/दाग़ी सांसदों और विधायकों के पक्ष में लाया गया अध्यादेश वापस होगा…

दाग़ी सांसदों और विधायकों के पक्ष में लाया गया अध्यादेश वापस होगा…

दाग़ी सांसदों और विधायकों को अयोग्य करार देने के सर्वोच्च न्यायालय के फैसले को निष्प्रभावी बनाने के लिए लाए गए विवादास्पद अध्यादेश को बिल्कुल बकवास करार देने वाले राहुल गांधी के बयान के बाद अब सरकार ने अध्यादेश वापस लेने का फैसला किया है. RAHUL_GANDHI

गौर है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार के लिए असहज स्थिति पैदा करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने आज दोषी ठहराए गए सांसदों और विधायकों पर उच्च न्यायालय के फैसले को निष्प्रभावी बनाने के लिए लाए जा रहे विवादास्पद अध्यादेश को बिल्कुल बकवास करार दिया और कहा कि उनकी सरकार ने जो कुछ किया है, वह गलत है.

कांग्रेस महासचिव अजय माकन के प्रेस क्लब आफ इंडिया में आयोजित प्रेस से मिलिए कार्यक्रम के दौरान अचानक थोड़ी देर के लिए आए राहुल गांधी ने कहा कि अध्यादेश को फाड़कर फेंक दिया जाना चाहिए.

यह राजनीतिक बम धमाका करने के लिए गांधी ने प्रेस क्लब को उस समय चुना, जब कांग्रेस के संचार विभाग के प्रभारी अजय माकन इस क्लब में मीडिया को संबोधित कर रहे थे. इसी बीच गांधी ने खुद वहां आने का निर्णय लिया और मंच पर आते ही आनन फानन में अध्यादेश के बारे में अपनी राय जाहिर कर सबको अवाक कर दिया.

गांधी ने अपनी पार्टी की सरकार के इस कदम का बगावती अंदाज में विरोध ऐसे समय किया, जब मुख्य विपक्षी भारतीय जनता पार्टी ने कल ही राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात कर इस अध्यादेश पर हस्ताक्षर नहीं करने का आग्रह किया था. इसके बाद राष्ट्रपति ने इस अध्यादेश के बारे में स्पष्टीकरण लेने के लिए कानून मंत्री कपिल सिब्बल और गृहमंत्री सुशील कुमार शिंदे को तलब किया था.

राहुल गांधी ने कहा कि अध्यादेश के बारे में मेरी निजी राय यह है कि यह पूरी तरह बकवास है और इस फाड़कर फेंक देना चाहिए. इस के पक्ष में तर्क यह दिया जाता है कि राजनीतिक कारणों से किया जा रहा है.

उन्होंने कहा कि हर पार्टी यही करती है, कांग्रेस यही करती है, भाजपा यही करती है, जनता दल, समाजवादी पार्टी सब यही करती हैं. मेरा कहना है कि मेरी पार्टी और बाकी सभी पार्टियों को इस तरह के समझौते नहीं कर इस तरह का बेहूदा निर्णय लेना बंद करना चाहिए.

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.