/पूर्व सेनाध्यक्ष वी. के. सिंह ने पाकिस्तानी प्रोपेगंडा को हवा दी…

पूर्व सेनाध्यक्ष वी. के. सिंह ने पाकिस्तानी प्रोपेगंडा को हवा दी…

पूर्व सेनाध्यक्ष वीके सिंह ने नरेन्द्र मोदी का दामन थाम लेने के बाद हो रही आलोचनाओं और सेनाध्यक्ष रहते जम्मू कश्मीर के एक नेता को गुप्त फंड से धन देने के आरोपों के बाद अपने खास-म-खास पत्रकार मित्र से गहन सलाह मशविरा कर शातिराना अंदाज़ में एक ऐसा आधा अधूरा बयान देकर भारत को दुविधा में डाल दिया और अंतर्राष्ट्रीय शर्मिन्दगी झेलने को विवश कर दिया जिसका न कोई सिर था न पैर…

पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी. के. सिंह के पाकिस्तानी प्रोपेगंडा को हवा देने वाले बयान कि सेना द्वारा कश्मीर में स्थिरता बनाए रखने के लिए राजनेताओं को पैसे दिए जाने के से भारत की कश्मीर नीति को बेइंतिहा नुकसान पहुंचा है. देश के शीर्ष सरकारी अधिकारियों का मानना है कि इस बयान से कश्मीर में भारत के शांति के प्रयासों की विश्वसनीयता पर सवाल उठ खड़े हुए हैं और इससे लॉन्ग टर्म में भारत को बड़ा नुकसान झेलना पड़ सकता है. यह भी माना जा रहा है कि पाकिस्तान वीके सिंह के इन आरोपों को भारत के खिलाफ अपना हथियार बना सकता है.vk-singh

शीर्ष अधिकारियों का कहना है कि कश्मीर में सेना के मंत्रियों को पैसे देने के पूर्व सेना प्रमुख जनरल वी. के. सिंह के बयान को लेकर सरकार बेचैन और चिंतित है. सरकार अब इस कोशिश में जुटी है कि यह जल्द तय किया जा सके कि पूर्व जनरल के खिलाफ सेना की अंदरुनी जांच में लगाए आरोप कितने सही हैं. वी. के. सिंह पर सेना की खुफिया यूनिट के जरिए एक कश्मीरी राजनेता को पैसे देने का आरोप है. इस आरोप के जवाब में ही वी. के. सिंह ने दावा किया था कि सेना कश्मीर में नेताओं को पहले भी पैसे देती रही है ताकि राज्य में स्थिरता कायम रखी जा सके.

यूं तो अधिकारी जनरल वी. के. सिंह के इन आरोपों को खारिज करते हैं लेकिन उनका मानना है कि इसकी पूरी जांच जरूरी है. अधिकारियों का कहना है कि अगर इन आरोपों में थोड़ी भी सचाई है तो यह बेहद गलत हुआ है. हालांकि, अधिकारी इस बात को लेकर एकमत हैं कि इस तरह के बयानों और विवादों से भारतीय पॉलिसी को बेहद नुकसान हुआ है. उनका कहना है कि पाकिस्तान इस मुद्दे को आगे की बातचीत के दौरान भी उठा सकता है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह रविवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से मिलने वाले हैं.

गौरतलब है कि पाकिस्तान हमेशा से यह प्रॉपेगैंडा करता रहा है कि भारत कुछ स्थानीय नेताओं से मिलकर कश्मीर की जनता की इच्छाओं को दबा रहा है. वी. के. सिंह के बयान से उसके इस आरोप को बल मिल सकता है. हुर्रियत कॉन्फ्रेंस पहले ही इस बारे में बयान जारी कर चुकी है. अधिकारियों ने यह नहीं बताया कि वी. के. सिंह के बयान की जांच कौन सी एजेंसी करेगी. हालांकि, उन्होंने कहा कि अगर सेना के फंड का इस्तेमाल राजनीतिक कारणों से हुआ है तो इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जानी चाहिए.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.