Loading...
You are here:  Home  >  राजनीति  >  Current Article

मुज़फ्फरनगर दंगा : अजब सोम की गजब कहानी…

By   /  September 21, 2013  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

-आर के पाण्डेय ‘राज’||

उत्तर प्रदेश में बीजेपी के सबसे कम उम्र के विधायक संगीत सिंह सोम मुजफ्फरनगर में हुई सांप्रदायिक हिंसा मामले में आरोपी हैं.  आज अपने हजारों समर्थकों के विरोध के बावजूद सोम ने गिरफ्तारी दी. उनके खिलाफ मुज़फ्फरनगर दंगा मामले में दो एफआईआर दर्ज की गई है.som-1

कुछ दिनों पहले सोम के बारे में यह बात मीडिया की सुर्खी बनी की वो गिरफ़्तारी के भय से भाग गए हैं. लेकिन अचानक ही वे एक टीवी न्यूज चैनल पर प्रकट हुए और खुद को सही ठहरा रहे थे. उन्होंने कहा था कि वे इलाज कराने के लिए मेरठ से बाहर गए थे, कहीं भागे नहीं थे.

34 साल के सोम मुजफ्फनगर और मेरठ में अपनी अलग पहचान बना चुके हैं और इस क्षेत्र में एक लोकप्रिय युवा नेता के रूप में जाने जाते हैं. ये अपने अलग ठाठ-बाट के लिए भी प्रसिद्द हैं और क्षेत्र में अपनी हनक कायम करने के लिए ये गार्डों के शौक़ीन भी हैं. बीजेपी में जो लोग संगीत सिंह सोम को जानते हैं वे बताते हैं कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर और मेरठ में युवा नेता के तौर पर अपनी पहचान बना चुके संगीत सिंह सोम को अपने साथ गार्ड रखने का शौक है. सोम अपने साथ गार्ड लेकर चलना पसंद करते हैं. जब वे विधायक नहीं बने थे, तब वे प्राइवेट गार्ड लेकर चलते थे और उनके गार्ड वॉकी टॉकी से लैस रहते थे. इन्होने 2009 के बाद तक प्राइवेट गार्ड को अपनी सुरक्षा में तैनात रखा.

मायावती सरकार के कार्यकाल में संगीत सोम को चार अतिरिक्त गार्ड मुहैया कराए गए. लेकिन बाद में सपा की सरकार ने लोकल इंटेलीजेंस यूनिट की रिपोर्ट के आधार पर सोम से गार्ड वापस ले लिए. रिपोर्ट में कहा गया था कि सोम को कोई खतरा नहीं है. कुछ दिनों बाद सोम ने एक एफआईआर दर्ज कराई थी. उस एफआईआर में कहा गया था कि कुछ अज्ञात लोगों ने उनके घर पर फायरिंग की है. तब तक वे बीजेपी में शामिल होकर विधायक बन चुके थे. बीजेपी ने सुरक्षा गार्ड वापस लिए जाने को मुद्दा बनाया. इसके बाद एसपी सरकार ने उन्हें बतौर विधायक मिलने वाले दो सुरक्षा गार्ड के साथ-साथ तीन और गार्ड दिए. लेकिन सोम को इन अतिरिक्त गार्ड के वेतन का 10 फीसदी खुद अपनी जेब से देना था.

जब सपा सरकार ने सोम को पांच गार्ड मुहैया कराए तो चार अतिरिक्त गार्ड के लिए सोम को उनके वेतन का 10 फीसदी हिस्सा अपनी जेब से देना था. लेकिन सोम ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया और यह कहते हुए वाई कैटगरी की सुरक्षा की मांग कर डाली कि उन्होंने ऐसे उम्मीदवार को हराया है जो गोकशी में शामिल रहा है और इलाके में रवायतों के उलट जाकर महापंचायतें कराई हैं. इसके अलावा सोम ने कहा कि उन्हें धमकी भरी कॉल भी मिलती है. पिछले साल अप्रैल में कोर्ट ने सोम के पक्ष में फैसला सुनाते हुए उन्हें वाई श्रेणी की सुरक्षा दिए जाने का निर्देश दिया था. अब उन्हें हर शिफ्ट में पांच सुरक्षा कर्मी मिलते हैं. लेकिन अब सोम को इसके लिए दाम नहीं चुकाना पड़ता है.

विधायक संगीत सिंह सोम राजनीतिक पार्टियां बदलने में माहिर हैं. संगीत बीएसपी से अपने राजनितिक कैरियर शुरू कर भाजपा, सपा और फिर भाजपा में आ गए हैं. बीजेपी में उन्हें जानने वाले नेता बताते हैं कि सोम की राजनैतिक प्रतिबद्धता पर पार्टी बदलने के चलते सवाल उठाए जा सकते हैं, लेकिन अब वे बीजेपी की विचारधारा में रम चुके हैं.

मेरठ और मुजफ्फरनगर में राजपूत महापंचायतें आयोजित करने की वजह से सोम बसपा नेताओं की नजर में आए थे. 2007 में बीएसपी ने सरधना से उन्हें टिकट देने का फैसला किया था. लेकिन जब सोम को पता चला कि उनका टिकट कट गया है तो उन्होंने पार्टी छोड़ दी.

उसके बाद सोम बीजेपी में शामिल हो गए. लेकिन 2009 में जब बीजेपी ने सोम को लोकसभा का टिकट नहीं दिया तो वे बीजेपी को छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो गए. समाजवादी पार्टी ने उन्हें मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से टिकट दिया लेकिन सोम चुनाव हार गए. 2011 में सोम फिर से बीजेपी में शामिल हो गए. उनके बारे में बताया जाता है कि वे कलराज मिश्र के नजदीकी हैं. पार्टी ने उन्हें सरधना से टिकट दिया और वे चुनाव जीत गए.

सोम की अजीबो-गरीब जीवनशैली और शौक के अलावा उनकी शैक्षणिक योग्यता भी सवालों के घेरे में है. 2009 के चुनाव में उन्होंने खुद को ग्रैजुएट घोषित किया था लेकिन 2012 में सोम ने बताया था कि वे 12 वीं पास हैं. सोम किस तरह का व्यवसाय करते हैं, यह भी साफ नहीं है. बीजेपी की मेरठ ईकाई के अध्यक्ष अशोक त्यागी का कहना है कि उनका परिवार गन्ने की खेती करता रहा है. त्यागी का कहना है कि हो सकता है कि सोम कहीं और भी कारोबार करते हों. संगीत सिंह सोम की व्यावसायिक संदिग्धता का आज तक रहस्योद्द्घाटन नहीं हो सका कि उनके पास अकूत धन आने का जरिया क्या है.

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

Manisa escort Tekirdağ escort Isparta escort Afyon escort Çanakkale escort Trabzon escort Van escort Yalova escort Kastamonu escort Kırklareli escort Burdur escort Aksaray escort Kars escort Manavgat escort Adıyaman escort Şanlıurfa escort Adana escort Adapazarı escort Afşin escort Adana mutlu son

You might also like...

हारी हुई कांग्रेस को लेना चाहिए नेहरू की बातों से सबक..

Read More →
Eyyübiye escort Fatsa escort Kargı escort Karayazı escort Ereğli escort Şarkışla escort Gölyaka escort Pazar escort Kadirli escort Gediz escort Mazıdağı escort Erçiş escort Çınarcık escort Bornova escort Belek escort Ceyhan escort Kutahya mutlu son
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
WhatsApp chat
%d bloggers like this: