/अखिलेश सरकार पर लगे दंगों के दाग पोंछने में जुटी सपा…

अखिलेश सरकार पर लगे दंगों के दाग पोंछने में जुटी सपा…

-राज कमल||

मुजफ्फरनगर दंगों को लेकर घिरी सपा अब उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार पर लगे दागों को पोंछने में जुट गई है.

सियासत के खेल में पार्टी ने अब खुद पर उठे सवालों का जवाब देने के बजाय दूसरों पर अंगुलियां उठाना शुरू कर दिया है. सपा सरकार पर सवाल उठाने वाले विरोधी दलों के साथ ही पार्टी ने अफसरों पर भी जमकर निशाना साधा है.muzaffarnagar-violence

एक टीवी चैनल के स्टिंग ऑपरेशन में दंगों के दौरान सरकार की भूमिका पर सवाल उठाने वाले अफसरों को लेकर सपा महासचिव रामगोपाल यादव ने कहा है कि अपना कर्त्तव्य नहीं निभाने वाले अफसर कार्रवाई से बचने के लिए सरकार पर आरोप मढ़ रहे हैं.

उन्होंने कहा कि आजम खां का नाम आने के साथ ही स्टिंग की विश्वसनीयता बची नहीं है. यह फर्जी स्टिंग है. उन्होंने कहा कि चाहे भाजपा, कांग्रेस, बसपा या फिर सपा का कोई भी नेता हो. जिनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है, उन्हें गिरफ्तार किया जाएगा.

दंगों को लेकर चौतरफा विरोध का सामना कर रही सपा के सामने अब अपनी सरकार का बचाव करने के अलावा और कोई उपाय नहीं है. दंगों पर एक के बाद एक नए घटनाक्रम के बाद प्रदेश सरकार और पार्टी दबाव में है. लिहाजा, दूसरी पार्टियों पर पलटवार तेज करने की रणनीति बनाई गई है.

रामगोपाल ने विरोधी दलों के खिलाफ मोर्चा खोला है. उन्होंने कहा कि दिल्ली में 84 के दंगों में हजारों लोग मारे गए थे, तब कांग्रेस ने राष्ट्रपति शासन की मांग क्यों नहीं की थी. गुजरात दंगों के वक्त भाजपा ने मोदी सरकार की बर्खास्तगी की मांग क्यों नहीं की थी. उन्होंने कहा कि दंगों को लेकर आजम खां पर लगाए गए आरोप झूठे हैं.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.