/निधि को जिंदा मत लाना, उसको मारकर फूंक दो…

निधि को जिंदा मत लाना, उसको मारकर फूंक दो…

प्रेमी धर्मेद्र से शादी करने की प्रेमिका निधि की जिद रोहतक में बुधवार को हुई दोनों की नृशंस हत्या का कारण बनी. निधि के परिजन जब निधि व धर्मेद्र को पकड़ कर ले आ रहे थे तब निधि के पिता नरेंद्र उर्फ बिल्लू ने धर्मेद्र को गाड़ी में थप्पड़ मारा था. यह देखकर निधि के मुंह से निकल गया था कि डैडी प्लीज, इसे मत मारो, मैं इससे शादी करना चाहती हूं. नरेंद्र व लड़की के चाचा रवींद्र ने पुलिस रिमांड के दौरान यह बयान दिया है.honor killer mother father

पुलिस के अनुसार प्रेमी जोड़े को परिजनों ने उसके दोस्त की मदद से फोन पर बहादुरगढ़ बुलाया. बहादुरगढ़ से धर्मेद्र और निधि को मोटरसाइकिल से सांपला स्थित एक ढाबे तक लाया गया. वहां से उन दोनों को सूमो गाड़ी में बैठाया गया. गाड़ी में बैठाते ही नरेंद्र उर्फ बिल्लू ने धर्मेद्र को पीटना शुरू कर दिया. गुस्साए पिता ने तभी दोनों को खत्म करने का इरादा कर लिया था. इस जघन्य हत्याकांड को लेकर पुलिस पूछताछ के दौरान भी आरोपियों को कोई पछतावा नहीं है.

इस बीच पुलिस ने युवती के भाई सन्नी और गाड़ी के ड्राइवर महेश को भी गिरफ्तार कर लिया है और पांच दिन के रिमांड पर ले लिया.

धर्मेद्र और निधि की बेरहमी से हत्या करने के बाद नरेंद्र ने गांव के बीच खड़ा होकर कहा कि जिस तरह की गलती उसकी बेटी ने की है, गांव में भविष्य में कोई अन्य लड़की ऐसा करने की हिम्मत न करें. नरेंद्र के सिर पर वारदात के बाद जैसे भूत सवार हो गया था. गांव के कुछ लोगों ने दबी जुबान में पुलिस को यह बात बताई है. दोनों को लेने जाते समय निधि की मां रीटा ने कहा कि जाओ निधि को जिंदा मत लाना. उसको मारकर फूंक दो.

पुलिस अधीक्षक के अनुसार जांच पड़ताल में पुलिस को पता चला कि युवती की मां रीटा देवी ने परिवार के सदस्यों को कहा था कि निधि ने पूरे परिवार की इज्जत खराब की है और उसे जीने का कोई हक नहीं है. इसके बाद सभी हत्या के लिए तैयार हो गए.

मानवाधिकार आयोग ने एसपी से किया जवाब-तलब

हरियाणा राज्य मानवाधिकार आयोग ने ऑनर किलिंग के मामले में रोहतक के पुलिस अधीक्षक से जवाब तलब किया है. उन्हें सात अक्टूबर तक जवाब देने के लिए कहा है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.