/बलात्कार के आरोपी कांग्रेसी मंत्री बाबूलाल नागर ने इस्तीफ़ा दिया..

बलात्कार के आरोपी कांग्रेसी मंत्री बाबूलाल नागर ने इस्तीफ़ा दिया..

राजस्थान में नौकरी दिलवाने के बहाने अस्मत लूट लेने के आरोप का सामना कर रहे डेयरी एवं ग्रामोद्योग राज्य मंत्री बाबूलाल नागर ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. इससे पहले पुलिस की सीआईडी (सीबी) यूनिट ने उनसे पूछताछ की थी. पुलिस ने सिविल लाइंस स्थित उनके सरकारी आवास का वह कमरा सील कर दिया, जिसमें पीड़िता ने अपने साथ रेप होने की बात कही थी. हालांकि, बाबूलाल खुद को निर्दोष बता रहे हैं. उनका कहना है कि उन्हें साजिश के तहत फंसाया जा रहा है.babulal nagar

सीआईडी (सीबी) पुलिस सूत्रों के मुताबिक, राज्य मंत्री बाबूलाल नागर से उनके सरकारी आवास पर पूछताछ की गई. बुधवार रात पीड़िता को साथ लेकर पहुंचे पुलिस दल ने विक्टिम द्वारा रेप के स्थान की जानकारी देने पर मंत्री के सरकारी आवास का कमरा सील कर दिया. उन्होंने कहा कि मंत्री नागर से पूछताछ की गई है. गुरुवार को फिर पूछताछ की जा सकती है.

हालांकि, रात में पीड़िता को आरोपी बाबूलाल नागर के बंगले पर लेकर जाने को लेकर पुलिस पर उंगली उठ रही है. कानून के मुताबिक रात होने के बाद महिला को पूछताछ या फिर जांच के लिए घर से बाहर लेकर नहीं ले जाया जा सकता. बताया जा रहा है कि जब पीड़िता को लेकर पुलिस बंगले पर पहुंची, तो वहां आरोपी मंत्री भी मौजूद थे. ऐसे में आरोपी मंत्री की मौजूदगी में महिला से वारदात की जगह की पहचान कराना पुलिस की नीयत पर सवाल उठाता है.

गौरतलब है कि जयपुर के अजमेर रोड निवासी एक शादीशुदा महिला ने आरोप लगाया था कि बाबूलाल नागर ने 11 सितंबर को नौकरी का झांसा देकर पहले उनके साथ बलात्कार किया और बाद में धमकी दी कि किसी को बताया तो भंवरी देवी जैसा हाल हो जाएगा. पीड़ित महिला पहले ही कह चुकी है कि उसे आरोपी मंत्री और उनके परिवार की तरफ से धमकाया जा रहा है.

Facebook Comments

संबंधित खबरें:

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.