/बाबा रामदेव हीथ्रो हवाई अड्डे पर पूछताछ के लिए छह घंटे हिरासत में रहे…

बाबा रामदेव हीथ्रो हवाई अड्डे पर पूछताछ के लिए छह घंटे हिरासत में रहे…

विदेशों में भगवा कितना बदनाम हो चुका है, इसकी बानगी मिली लन्दन के हीथ्रो एअरपोर्ट पर, जहाँ योग गुरु बाबा रामदेव को को घंटों हिरासत में रख पूछताछ की गई. प्राप्त जानकारी के मुताबिक शुक्रवार को लंदन के स्‍थानीय समयानुसार दोपहर करीब एक बजे रामदेव हीथ्रो एयरपोर्ट पर पहुंचे तो उन्‍हें हिरासत में लेकर उनके सामान की जांच शुरू कर दी. बताया जा रहा है कि आव्रजन विभाग के अधिकारियों ने योग गुरु से करीब चार घंटे तक पूछताछ के बाद क्‍लीन चिट दे दी लेकिन इसके बाद ब्रिटिश कस्‍टम विभाग के अधिकारियों ने हिरासत में ले लिया और पूछताछ शुरू कर दी.baba-ramdev

बताया जा रहा है कि ब्रिटिश अधिकारियों को आध्‍यात्मिक गुरु के पास संस्‍कृत भाषा की पुस्‍तकों के संग्रह को लेकर ‘संदेह’ पैदा हुआ. अधिकारियों ने इस पुस्‍तकों में लिखी बातों की जानकारी के लिए अनुवादक बुलाए, इस वजह से रामदेव को घंटों हिरासत में रखना पड़ा. ब्रिटिश अधिकारियों  ने उन आयुर्वेदिक दवाओं के बारे में भी पूछताछ की जिन्‍हें रामदेव अपने साथ लेकर गए हैं. मिली जानकारी के मुताबिक रामदेव लंदन और लिसेस्‍टर में कई क्रार्यक्रमों में हिस्‍सा लेने के लिए लंदन गए हैं. रामदेव को स्‍वामी विवेकानंद की 150वीं जयंती पर आयोजित एक कार्यक्रम में बतौर मुख्‍य वक्‍ता हिस्‍सा भी लेना है. इस कार्यक्रम का आयोजन रामदेव के पतंजलि योगपीठ की तरफ से आयोजित किया गया है. रामदेव को ब्रिटेन के बाद अमेरिका भी जाना है.

बाबा रामदेव के प्रवक्‍ता एस के तिजारावाला ने एक समाचार एजेंसी से बातचीत में इन खबरों को ‘बेबुनियाद’ बताया कि योग गुरु से उनकी दवाइयों को लेकर पूछताछ की गई है. उन्‍होंने कहा, ‘यह साफ नहीं हो सका है कि बाबा रामदेव को हीथ्रो एयरपोर्ट पर छह घंटों तक किस वजह से रोक कर रखा गया. उनके पास एक छोटी थैली के अलावा कुछ नहीं था, जिसमें उनका कुछ जरूरी सामान था. ब्रिटिश अधिकारी ही बताएंगे कि उन्‍होंने रामदेव को क्‍यों रोककर रखा.’ प्रवक्‍ता ने बताया कि स्‍थानीय अधिकारियों ने रामदेव को शहर में जाने के लिए क्‍लीन चिट दे दी है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.