस बीच अभी तक मध्यप्रदेश की मंत्रीमंडल केबिनेट ने उक्त कार्य को असली जामा नहीं पहनाया. जिसके चलते मध्यप्रदेश गान में मां सूर्यपुत्री ताप्ती का नाम शामिल नहीं हो सका. लोक संस्कृति एवं जन सम्पर्क मंत्री द्वारा अब तर्क दिया जा रहा है कि संघ की विचारधारा से जुड़े मध्यप्रदेश गान के रचियता महेश श्रीवास्तव (मध्यप्रदेश शासन द्वारा राज्यमंत्री दर्जा प्राप्त) नहीं चाहते कि मध्यप्रदेश गान में ताप्ती का नाम जुड़े. लेकिन पर्दे के पीछे का सच कुछ और ही बयां करता है, जिसके अनुसार लोक संस्कृति एवं जन सम्पर्क मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा चाहते है कि ताप्ती का नाम जुड़ता है तो बेतवा का भी नाम जुड़े. आम सहमति का रोना रोकर प्रदेश की भाजपा सरकार एक ओर सूर्य नमस्कार को स्कूलो में अनिवार्य करती है, वहीं दुसरी ओर स्कूलो में गाए जाने वाले मध्यप्रदेश गान में सूर्य छाया की पुत्री ताप्ती से परहेज करके उसका तिरस्कार कर रही है. नदी और नारी के संग भेदभाव की इस विचित्र त्रासदी का शिकार बना आदिवासी बाहुल्य बैतूल जिला सूर्य छाया पुत्री ताप्ती के कुल प्रवाह क्षेत्र 750 किलोमीटर में से 250 किलोमीटर का क्षेत्र अपने आंचल में समेटे हुए है. मध्यप्रदेश गान को लेकर बैतूल जिले की जन आस्था जुड़ी हुई है. एक ओर गुजरात सरकार ने ताप्ती को सम्मान देकर तापी जिला का निमार्ण किया, वहीं दुसरी ओर बैतूल जिले में ताप्ती के नाम ऐसा कोई शासकीय भवन तक नहीं है, जिससे स्थानीय लोगों को प्रसन्नता मिले. ताप्ती को प्रदेश गान में शामिल करने की मांग मध्यप्रदेश की विधानसभा में मुलताई के विधायक सुखदेव पांसे तक उठा चुके है.

जबसे गान बन कर तैयार हुआ है मां ताप्ती जागृति मंच एवं मां सूर्यपुत्री ताप्ती जागृति समिति सैकड़ो आवेदन – मांग पत्र – ज्ञापन  देकर धरना – प्रदर्शन – बैतूल सहित पूरे जिले में बंद का सफल आयोजन कर चुकी है. भैसदेही में मुख्यमंत्री को ताप्ती जल तथा ताप्ती पुराण तक भेट किया गया था ताकि मुख्यमंत्री सूर्य छाया पुत्री मां ताप्ती के धार्मिक महत्व को समझ सके. फिल्म स्ट्रार एवं टीवी कलाकार ऋषिता भटट् तक मध्यप्रदेश गान में मां सूर्य छाया पुत्री  ताप्ती का नाम शामिल करवाने की वकालत कर चुकी है. राज्य सरकार को कानूनी नोटिस से लेकर यह वह कार्य किया गया है जिसके बदले सिर्फ आश्वासन मिला है. मुलताई में मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद आम जन मानस को उम्मीद थी कि इस बार प्रदेश गान में ताप्ती का नाम शामिल हो जाएगा लेकिन मुख्यमंत्री की वादा खिलाफी का इस बार होने वाली जनआर्शिवाद रैली पर जबरदस्त असर पडऩे वाला है. जिला निगरानी समिति ने ताप्ती की पीड़ा को अपने होर्डिंग में स्थान देकर मुख्यमंत्री से सवाल किया है कि ताप्ती का नाम जब शामिल नहीं हुआ तो फिर क्यूं दे आर्शिवाद.

ताप्तीचंल में बसे बैतूल जिले की पुण्य सलिला सूर्य छाया पुत्री मां ताप्ती के मान – सम्मान की लड़ाई मुख्यमंत्री के गृह जिले सीहोर जेत ग्राम से गुजरने वाली नर्मदा मैया से कम नहीं है. अगर मुख्यमंत्री को नर्मदा मैया से प्यार है तो उन्हे ताप्ती मैया की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए. आखिर बर्दास्त की भी कोई सीमा होती है. प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह सूर्य छाया पुत्री मां ताप्ती और उसके भक्तो के धैर्य एवं सहन शीलता की परीक्षा न लने शिवराज क्योकि ताप्ती जब सीमा को लाधंती है तो गुजरात का सूरत बदसूरत हो जाता है और ताप्ती भक्त सीमा लांधते है सूरत और सीरत दोनो ही बदल जाएगी. मध्यप्रदेश गान में मां सूर्य छाया पुत्री ताप्ती के नाम को शामिल नहीं किए जाने की मुख्यमंत्री की मुलताई में की गई घोषणा के बाद मां सूर्यपुत्री ताप्ती जागृति समिति मध्यप्रदेश ने प्रदेश की भाजपा सरकार को चेतावनी देते हुए सरकार को समय रहते सोच बदल कर भूल सुधारने का आखरी मौका दिया है. समिति ने स्पष्ट किया है कि यदि भाजपा सरकार ने विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने के पूर्व प्रदेश गान में ससम्मान मां सूर्य छाया पुत्री ताप्ती का नाम शामिल न करने पर बैतूल – बुरहानपुर जिलो में ताप्ती भक्तो को भाजपा के खिलाफ मैदान में उतारने का मन बना लिया है.

समिति के प्रदेश अध्यक्ष रामकिशोर पंवार के अनुसार हम सम्मान मांग रहे है कोई भीख नहीं है. श्री पंवार ने कहा कि एक ओर मध्यप्रदेश सरकार के प्रवक्ता नरोत्तम मिश्रा इस बात का दांवा करते है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह की अभी तक की गई 80 प्रतिशत घोषणाओं को पूरा किया जा चुका है ऐसे में मध्यप्रदेश गान में ताप्ती को स्थान क्यूं नहीं मिल सका है. श्री पंवार ने कहा कि बैतूल के नपुसंक नेताओं ने बैतूल का मान – सम्मान शिवराज के चरणो में चरण वंदना में लगा रखा है. श्रभ् पंवार ने कहा कि बैतूल जिले के भाजपा के नेता इस बात का जवाब प्रदेश की भाजपा सरकार और उसके जनप्रतिनिधिय मुख्यमंत्री को बैतूल में जनआर्शिवाद दिलवाने के लिए ला रहे है या उसे निपटाने के लिए क्योकि बैतूल जिले का निम्र दर्जे का आम आदमी मां सूर्य छाया पुत्री के इस तरह के अनादर के बाद उसे अपना आर्शिवाद दे पाएगा. श्री पंवार ने जिले के सभी ताप्ती धर्मो के ताप्ती भक्तो से अनुरोध किया है कि प्रदेश के मुख्यमंत्री को ताप्ती नाम से परहेज करने पर आर्शिवाद दिया जाना मां सूर्य छाया पुत्री ताप्ती का ही अपमान होगा. उल्लेखनीय है कि ताप्तीचंल में बसे बैतूल जिले में तीन बार भैसदेही, मुलताई, बैतूल में पुण्य सलिला मां सूर्यपुत्री ताप्ती का प्रदेश गान में हर संभव स्थान दिलाने का दंभ भरने वाले प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह और उसकी पूरी केबिनेट ने ताप्ती नाम से ही किनारा कर लिया है तभी तो ताप्तीचंल में न तो मुख्यमंत्री की भैसदेही में की गई ताप्ती पर 250 बैराजो की मांग, ताप्ती विकास प्राधिकरण, ताप्ती घाटी परियोजना, ताप्ती पूर्णा समग्र अभियान, ताप्ती के किनारे धार्मिक पर्यटक स्थलो के निमार्ण , मध्यप्रदेश गान में मां सूर्यपुत्री ताप्ती को समुचित स्थान की जन व्यापी मांग से मुख्यमंत्री ने किनारा कर लिया है वहीं दुसरी ओर प्रदेश सरकार नर्मदा पर करोड़ो रूपैया लूटा रही है लेकिन ताप्ती के प्रति उसका तिरस्कार आज भी जारी है. मध्यप्रदेश गान में तापती के मान – सम्मान की लड़ाई लडऩे वाली मां सूर्यपुत्री ताप्ती जागृति समिति एवं मां ताप्ती जागृति मंच ने इस बात पर दुख व्यक्त किया कि प्रदेश सरकार का मुखिया ताप्तीचंल के लोगो की आस्था एवं विश्वास के साथ धोखा कर रहा है. मंच के संस्थापक रामकिशोर पंवार के अनुसार मुख्यमंत्री की मुलताई घोषणा को लेकर श्रेय कुमार बने भाजपाई जनप्रतिनिधियों को एक बार सोचना चाहिए कि वे प्रदेश के मुखिया की उक्त घोषणा को अभी तक केबिनेट की मंजूरी नहीं मिलने से तथा कुछ माह बाद चुनावी आचार संहिता लगने के बाद जिले की जनता को क्या जवाब देगें.

श्री पंवार ने इस बात पर दुख व्यक्त किया कि ताप्ती नाम की कांग्रेस और भाजपा दोनो की चिंता नहीं है दोनो ही ताप्ती नाम से परहेज कर रही है क्योकि अधिकांश कांग्रेस एवं भाजपा के जनप्रतिनिधि गंगा एवं नर्मदा के किनारे के रहने वाले है तथा बैतूल में अपना पेट पालने आए थे. आज भी ऐसे लोगो की कमी नहीं है बैतूल जिले में जो यहां का अन्न – पानी पीने के बाद गुणगान वहीं के गाते है क्योकि उन्हे भी भागीरथी गंगा जैसी ताप्ती नाम के प्रताप से डर लगता है. श्री पंवार ने आरोप लगाया कि उनके द्वारा पूरे दो साल से प्रदेश गान में ताप्ती के मान – सम्मान की लड़ाई लड़ी जा रही है लेकिन प्रदेश सरकार के मंत्री से लेकर संत्री तक को बैतूल जिले में ताप्ती जन्मोत्सव में भाग लेने का समय तक नहीं है. जिले के प्रभारी मंत्री बैतूल एवं मुलताई में रहने के बाद ताप्ती की पूजा – अर्चला करने तक को नहीं गए जबकि अन्ना हजारे ताप्ती महीमा को जानने के बाद अपने आप को ताप्ती के पूजन एवं दर्शन से रोक नहीं पाए. श्री पंवार ने कहा कि भाजपा जिलाध्यक्ष के माध्यम से सात दिवासीय कार्यक्रम के लिए जिले से प्रदेश सरकार के जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया था लेकिन जिले के भाजपा विधायक एवं सासंद ताप्ती जन्मोत्सव में भाग लेने नहीं पहुंचे. श्री पंवार ने कहा कि पूर्व सासंद हेमंत खण्डेलवाल को छोड़ कर पूरी भाजपा ने एक प्रकार से ताप्ती नाम से दूरियां बना रखी. ताप्ती महात्मय को जन – जन तक पहुंचाने में लगे श्री पंवार का कहना है कि ताप्ती उद्गम मुलताई में होने के बाद भी कई बार बैतूल जिले को शुद्ध ताप्ती का पानी आचमन के लिए भी नहीं मिल पाता है जिसके पीछे प्रमुख कारण यह है कि हमारे जिले में तापती जल के ठहराव के लिए कोई बैरज या बांध नहीं बन सके है.

आज भी जिले के लोग बहती ताप्ती का नहीं ठहरी ताप्ती के पोखरो एवं डोह का पानी पीते है. बैतूल जिले में पुण्य सलिला ताप्ती का कुल प्रवाह क्षेत्र 250 किलोमीटर है जो पूरी दुनिया में किसी भी जिले में किसी भी नदी के प्रवाह क्षेत्र से सबसे अधिक है. बैतूल जिले में ताप्ती पर ढाई सौ से अधिक बैरजो के निमार्ण की घोषणाओं को आज तक मूर्त रूप नहीं मिल सका है. ताप्ती नदी पर डैम बनाने लायक सबसे अनुकूल स्पॉट होने के बाद भी इस नदी की उपेक्षा समझ के परे की बात है. ताप्ती के जल उपयोग एवं एकाधिकार को लेकर सबसे पहला हक जिले का होने के बाद भी जिले को सिर्फ आश्वासन का पुलिंदा हाथ लगता है. ताप्ती जल के उपयोग को लेकर सबसे पुरानी आवाज बैतूल की ही है. इतना सब कुछ होने के बाद भी ताप्ती का फायदा अब सबसे कम प्रवाह वाले गुजरात, महाराष्ट्र के जिलो को मिलने के साथ ही बुरहानपुर को मिलता है. 250 किलो मीटर के प्रवाह क्षेत्र वाले ताप्तीचंल बैतूल जिले के खाते में आजादी के बाद से आज तक सिर्फ तमाम तरह की घोषणाएं सिर्फ छलावा बनकर रह गई है. यह सब इसलिए होता है क्योकि जिले के अधिकांश नेता या तो गंगावासी है या फिर नर्मदावासी जिसके चलते उनकी ताप्ती के प्रति श्रद्धा बन नहीं सकी है. ताप्ती नदी का पानी मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में विभाजित करने के लिए 1956 तिरूमलयंगार कमेटी ने एक रिपोर्ट प्रस्तुत की थी. इसके आधार पर 1971 में सेंट्रल ग्राउंड वॉटर बोर्ड द्वारा 6 साल तक ताप्ती का सर्वे किया गया था. इसके बाद 7 भागों में रिपोर्ट तैयार की गई. हाईड्रोलॉजीकल, जियोलॉजीकल जैसे सात विषयों पर हुए सर्वे में वैज्ञानिकों द्वारा अपनी रिपोर्ट में बताया गया कि ताप्ती भूभाग बजाड़ा जोन है, जिसमें ताप्ती में प्रवाहित होने वाली जल की भूमि में सामने की सर्वाधिक गति है, इसलिए यहां पर बांध और जल संरचनाएं बनाकर विश्व की सबसे अच्छी और उपयोगी रिचार्ज योजनाएं बनाई जा सकती हैं. वर्ष 1988-99 में तत्कालीन अभियंता सिविल सर्वेक्षण एवं अंवेषण होशंगाबाद संभाग ने पारसडोह पर डैम बनाने और बिजली उत्पादन को लेकर एक सर्वे रिपोर्ट शासन को भेजी.

इसी आधार पर मुख्य अभियंता सिविल सर्वेक्षण एवं अंवेषण म.प्र विद्युत मंडल जबलपुर को अधीक्षण अभियंता सिविल द्वारा 25 मई 2000 को अपना प्रतिवेदन भी भेजा गया. पानी वाले बाबा के रूप में ख्याति प्राप्त बैतूल के पूर्व कलैक्टर स्वर्गीय रजनीकांत गुप्ता ने वर्ष 2003-04 में ताप्ती पर एक सर्वे कराया था. जिसमें 34 स्थानों पर बैराज बनाए जाने के लिए उपयुक्त परिस्थितियां बताई गई थीं. 21 मई 2001 को तत्कालीन सांसद विजय खंडेलवाल ने ऊर्जा मंत्री सुरेश प्रभू को एक पत्र लिखकर ताप्ती नदी के पारसडोह में डैम बनाए जाने को लेकर प्रोजेक्ट रिपोर्ट भी भेजी थी. 4 दिसंबर 2004 को मुलताई विधायक डॉ सुनीलम ने विधानसभा में प्रश्न उठाया तो तात्कालीन जल संसाधन मंत्री अनूप मिश्रा ने बताया था कि ताप्ती पर 11 योजनाओं का सर्वे करा रहे हैं और उन्होंने बैतूल आने का आश्वासन दिया था. 3 जुलाई 2005 को बैतूल आए जलसंसाधन मंत्री अनूप मिश्रा ने ताप्ती नदी पर बांध बनाए जाने को लेकर सर्वे कराकर मास्टर प्लान बनाने के निर्देश दिए.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. mahendra gupta says:

    इस मुल्क की भी बड़ी अजीबोगरीब पूजा पद्तियाँ हैं, विवाद,और झमेले पैदा करने के लिए व उन्हें जाग्रत बनेर रखने के लिए कुछ फालतू लोग अपनी राजनीती चमकाने के लिए इन्हें हवा भी देते रहतें हैं.उसी प्रकार के विवादों की कड़ियों में एक यह मुद्दा भी जोड़ दिया गया है.हर दल के राजनीतिज्ञ भी अपने खोये राजनितिक मैदान को पाने के लिए इन पर यदा कदा आन्दोलन चला अवसर आने पर समाज के लोगों को बाँट देने का प्रयास करते हैं.ऐसा ही यह ताप्ति मुद्दा है.ताप्ति का नाम राष्ट्रगीत में जोड़ने का आन्दोलन चला दिया है, महज चुनाव में कुछ लाभ उठाने की खातिर.उन्हें यह पता नहीं की नाम जुड़ने की क्या प्रक्रिया है? कितनी कठिन है?और ऐसी मांगों का देश की राजनितिक,सामाजिक एकता के मूल ढांचे में क्या कितना फर्क पड़ेगा?यह ऐसे कितने नए ही आन्दोलन छेड़ने की शुरुआत हो जाएगी ठीक राज्यों के विभाजन की तरह.
    जरूरत ऐसे आन्दोलनों को समय पर ही कुचलने की जरूरत है,न की इनको बढ़ने देने की, और जब पानी गले तक आ जाये तब देखने की.

  2. इस मुल्क की भी बड़ी अजीबोगरीब पूजा पद्तियाँ हैं, विवाद,और झमेले पैदा करने के लिए व उन्हें जाग्रत बनेर रखने के लिए कुछ फालतू लोग अपनी राजनीती चमकाने के लिए इन्हें हवा भी देते रहतें हैं.उसी प्रकार के विवादों की कड़ियों में एक यह मुद्दा भी जोड़ दिया गया है.हर दल के राजनीतिज्ञ भी अपने खोये राजनितिक मैदान को पाने के लिए इन पर यदा कदा आन्दोलन चला अवसर आने पर समाज के लोगों को बाँट देने का प्रयास करते हैं.ऐसा ही यह ताप्ति मुद्दा है.ताप्ति का नाम राष्ट्रगीत में जोड़ने का आन्दोलन चला दिया है, महज चुनाव में कुछ लाभ उठाने की खातिर.उन्हें यह पता नहीं की नाम जुड़ने की क्या प्रक्रिया है? कितनी कठिन है?और ऐसी मांगों का देश की राजनितिक,सामाजिक एकता के मूल ढांचे में क्या कितना फर्क पड़ेगा?यह ऐसे कितने नए ही आन्दोलन छेड़ने की शुरुआत हो जाएगी ठीक राज्यों के विभाजन की तरह.
    जरूरत ऐसे आन्दोलनों को समय पर ही कुचलने की जरूरत है,न की इनको बढ़ने देने की, और जब पानी गले तक आ जाये तब देखने की.

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