/मायावती ने की राष्ट्रपति से गुहार, बर्खास्त करो सपा सरकार…

मायावती ने की राष्ट्रपति से गुहार, बर्खास्त करो सपा सरकार…

बसपा सुप्रीमों मायावती ने उत्तर प्रदेश की सपा सरकार पर मुजफ्फरनगर दंगों के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में पूरी तरह से असफल रहने का आरोप लगाते हुए उत्तर प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है.mayawati_meets_president

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से मुलाकात करने और इस बाबत उन्हें एक ज्ञापन सौंपने वाली मायावती ने कहा कि समाजवादी पार्टी के उत्तर प्रदेश की सत्ता में आने के बाद से राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब हुई है और वहां जंगल राज फैला हुआ है. उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न हिस्सों से सांप्रदायिक हिंसा के दर्जनों मामले सामने आए हैं और मुजफ्फरनगर हिंसा इसका एक स्पष्ट उदाहरण है.

राष्ट्रपति भवन के बाहर मायावती ने संवाददाताओं से कहा कि इसलिए, लोगों के समग्र हित को ध्यान में रखते हुए संविधान की अनुच्छेद 356 लागू कर राज्य में राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाना चाहिए. मायावती ने कहा कि सपा सरकार मुजफ्फनगर हिंसा के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने में पूरी तरह से असफल रही है.

मायावती ने कहा कि ‘सिर्फ इतना ही नहीं, सपा सरकार विस्थापित हुए उन लोगों में दोबारा आत्मविश्वास जगाने में भी असफल रही है, जो अपने घरों को लौटने के लिए तैयार नहीं है.’’  उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार मुजफ्फरनगर हिंसा पर राजनीति कर रही है और हिंसा भड़काने के नाम पर भाजपा और बसपा के नेताओं को गिरफ्तार कर रही है. उन्होंने कहा, ‘‘राज्य सरकार ने कांग्रेस और सपा के उन मुस्लिम नेताओं को अभी तक गिरफ्तार नहीं किया है, जो बसपा नेताओं के साथ महापंचायत में शामिल हुए थे.’

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मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.