Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

संभल कर करें गिरफ्तारी के समाचारों में चित्रों का प्रसारण…

By   /  September 29, 2013  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

इंडियन नेशनल बार एसोसिएशन के चुरू प्रसंग के अध्यक्ष मनीराम शर्मा ने मीडिया के समक्ष एक मौजूं तथ्य रखते हुए खासतौर से इलेक्ट्रोनिक मीडिया से किसी व्यक्ति की गिरफतारी पर उसका चित्र प्रसारित करते समय कुछ सावधानियां बरतने की अपील की है.crime (1)

मनीराम शर्मा ने अपनी अपील में लिखा है कि किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी के समाचारों का अवलोकन करते समय देखने में आया है कि उसके साथ (विशेषत: इलेक्ट्रोनिक मीडिया) गिरफ्तारी का कोई अन्य चित्र प्रकाशित करते हैं. इन चित्रों में प्राय: गिरफ्तार व्यक्ति के अमानवीय ढंग से हथकड़ियां लगाई हुई और पीछे की ओर हाथ बंधे हुए दिखाए जाते हैं. इस प्रकार के काल्पनिक चित्रों से पाठकों में मन में यह गलत धारणा बैठती है कि पुलिस गिरफ्तारी के समय हथकड़ियां लगा सकती है और पुलिस द्वारा हथकड़ियां लगाना वैध है. वहीँ इस प्रकार अमानवीय दशा में हथकड़ियां लगे चित्र देखने से आम व्यक्ति के मन में पुलिस के प्रति अनावश्यक घृणा उपजती है और पुलिस की गलत छवि झलकती है.

दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट और कानून द्वारा हथकड़ियों व बेड़ियों के प्रयोग पर भारत में काफी समय से प्रतिबन्ध है तथा विशेष परिस्थितियों में  पुलिस  इनका उपयोग मजिस्ट्रेट की अनुमति से ही कर सकती है. अत: आपसे सादर अनुरोध है कि गिरफ्तारी के समाचार के साथ हथकड़ी लगे किसी काल्पनिक चित्र को प्रकाशित नहीं करें..

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक "मुखौटों के पीछे - असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष" में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

You might also like...

अकबर के खिलाफ आरोप गोल करने वाले हिन्दी अखबारों ने उनका जवाब प्रमुखता से छापा, पर आरोप नहीं बताए

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: