/जम्मू फिर हुआ दहशतगर्दों का शिकार, बारह मरे, मुठभेड़ ज़ारी…

जम्मू फिर हुआ दहशतगर्दों का शिकार, बारह मरे, मुठभेड़ ज़ारी…

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में सेना की वर्दी पहने बड़ी संख्या में हथियारों से लैस आतंकवादियों ने आज एक पुलिस थाने पर हमला किया  और इसके बाद उन्होंने साम्बा में एक सैन्य शिविर को निशाना बनाया. इस आतंकी हमले में बारह मौत होने के समाचार हैं.

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यह आतंकी हमला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की मुलाकात से 72 घंटे पहले किया गया है. पुलिस ने बताया कि तीन आतंकवादी सुबह करीब पौने सात बजे जम्मू-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग के निकट कठुआ जिले के हीरानगर पुलिस थाने में जबरन घुस आए और उन्होंने ग्रेनेड फेंकने के बाद अंधाधुंध गोलीबारी शुरू कर दी.

मिली जानकारी के अनुसार आतंकवादियों ने बाद में राजमार्ग पर एक ट्रक को रास्ते में रोक लिया. वे उस ट्रक में सवार हो गए और उसके चालक को जम्मू की ओर जाने को मजबूर किया.

आतंकवादियों ने यहां से 40 किलोमीटर दूर साम्बा में सैन्य शिविर के द्वार के निकट वाहन को रोक दिया और शिविर पर हमला किया. प्रारंभिक रिपोर्ट के अनुसार आतंकवादी बाद में सैन्य शिविर में घुस आए. इस गोलीबारी में चार जवान शहीद हो गए हैं.

घटनास्थल पर अभियान की निगरानी कर रहे डीआईजी ने बताया कि भारी गोलीबारी जारी है. यह कहबर लिखे जाने तक दहशतगर्दों और सेना के बीच लगातार गोलीबारी चल रही है.

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यह हमला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के कल अमेरिका रवाना होने के एक दिन बाद किया गया है, जहां वह रविवार को शरीफ से मुलाकात करके वार्ता करेंगे. भाजपा ने इस वार्ता का विरोध किया है.

वहीँ, जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा है कि जब भी सूबे में शांति बहाली के लिए पड़ोसी देश से कोई उच्च स्तरीय बात चीत होने की सम्भावना बनती है तभी ऐसी दहशतगर्दी सामने आती है, ज़ाहिर है यह घटनाएँ सूबे में शांतिपूर्ण माहौल न बनने देने की साजिश है और ये तत्व नहीं चाहते कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ़ से मिलें और सूबे में शांति की दिशा में कोई कारगर बात हो.

इसी बीच खबर है कि भारतीय गृह मंत्रालय में गृहमंत्री ने उच्च स्तरीय आपात बैठक बुलाकर मामले की समीक्षा की है. जम्मू-कश्मीर में ट्रिपल हाई एलर्ट घोषित कर दिया गया है.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.