/धर्मशाला और तिब्बती बस्तियां दहशतगर्दों के निशाने पर…

धर्मशाला और तिब्बती बस्तियां दहशतगर्दों के निशाने पर…

इंडियन मुजाहिदीन संस्थापक यासीन भटकल के राज़ फ़ाश से चिंतित, हिमाचल पुलिस ने तिब्बती बस्तियों की बढाई सुरक्षा..यासीन भटकल ने गया के सीरियल ब्लास्ट के बाद धर्मशाला में ब्लास्ट करने की  योजना बनाई थी…

-अरविन्द शर्मा||

इंडियन मुजाहिदीन संस्थापक यासीन भटकल के खुलासे से चिंतित, की तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा का धर्मशाला का  निर्वासन घर, भटकल के राडार पर था, हिमाचल पुलिस ने तिब्बती आध्यात्मिक नेता दलाई लामा और तिब्बती बौद्ध बस्तियों को संदिग्ध खतरे के बारे में पूछताछ के अभिलेखों का ब्योरा राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी (एनआईए) को लिख भेजा  है.yasin bhatkal

इंडियन मुजाहिदीन समूह के संचालन मुखिया यासीन भटकल ने  इस साल जुलाई में गया में बौद्ध तीर्थ स्थली  को बम धमाकों से हिलाकर रख दिया था. खुफिया ,  को भटकल से जानकारी मिली है कि गया के  सीरियल ब्लास्ट के बाद उसके संगठन ने धर्मशाला में ब्लास्ट करने की योजना बनाई गयी थी. प्राप्त जानकारी के मुताबिक़ यह योजना  म्यांमार में रोहिंग्या मुसलमानों पर अत्याचार करने के लिए बौद्धों के खिलाफ बदला लेने के लिए इंडियन मुजाहिदीन के संभावित लक्ष्य के रूप में था. राष्ट्रीय खुफिया एजेंसी से मिली जानकारी के अनुसार यासीन भटकल  ने  धर्मशाला धमाकों के लिए अपने करीबी सहयोगियों में से दो को यहाँ भेजा भी था.

हिमाचल पुलिस में  खुफिया और सुरक्षा के उप महानिदेशक, अभिषेक त्रिवेदी ने इस बारे में बताया “धर्मशाला का दौरा करने की भटकल की योजना के बारे में विविध और अपुष्ट खबरें हैं. हमने  एनआई को भटकल की योजनाओं के बारे में और अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए लिखा है”  उन्होंने आगे बताया कि इस खबर की सच्चाई की खोज की जा रही है.

राष्ट्रीय जांच एजेंसियों के अनुसार बोधगया में विस्फोटों के बाद जुलाई में, इस्लामी आतंकवादी गुट इंडियन मुजाहिदीन द्वारा राज्य भर में मठों पर संभावित हमलों के बारे में हिमाचल प्रदेश पुलिस और हिमाचली बौद्ध आबादी को पहले ही सतर्क कर दिया गया था. उस समय कर्नाटक में सुरक्षा एजेंसियों द्वारा हुबली में गिरफ्तार किये गए भारतीय मुजाहिदीन के आतंकी अबेदु रहमान द्वारा किए गए खुलासे में धर्मशाला के प्लान का भी पता चला था.

तदोपरांत एनआईए ने धर्मशाला  में इंडियन मुजाहिदीन संभावित  आतंकी हमलों के खिलाफ हिमाचल में बौद्ध आबादी, विशेषकर मकलोडगंज में दलाई लामा के निवास स्थान तथा कारमापा लामा की रक्षा करने के लिए उचित कदम उठाने के लिए हिमाचल पुलिस को  सलाह दी थी. इस चेतावनी के मद्देनजर राज्य पुलिस के अपराध जांच विभाग के सभी जिला पुलिस प्रमुखों को एक अलर्ट भेजा रखा है की  बौद्ध आबादी वाले क्षेत्रों में चौकसी तुरत बड़ा दी जाये. प्राप्त आंकड़ो के अनुसार राज्य भर में 12 विभिन्न बस्तियों में लगभग 30,000 तिब्बती रहतें हैं. तिब्बतियों की मुख्य बस्ती धर्मशाला में है जहा दलाई लामा के घर के बाहर स्थित मुख्य मठ शुग्लाखंग  मंदिर,  अत्यधिक संवेदनशील मन गया है तथा वहां केन्द्रीय पुलिस सुरक्षा घेरा, राज्य पुलिस सुरक्षा घेरा तथा तिबेटी सुरक्षा एजेंसी का घेरा मज़बूत कर दिया गया  है. मक्लोद गंज से 7 किमी ढलान की और  धर्मशाला में भी स्थित गयोतो तांत्रिक मठ,  शक्तिशाली काग्यु कर्मा पंथ के मुखिया 17 वें करमापा ओगायन त्रिन्ले दोरजी,  का आवास स्थित है, यहाँ पर भी सुरक्षा,  का घेरा मज़बूत कर दिया गया है. इसके अतिरिक्त यहाँ से किलोमीटर दूर भट्टू में शेराब्लिंग मोनेस्ट्री भी है जहा एक अन्य तिब्बती धार्मिक गुरु ताई सिपुता रिनपोछे रहते है इस  मठ में भी सुरक्षा बढ़ा दी गयी है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.