/डॉक्टर ने नाबालिग से किया दुष्कर्म, फिर ट्रेन के आगे कूदा…

डॉक्टर ने नाबालिग से किया दुष्कर्म, फिर ट्रेन के आगे कूदा…

मेरठ में एक डॉक्टर ने बृहस्पतिवार को अपने पड़ोसी के घर में घुसकर उसकी नाबालिग बेटी से रेप किया. फिर मामला पुलिस तक जाने के डर से उसने ट्रेन के आगे कूदकर जान दे दी. इस पर डॉक्टर के परिजनों ने पीड़िता के घरवालों के खिलाफ हत्या का आरोप लगाकर थाने में तहरीर दी.rape1

टीपीनगर नई बस्ती के चौहान पुरी में डॉक्टर चंद्रपाल सिंह अपने मकान में ही क्लीनिक चलाता है. आरोप है कि डॉक्टर ने बृहस्पतिवार दस बजे पड़ोसी की नाबालिग बेटी से घर में घुसकर दुष्कर्म किया. बच्ची का पिता अहमदाबाद और मां मलियाना पुल के पास एक डॉक्टर के यहां क्लीनिक पर गई थी. दोपहर 12 बजे बच्ची ने अपनी मां को डॉक्टर की हैवानियत के बारे में बताया. मां-बेटी ने मोहल्ले में शोर मचाया तो लोगों की भीड़ लग गई. बच्ची ने डॉक्टर के घर जाकर उसकी पत्नी पिंकी से भी शिकायत की. डॉक्टर की हैवानियत का पता लगने पर स्थानीय लोगों की पंचायत बैठी, जिसमें डॉक्टर को पुलिस के हवाले करने का निर्णय हुआ.

करीब डेढ़ बजे मां-बेटी ने टीपीनगर थाने में डॉक्टर के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी. समाज में बदनामी और थाने में दुष्कर्म की रिपोर्ट दर्ज होने का पता लगने पर डॉक्टर चंद्रपाल ने शिवपुरम रेलवे फाटक के पास ट्रेन के सामने कूदकर जान दे दी. शाम पांच बजे डॉक्टर की मौत की जानकारी होने पर उसके घर में कोहराम मच गया. परिजनों ने बच्ची के परिजनों पर हत्या करने का आरोप लगाकर थाने में तहरीर दी.

बच्ची के परिजन घर पर ताला लगाकर अपने रिश्तेदार के यहां चले गए. इंस्पेक्टर टीपीनगर मेहर सिंह ने बताया कि डॉक्टर के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज है. बच्ची का मेडिकल परीक्षण भी कराकर उसके परिजनों को सुपुर्द कर दिया गया है. डॉक्टर के परिजनों की शिकायत पर पुलिस जांच कर रही है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.