नौकरी के बदले अस्मत लूट लेने के मामले में राजस्थान सरकार के डेयरी मंत्री बाबूलाल नागर ने हालाँकि यह कहते हुए इस्तीफ़ा दे दिया है कि उनके मंत्री रहते हो रही तफ्तीश को प्रभावित करने का आरोप न लग जाये इसलिए इस्तीफ़ा दे रहे हैं.
मगर पर्दे के पीछे की सच्चाई यह है कि जिस एडीशनल एसपी वी.के. गौड़ को इस प्रकरण की जाँच सौंपी गई है, वह खुद बाबूलाल नागर के चहेते अफसर रहे हैं और एडीशनल एसपी वी.के. गौड़ की सिफारिशें भी करते रहे हैं. ऐसी स्थिति में यह सवाल उठाना लाजिमी है कि जिस पुलिस अफसर पर बाबूलाल नागर मेहरबान रहे हों, वह पुलिस अधिकारी अपने आका को बचाएगा या जेल जाने देगा?
गौरतलब है कि बाबूलाल नागर पर लगे दुष्कर्म के आरोप की जांच सीआईडी सीबी के एडीशनल एसपी वी.के. गौड़ कर रहे हैं. गौड़ वही अफसर हैं, जिन्हें नागर ने अपनी डिजायर पर दूदू में एडीशनल एसपी लगवाया था. गौड़ मई 2001 से सितंबर 2003 तक दूदू में रहे. उस समय भी अशोक गहलोत की सरकार थी और बाबूलाल नागर दूदू से कांग्रेस विधायक थे.
