/राम जेठमलानी के घटिया आरोपों से आहत हो, मर जाना चाहती है आसाराम द्वारा सताई गई किशोरी…

राम जेठमलानी के घटिया आरोपों से आहत हो, मर जाना चाहती है आसाराम द्वारा सताई गई किशोरी…

आसाराम की जमानत याचिका पर बहस करते हुए मशहूर वकील राम जेठमलानी और उनके कनिष्ठ यौन हमले से पीड़ित किशोरी का चरित्र हनन करने के लिए इस कदर घटिया आरोप लगाने लगे जिन्हें सुन कर पीड़ित लडकी के मुंह से बेसाख्ता निकाल पड़ा कि ‘पापा, अब मैं जीना नहीं चाहती.., आसाराम के बाद अब वकील मुझे विक्षिप्त और दुष्चरित्र बताने की कोशिश कर रहे हैं, आखिर मेरा कसूर क्या है. बस पापा बस..अब नहीं सहा जाता.’ वह इस कदर आहत हो गई कि उसकी रुलाई फूट पड़ी. खुद को कमरे में बंद कर लिया और त्याग दिया खाना-पीना भी. शाम को वकील जब आसाराम की जमानत एक अक्टूबर तक टल जाने की खबर आई तो भी बिटिया कुछ नहीं बोली. बैठी रही गुमसुम.Ram Jethmalani

ठीक 17 दिन पूर्व आसाराम की गिरफ्तारी पर जिस बहादुर लडकी के चेहरे पर मुस्कराहट दौड़ी थी, आसाराम के वकील ने अपने एक बयान से उसे काफूर कर दिया. पीड़िता के पिता ने बताया कि मंगलवार शाम को टीवी पर समाचार देखने के बाद से उनकी बेटी को सदमा पहुंचा है. जिस तरह वरिष्ठ व उम्रदराज वकील ने उनकी बच्ची के चरित्र पर अंगुली उठाते हुए मानसिक रूप से बीमार बताया, वह शर्मनाक है. पीड़िता के पिता ने कहा कि आसाराम को तो सजा न्यायालय से मिलेगी लेकिन बिटिया पर लांछन लगाने वाले वकील को ईश्वर की अदालत में दंड जरूर मिलेगा.

पीड़िता की मां ने कहा कि आसाराम की पैरवी करने वाले वकील साहब जो भी करें, उनकी बेटी पर कीचड़ न उछालें. हमारी बेटी बहादुर है, जिसने आसाराम के घिनौने कृत्यों को उजागर किया. अब आसाराम को बचाने के लिए वकील जिस तरह उनकी बेटी का चरित्र हनन कर रहे हैं, उस पर रोक लगनी चाहिए. अन्यथा दुष्कर्म की शिकार बेटियां न्याय की लड़ाई की हिम्मत नहीं जुटा पाएंगी…

 

 

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.