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जगन रेड्डी के बाद चंद्रबाबू नायडू का अनशन…

By   /  October 7, 2013  /  No Comments

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तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के प्रमुख चंद्रबाबू नायडू ने सोमवार को आंध्र प्रदेश के बंटवारे के बिगड़े हालात को लेकर दिल्ली में अनिश्चितकालीन अनशन शुरू कर दिया है. जंतर-मंतर पर अनशन की इजाजत न मिलने बाद वह आंध्र भवन में अनशन पर बैठ गए. अनशन से पहले नायडू ने कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी पर आंध्र की स्थिति को न समझने के लिए ‘इटैलियन’ में बोलकर कटाक्ष किया.chandra babu

चंद्रबाबू नायडू ने केंद्र सरकार पर आंध्र प्रदेश के बिगड़ते हालात को न समझने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘पिछले 70 दिन में कांग्रेस सरकार ने जो कुछ किया है, आंध्र प्रदेश के आम आदमी का उन पर से विश्वास उठ गया है. सरकार ही नहीं राजनीतिक दलों से भी लोगों का विश्वास उठा है. आज वहां हालात जस के तस है. कोई विश्वास नहीं है. इटैलियन में इसे ‘इमोब्लिज़मो’ कहते है. ‘इमोब्लिज़मो’ का मतलब है कि कुछ भी बदल नहीं रहा.’

उन्होंने कहा कि वह यह शब्द इसलिए इस्तेमाल कर रहे हैं कि दिल्ली सरकार और कांग्रेस पार्टी इसे बेहतर समझती है. नायडू ने कहा कि वह संयुक्त आंध्र की मांगों के समर्थन में दिल्ली में अपना यह अनशन शुरू कर रहे हैं. हालांकि अलग तेलंगाना के मुद्दे पर वह कुछ नहीं बोले. नायडू ने कांग्रेस पर तेलंगाना को लेकर राजनीति करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि वह टीआरएस और वाईएसआर कांग्रेस दोनों को चुनावी तालमेल के लिए जोड़ने का प्रयास कर रही है.

उन्होंने कहा, ‘कांग्रेस पूरी तरह राजनीतिक कर रही है. सुबह 8.30 बजे से मैं बेमियादी भूख हड़ताल पर हूं. इसकी वजह यह है कि आंध्र प्रदेश विशेष कर सीमांध्र (तटीय आंध्र व रायलसीमा) पिछले 70 दिनों से जल रहा है. दिन-ब-दिन स्थिति बदतर होती जा रही है.’

उन्होंने कहा, ‘हमने इस पर भारत सरकार का ध्यान खींचने की हर संभव कोशिश की. हमने संसद में यह मामला उठाया. मैं दिल्ली आया और राष्ट्रपति और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं से मिला. आज तक कोई कार्रवाई नहीं की गई, न ही दोनों तरफ के लोगों को बुलाकर बातचीत करने की कोशिश की गई.’ नायडू ने कहा, ‘लोकतंत्र का मतलब है कि अगर कोई समस्या है तो उस पर बहस, बातचीत होनी चाहिए और आखिरकार उसका कोई समाधान तो निकालना ही होता है.’

गौरतलब है कि कैबिनेट ने तीन अक्तूबर को आंध्र प्रदेश से अलग तेलंगाना राज्य बनाने की प्रक्रिया पर आगे बढ़ने का फैसला किया था. उसके अगले ही दिन नायडू ने हैदराबाद में इस मुद्दे पर अपने आंदोलन की रूपरेखा की घोषणा की थी. उन्होंने केंद्र पर देश को बर्बाद करने और पृथक तेलंगाना फैसले से आंध्र प्रदेश को एक बड़ी आपदा का सामना करने के लिए छोड़ देने का आरोप लगाया.

(नभाटा)

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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