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चार साल की बच्ची से चचेरे भाई ने किया दुष्कर्म…

By   /  October 7, 2013  /  2 Comments

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आंबेडकर अस्पताल में 10 घंटे तक नहीं हुआ इलाज… संस्कारधानी का मामला…फिर लुट गई लाडो….

-प्रतीक चौहान||

कुछ समय पहले की बात है जब देश की राजधानी में निभर्या को दरिंदों ने अपनी हवस का शिकार बनाया और उसे मौत की नींद सूला दिया. हैवानों को सजा मिली लेकिन लाडली लाडो की अस्मत लूटने का सिलसिला जारी है. मध्यप्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में चार साल की शिवानी को उसके घर के पास रहने वाले लड़के शराब के नशे में उठा ले गए. शिवानी के साथ अनाचार करने वालों को तो सजा मिल गई, लेकिन उसके मां बाबू जो सपने शिवानी को लेकर चकाचौंध वाले शहर में लेकर आए वो एक ही झटके में खाक हो गए.rape with kid

अब सौमनाथ की चाल वाली उस गली को लोग सिर्फ यूँ याद करते हैं…और कहते हुए निकल जाते हैं कि यहां शिवानी रहती थी…कल फिर एक चार साल की मासूम को उसके चचेरे भाई ने दरिंदगी की शिकार बनाया, और छोड़ दिया मौत के मूहं में, गंदी नाली के कीचड़ में दम घोंट देने वाली सड़ांध के बीच घर वालों और पुलिस ने तो उसे खोज कर अस्पताल पहुंचा दिया. लेकिन एक फिर चिखली में रहने वाली उस मासूम ने उस शिवानी की याद ताजा कर दी जिसके साथ पास के रहने वाले नशाखोर लड़कों ने गलत काम किया था. दिल्ली से लेकर म प्र की आर्थिक राजधानी में सब दूर कड़ी सजा और कड़े कानून की बातें तो हुई. लेकिन इस हैवानियत को कैसे रोका जाए इस पर चर्चा करना भूल गए. क्यों समाज में मानसिक गंदगी फैल रही है और हमारी लाडो इसकी भेंट चढ़ रही हैं…. क्या संस्कारों में लगातार कमी आ रही है  जो आज के समय में सबसे ज्यादा जरूरी हो चले हैं. हो सकता है यह जरूरी बात घरों से निकलकर चकाचौंक वाली दूरियां के आगे बेबस हो और नशे की रंगीनियत और शैतानियत का खुमार संस्कारों पर हावी हो रहा है. लेकिन गलत तो गलत है फिर वो कहीं भी और कैसे भी क्यों ना हो, गलती करने वालों को सजा तो मिलनी ही चाहिए….

छत्तीसगढ़ की लाड़ों के साथ दुष्कर्म

एक ओर जहां पूरे देश में नवरात्रि के पावन पर्व में मॉ जगदमबा के नौ रूपों की पूजा की जा रही है, कहते हैं, नौ दिनों तक दैवीय शक्ति मनुष्य लोक के भ्रमण के लिए आती है. इन दिनों की गई उपासना-आराधना से देवी भक्तों पर प्रसन्न होती है. 2 से लेकर 5 वर्ष तक की नन्ही कन्याओं के पूजन का विशेष महत्व है. लेकिन राजानंदगाव में चार साल की मासूम के साथ हुए दुष्कर्म के मामले ने एक बार फिर मानवता को शर्मसार कर दिया है. बच्ची के साथ दुष्कर्म पीडि़ता के साथ रही सही कसर आंबेडकर अस्पताल के डॉक्टरों ने पूरी कर दी. रात 3 बजे बच्ची को भर्ती करने के बाद डॉक्टरों ने सुबह 12 बजे तक बच्ची का इलाज शुरू नहीं किया था. रविवार की शाम लगभग 6 बजे बच्ची को चॉकलेट खिलाने के बहाने से चचेरे भाई ने बच्ची की अस्मत से खिलवाड़ किया. दुष्कर्म करने के बाद 25 साल के हैवान विक्की जेबिया ( आरोपी) ने बच्ची को जान से मारने की भी कोशिश की. आरोपी ने बड़ी बेदर्दी के साथ बच्ची को नाली के कीचड़ में दबा दिया. जिससे बच्ची दो घंटे तक छटपटाती रही. 2 घंटे तक बच्ची के घर न लौटने पर जब बच्ची के परिजन बच्ची को ढ़ूंढऩे निकले लेकिन परिजनों को बच्ची आस पास कहीं भी नहीं मिली. फिर परिजनों ने इसकी जानकारी चिखली पुलिस को दी. पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत टीम बच्ची को खोजने निकली. इतने में ही परिजनों को पता चला की बच्ची का चचेरा भाई विक्की बच्ची को घर से चॉकलेट खिलाने के बहाने से ले गया था. परिजनों ने इसकी जानकारी भी पुलिस को दी. जैसे ही पुलिस को आरोपी विक्की मिला पुलिस ने उस दरिंदे ने बच्ची के बारे में पूछताछ की. लेकिन नशे में धुत हैवान ने बच्ची के बारे में कोई भी जानकारी पुलिस को नहीं दी. बाद में पुलिस ने जब आरोपी से सख्ती से पूछताछ की तब उसने बताया कि बच्ची को उसने कीचड़ में दबा दिया है. पुलिस ने आनन-फानन में शाम 7 बजे टार्च की रोशनी जरिए बच्ची को खोज निकाला. एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद बच्ची पुलिस को नाली के किनारे कीचड़ में दबी मिली. दो घंटे से ज्यादा कीचड़ में दबे होने की वजह से बच्ची की हालत काफी गंभीर थी. इसके अलावा बच्ची के गुप्तांग में से खून का रिसाव भी हो रहा था. राजनांदगाव के जिला अस्पताल में बच्ची को भर्ती कराया गया. लेकिन बच्ची की हालत नाजूक होने की वजह से बच्ची को राजधानी के आंबेड़कर अस्पताल में भर्ती करने सलाह दी गई. रात लगभग 3 बजे बच्ची को प्रदेश के सबसे बड़े अस्पताल लाया गया. लेकिन आंबेडकर अस्पताल के संवेदनहीन डॉक्टरों ने रात 3 बजे से लेकर सुबह 11.30 बजे तक इलाज शुरू ही नहीं किया था.

– मानवता भूल गए आंबेडकर अस्पताल के डॉक्टर

प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल के डॉक्टरों के व्यवहार को देखते हुए लगता है कि ज्यादा पढ़े लिखे होने की वजह से यह मानवता भी भूल गए है. दुष्कर्म पीडि़ता को अस्पताल में भर्ती कराने के 10 घंटे बाद भी डॉक्टरों ने बच्ची का इलाज शुरू नहीं किया था. बच्ची के परिजनों का आरोप है कि रात 3 बजे जब बच्ची को अस्पताल लाया गया तब कोई भी सीनियर डॉक्टर अस्पताल में नहीं था. सुबह 11.30 तक बच्ची जूनियर डॉक्टरों के भरोसे ही जिन्दगी और मौत से जूझती रही. लगभग 12 बजे जब सीनियर डॉक्टर अस्पताल आए तब बच्ची का इलाज शुरू किया गया.

– नली तक नहीं आंबेडकर अस्पताल में

ऑपरेशन के उपयोग में आने वाली नली तक प्रदेश के  इतने बड़े सरकारी अस्पताल में मौजूद नहीं है. डॉक्टरों ने पीडि़त बच्ची के परिजनों से ऑपरेशन में लगने वाली दवाईयां और नली खरीदकर लाने के लिए कहा गया.

– एसडीएम रिपोर्ट के बिना नहीं करेंगे इलाज

चिखली थाना चौकी के आरक्षक जब बच्ची को अपने साथ लेकर आंबेडकर अस्पताल पहुंचे तब जूनियर डॉक्टरों ने बच्ची के इलाज के लिए एसडीएम रिपोर्ट की मांग की. इतना ही नहीं बिना रिपोर्ट के बच्ची का इलाज करने से भी इंकार कर दिया. तब चिखली थाने से आए आरक्षक ने डॉक्टरों से निवेदन किया कि अभी बच्ची का प्राथमिक उपचार किया जाए सुबह होते ही वो इस रिपोर्ट की कॉपी उपलब्ध करा देंगे.

– फांसी मिलनी चाहिए

मासूम बच्ची पिता ने अपने चचेरे भतीजे के लिए फांसी की मांग की है. उनका कहना है कि बच्ची के साथ दुष्कर्म करने वाले इस दरींदे को कोर्ट फांसी की सजा दे.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

2 Comments

  1. mujhkoa sram ata hia kia char sal ka satha ya koiya bhia hoa kiwa pramatma ka dhayan kaba hoga jamian par kanuan to bna but dariy kiya jaraha hia eskya liya itniya masuma koa sikar bnaya ja rha hia jiya hiand jya bharat

  2. kanu says:

    sharmnaak

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