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शिल्पी ने किया समर्पण, आसाराम तो गियो…

By   /  September 25, 2013  /  No Comments

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अपने शिष्यों की नाबालिग पुत्री पर के यौन हमले के आरोप में जेल के सींखचों में कैद आसाराम की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. आसाराम की गिरफतारी के बाद से फरार आसाराम की सहयोगी और उनके छिंदवाड़ा आश्रम की वॉर्डन शिल्पी उर्फ़ संचिता गुप्ता ने आखिरकार बुधवार को जोधपुर कोर्ट में सरेंडर कर ही दिया.shilpi-asaram

शिल्पी ने जोधपुर कोर्ट से अग्रिम जमानत की अर्जी खारिज होने के बाद सरेंडर किया. आसाराम की गिरफ्तारी के बाद से ही पुलिस को शिल्पी की तलाश थी. जोधपुर पुलिस ने शिल्पी की तलाश में छिंदवाड़ा और आसाराम के दूसरे आश्रमों पर दबिश भी ‍दी थी, लेकिन वह हर बार पुलिस से बचती रही. आसाराम के छिंदवाड़ा आश्रम की वॉर्डन शिल्पी पर पीड़ित लड़की को आसाराम से मिलवाने का आरोप है. नाबालिग लड़की का आरोप है कि शिल्पी ने ही उसे जोधपुर आश्रम भेजकर आसाराम से मिलवाया था.

शिल्पी को आसाराम का सबसे बड़ा राजदार माना जा रहा है. बताया जा रहा है कि आसाराम की ऐयाशी के लिए लड़कियों को तैयार करने का काम शिल्पी ही देखती थी. ऐसे में शिल्पी के समर्पण से पुलिस को आसाराम के कई दबे राज सामने आने की उम्मीद है.

इससे पहले, आसाराम के दो सहयोगियों ने जोधपुर कोर्ट में पिछले शुक्रवार को सरेंडर किया था. आसाराम का रसोइया प्रकाश और सहयोगी शरदचंद नाबालिग के यौन उत्पीड़न की साजिश में शामिल रहने के आरोपी हैं. पीड़ित आसाराम के छिंदवाड़ा आश्रम के हॉस्टल में रहती थी. इसी हॉस्टल में प्रकाश रसोइया और शरदचंद प्रभारी था.

गौरतलब है कि आसाराम को अपने एक भक्त की नाबालिग बेटी के यौन शोषण के आरोप में एक सितंबर को मध्य प्रदेश के इंदौर से गिरफ्तार किया गया था. आसाराम फिलहाल जोधपुर सेंट्रल जेल में हैं.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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