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राहुल के बयान ने लालू के चेहरे से उड़ा दी हवाइयाँ…

By   /  September 28, 2013  /  1 Comment

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राहुल गांधी ने दाग़ी सांसदों और विधायकों के पक्ष में अध्यादेश के ज़रिये बनने वाले कानून की धज्जियाँ क्या उड़ाई बहुचर्चित चारा घोटाले के आरोपी राष्ट्रीय जनता के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव के चेहरे की हवाइयां भी उड़ गयी हैं. इसके बाद से लालू अपने राजनीतिक जीवन के सबसे कठिन मोड़ पर खड़े हुए हैं.laloo prasad yadav

सोमवार को रांची की सीबीआई अदालत में उन पर चारा घोटाले का फैसला आना है. यदि अदालत उन्हें सजा सुनाती है तो न केवल लालू का राजनीतिक कुनबा संकट में आ जाएगा बल्कि राजद का भी कोई धणी धौरी नहीं रहेगा. क्योंकि राजद के इतने लम्बे राजनैतिक सफ़र के बावजूद अब तक इस दल के पास कोई ऐसा नेता नहीं है जो राजद का नेतृत्व संभल सके.

राहुल गांधी द्वारा इस अध्यादेश को बकवास बताये जाने के बाद यह तय है कि केंद्र सरकार यह विधेयक वापस ले लेगी. ऐसे में लालू यादव की परेशानी बढ़ जाएगी. यदि लालू को दो साल की सजा मिलती है तो उनकी संसद की सदस्यता चली जाएगी. फिलहाल राजद में उनके कद का कोई नेता नहीं है, जो पार्टी संभाल सके. फिलहाल एक संचालन समिति के जरिए राजद को नेतृत्व देने की चर्चा चल रही है. लेकिन समिति की अगुआई करने वाला चेहरा अभी नहीं मिला है. अब तक कांग्रेस द्वारा उनके प्रति नरम रवैया अपनाए जाने का कयास लगाया जा रहा था, लेकिन राहुल की नाराजगी के बाद लालू का हित सोचने वाले कांग्रेसी भी चुप रहना ही मुनासिब समझेंगे. कुलमिला कर इस पूरे प्रकरण ने लालू को लल्लू जैसी हालत में ला खड़ा किया है.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

1 Comment

  1. केवल लालू ही कियो कितनी लम्बी सूचि है एसे नेतायो की जो संसद को आप्वितर कर के बैठे है जो जनता को बेबकुफ़ समझाते है सत्ता इएन के पैर की जुटी है जो चेह जन्हा चाहे जिस पारकर चाहे करे कानून कोई माने नहीं रखता है इएन लोंगो के लिए यदि सुप्रीम कोर्ट चारितिक सुधर की कोशिश करता है तो जन सामंन्य तो स्वागत ही कर्गेगा सत्ता सुख इएन की बापुती बन गए है सम्मान्य जनता केवल पसु है इएन के सामने बे शर्मी की परा काष्ठ तो यही है की पायजामा के हिसाब से न्न्न्न्नाद बनाना तो समझा में आता है मगर नादे के हिसाब से पायजामा बने का काम कांग्रेस कर रही है अपराधियों को बचाया जाए ये ढूर्र्ट कला का पर्दा फास हो गया है

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