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पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह द्वारा गठित सीक्रेट इंटेलिजेंस यूनिट संदेह के घेरे में…

By   /  September 20, 2013  /  6 Comments

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भारतीय सेना ने रक्षा मंत्रालय से पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह द्वारा बनाई गई “सीक्रेट इंटेलिजेंस यूनिट” की गतिविधियों की उच्चस्तरीय जांच के आदेश देने का आग्रह किया है. सेना को संदेह है कि इस यूनिट ने अनधिकृत गतिविधियाँ और आर्थिक गड़बड़ियां की हैं. इन खबरों के सामने आने पर पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह ने कहा कि यह आपसी झगड़े का नतीजा है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग मेरे द्वारा देश के पूर्व सैनिकों के हितों के लिए नरेंद्र मोदी के साथ मंच साझा करने से सहज महसूस नहीं कर रहे हैं. उन्होंने कहा कि अगर किसी ने इस यूनिट के खिलाफ जांच की सिफारिश की है तो वह व्यक्ति बेमतलब की बात कर रहा है. पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह कहते हैं कि यह अभियान गुप्त रखने के लिए था.vk singh

सूत्रों के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय के सीनियर ऑफिसरों की अवैध तरीके से फोन टैपिंग करने के आरोपी “टेक्निकल सपोर्ट डिपार्टमेंट” के बारे में सेना की रिपोर्ट हाल में रक्षा मंत्रालय को सौंपी गई है. इस रिपोर्ट में सीक्रेट इंटेलिजेंस यूनिट की गतिविधियों पर शक जाहिर किया गुया है. हालांकि इस मसले पर सेना मुख्यालय ने कहा कि उनकी ओर से यह मामला बंद है. वह इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता.

खबर है कि सेना की रिपोर्ट में कहा गया है कि वीके सिंह द्वारा गठित इस सीक्रेट इंटेलिजेंस यूनिट के ज़रिये करोड़ों रुपये खर्च कर अवांछित गतिविधियों को अंजाम दिया गया था.

सूत्रों की मानें तो सेना अपनी ओर से इस यूनिट के खिलाफ जांच नहीं करना चाहती क्योंकि वह अपने पूर्व जनरल के खिलाफ कार्रवाई करते हुए दिखाई नहीं देना चाहती. गौरतलब है कि यह रिपोर्ट जनरल बिक्रम सिंह द्वारा गठित बोर्ड ऑफ ऑफिसर्स (बीओओ) की ओर से सैन्य अभियान के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल विनोद भाटिया ने तैयार की. सूत्रों का कहना है कि भाटिया द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में कहा गया है कि यह यूनिट “अनधिकृत गतिविधियों” में शामिल रही है.

वहीं अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस में छपी खबर के अनुसार, सेना को संदेह है कि इस इकाई ने जम्मू-कश्मीर सरकार का तख्ता पलटने और बिक्रम सिंह को रोकने की कोशिश की थी.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

6 Comments

  1. …संगत का असर .देखते जाइये बड़े बल्लम भी जल्द नप जायेंगे

  2. Congress ki chaal.Govt knows where the fund is spent they are not blind if at all Mr VK has misappropriated the fund then what was our FM and Defence ministry doing so congress will play all the dirty game to keep their boat floating.

  3. Kiran Yadav says:

    vikram singh kaun hai ye poora desh janta hai aur v.k. singh sigh ke khilaaf jaanch kyon karane ki koshish ho rahi hai yah bhi sab jante hai

  4. Naveen Pratap Singh says:

    Anna ke saath rahte to wo bacha kar rakhte kyun Kiran S. Patnaik bhai?

  5. Mukesh Singh says:

    Yah to hona hi tha………….

  6. Kiran S. Patnaik says:

    बुरे फँसे वीके!!

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