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आसाराम ने कोडवर्ड फिक्स कर रखे थे कुकर्मों के लिए…

By   /  September 21, 2013  /  1 Comment

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नाबालिग से दुष्कर्म मामले में फंसे आसाराम के खिलाफ आए दिन नए राज फाश हो रहे हैं. कंही आसाराम के वैद्य रह चुके अमृत प्रजापति और आसाराम के पुत्र नारायण साईं के पूर्व निजी सचिव महेंद्र चावला और पुलिस जाँच के ज़रिये आसाराम द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ कोडवर्ड्स भी सामने आए हैं.asaram-rape-minor

पुलिस जांच में सामने आया है कि आसाराम कुछ ऐसे खास शब्दों का इस्तेमाल करते थे जिन्हें उनके आश्रम के लोग ही समझ पाते थे. बाहरी लोगों के लिए इन्हें समझना मुश्किल था. डायल 400, समर्पण, टॉर्च की लाइट, जोगन इत्यादि कुछ ऐसी ही कोडवर्ड हैं.

डायल 400

पुलिस जांच में सामने आए कोडवर्ड में एक है ‘400 लगाओ’. इसका मतलब है आसाराम के मोबाइल पर फोन करना. आसाराम के बारे में कहा जाता है कि वे मोबाइल नहीं रखते लेकिन यह कोडवर्ड उनके मोबाइल नंबर का ही हिस्सा है.

आसाराम के मोबाइल नंबर के आखिरी तीन अंक ‘400’ है. यह मोबाइल आसाराम का रसोइया रखता है, लेकिन वह केवल फोन उठाता था बात करने की अनुमति नहीं थी.

जांच में पता चला है कि 6 अगस्त को आरोपी शिल्पी ने पीड़िता को समझाया था कि उस पर भूत-प्रेत का साया है और आसाराम उसे ठीक कर सकते है.

उसी दिन से 400 की घंटी बजनी शुरू हो गई. वारदात के आखिरी दिन यानी 16 अगस्त तक 400 पर मामले के दूसरे आरोपी शिल्पी, शिवा और शरतचंद्र आपस में बातचीत करते रहे. जबकि साजिश से पहले तक उनकी इस नंबर पर बात नहीं होती थी.

समर्पण

आसाराम को जब कोई लड़की पसंद आती थी तो वह सेवकों को समर्पण कराने का आदेश देते थे. अगर लड़की समर्पण के लिए तैयार हो जाती तो उसे आसाराम के पास अकेले मिलने के भेजा जाता था.

पीड़िता ने भी पुलिस को यही बताया था. लड़की ने बताया कि उसके बीमार होने पर उसे छिंदवाड़ा आश्रम के निदेशक शरतचंद ने अपने ऑफिस में बुलाकर साध्वी बन जाने और आसाराम के लिए समर्पित होने के लिए कहा था.

इसके बाद आसाराम ने भी उसे कुटिया में अंधेरे में बंद करके छेड़खानी करने से पहले भी समर्पण करने के लिए बोला था. एक बार आसाराम लड़की को चुन लेते थे तो समर्पण कराने की जिम्मेदारी शिल्पी की होती थी.

आसाराम के बेटे नारायण साई पर आरोप लगाने वाली इंदौर की महिला ने भी आसाराम पर आरोप लगाया था कि जब वो अजमेर में आसाराम से मिली थी, तो उन्होंने समर्पण करने के लिए कहा था.

नया नाम

आरोपी आसाराम के पास जो लड़की आती थी वो उसे नया नाम दे देते थे. पीड़िता को भी उन्होंने नया नाम दिया था ‘जट्टी’. वह पीड़िता को इसी नाम से पुकारते थे.

इससे पहले आसाराम के लिए काम करने वाले आरोपी शिल्पी का नाम भी बदला गया था. उसका असली नाम संचिता गुप्ता था.

 टॉर्च की रोशनी से इशारा

जांच में सामने आया है कि आसाराम अपनी ध्यान की कुटिया में अपने पास टॉर्च रखा करते थे. अपनी कुटिया में वो अंधेरा करके रखते थे और किसी को भी बुलाने के लिए टॉर्च की रोशनी का इस्तेमाल किया करते थे.

पीड़िता ने भी अपने बयान में यह बात बताई है. पीड़िता ने बताया था कि आसाराम ने कुटिया में पिछले दरवाजे से जाकर आगे का दरवाजा बंद करके कुटिया में अंधेरा कर दिया था. फिर आसाराम ने टॉर्च की रोशनी के ईशारे से उसे अंदर बुलाया था.

इससे पहले यह भी सामने आया था कि आसाराम को जो लड़की पंसद आ जाती थी वो उस लड़की पर टॉर्च की रोशनी डालकर अपने सेवादारों संकेत देते थे.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. asha ram kasatha joa horha hiya sab mliak kia marjia hia mnusya kia koiy batnhia prmatma mafa nhia kryaga stya ka jya hoa astya ka nas hoa

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

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