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नारायण साईं फरार, पीड़ित लडकी के 164 में बयान दर्ज़…

By   /  October 8, 2013  /  No Comments

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यौन शोषण के आरोपों में फंसे आसाराम और उसके बेटे नारायण साईं की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं. आसाराम के पुत्र नारायण साईं के खिलाफ सूरत पुलिस द्वारा FIR दर्ज़ होने के बाद से नारायण साईं भूमिगत हो गया है और उसके बारे में कहीं से सूचना नहीं मिल रही है. इसके बाद उसकी तलाश में पुलिस की तीन टीमें लगाई गई हैं. इलेक्‍ट्रॉनिक सर्विलांस की मदद से भी नारायण साईं की तलाश की जा रही है. पुलिस को शक है कि गिरफ्तारी के डर से नारायण साईं नेपाल भाग गया है. वहीँ, आसाराम और उसके बेटे के खिलाफ अहमदाबाद से लेकर दिल्‍ली तक प्रदर्शन हो रहे हैं. पुलिस ने आसाराम की पत्‍नी और बेटी के खिलाफ भी लुक आउट नोटिस जारी किया है.protest against asaram

पिछले रविवार को सूरत की रहने वाली दो बहनों ने आसाराम और नारायण साईं के खिलाफ बलात्कार का केस दर्ज करवाया था. इसके बाद आज इन पीड़ित बहनों के CRPC की धारा 164 में मजिस्ट्रेट के सामने बयान भी दर्ज़ हो गए.
पुलिस में दर्ज शिकायत में इन दोनों बहनों ने आसाराम और उसके बेटे पर गंभीर आरोप लगाए हैं. आरोप है कि आसाराम ने बड़ी बहन जबकि नारायण साईं ने छोटी बहन से बलात्कार किया. टीवी चैनलों पर आई छोटी बहन के बयान में साफ पता चलता है कि किस तरह आसाराम के बेटे ने उसे आश्रम बुलवाया, उसके साथ बलात्कार किया और राज खोलने पर पूरे परिवार को खत्‍म कर देने की धमकी तक दी.
छोटी बहन ने कहा है, ‘अपने मां-बाप की तरह हम भाई-बहन भी आसाराम और नारायण साईं में श्रद्धा रखते थे और उनके अनुयायी थे. 2001 के दिसंबर महीने में मैं, मेरी बहन, मेरा भाई और मम्मी-पापा साईं और बापू के दर्शन के लिए उनके आश्रम में गए. शिविर के पहले दिन सत्संग पूरा होने के बाद मैं भक्तजनों के साथ कतार में खड़ी थी. आसाराम और नारायण साईं बारी-बारी से वहां से गुजर रहे थे. भक्तों को प्रसाद दे रहे थे. उसी वक्त नारायण साईं ने पास आकर मेरा नाम और पता पूछा. मुझे प्रसाद देकर उन्होंने मेरा हाथ दबाया. अगले दिन बड़े भगवान यानि नारायण साईं ने फिर से प्रसाद देकर मेरा हाथ पकड़कर कहा कि मेरा मेघनगर में तीन दिन का प्रोग्राम है, तुम भी और लड़कियों के साथ आ जाओ तो मजा आ जाएगा.’
साईं पर आरोप लगाने वाली इस युवती की मानें तो उस वक्त वो महज 14 से 15 साल की थी. उसका कहना है कि उसे लगा कि ये नारायण साईं की कृपा है. ये उनका स्नेह है. उसका कहना है कि उसने नारायण साईं के इस व्यवहार को श्रद्धापूर्वक लिया. उसने कहा, ‘सारी लड़कियां मेघनगर जा रही थीं. मेरे पास भी पॉकेट मनी के 500 रुपये थे. मैं और लड़कियों के साथ मेघनगर बड़े भगवान यानि नारायण साईं के शिविर में पहुंच गई. तीन दिन का शिविर पूरा होने के बाद हम सात लड़कियों को नारायण साईं ने रुकने के लिए कहा. उसके बाद 2002 की शुरुआत में मैं 2 से 3 महीने तक मेघनगर आश्रम में रुकी थी. मैंने वहां कई काम सीखे. दो बार मेरी नारायण साईं से फोन पर बात भी हुई. वो मुझसे पूछते थे कि मेरे बिना अच्छा लगता है? मेरे पास आने का मन करता है? घर-संसार से ज्यादा गुरु की सेवा करो. होली के बाद नारायण साईं ने मुझे और बाकी सात लड़कियों को बिहार भेज दिया.’ 1254_a2
सूरत की युवती की मानें तो बिहार में रहने के दौरान ही नारायण साईं की नीयत में खोट आ गया. नारायण साईं वहां पहुंचे और उन्होंने उसके साथ पहली बार छेड़छाड़ की. लड़क नारायण साईं उर्फ बड़े भगवान की इस करतूत से बुरी तरह से डर गई थी. उसने कहा, ‘बिहार के एक छोटे से गांव में हम डेढ़ महीने तक रुके. एक दिन शिविर खत्म होने के बाद नारायण साईं ने मुझे कुटिया में अकेले में बुलाया. मेरे साथ छेड़छाड़ की. उस वक्त मैं बुरी तरह से डर गई थी. कुछ दिन मैं नारायण साईं के साथ नेपाल बॉर्डर के एक शिविर में भी रुकी. उसके बाद वहां से मुंबई के ठाणे आ गई. और फिर अपने घर वापस आ गई. एक बार फिर नारायण साईं ने उसके घर पर फोन किया और उसे सूरत के जहांगीरपुरा आश्रम आने को कहा. यही वो जगह थी जहां नारायण साईं ने मेरे साथ बलात्कार किया.’
युवती ने कहा है, ‘नारायण साईं उस वक्त कुर्सी पर बैठे थे और कुर्सी के नीचे नारायण साईं के पांव के पास भक्तिभाव पूर्वक मैं जमीन पर बैठ गई. तब नारायण साईं ने मेरा हाथ पकड़कर पूछा कि घर पर किसी को पता तो नहीं है, बाहर किसी को पता तो नहीं चला, यहां आते किसी ने देखा तो नहीं, मैं कुछ न बोल सकी, मैं बिल्कुल डरी हुई थी. तब उसने मेरे शरीर के साथ छेड़छाड़ करनी शुरू की. मैं उनसे दूर होने के लिए खड़ी हुई तो नारायण साईं खड़े हो गए और बाहों में जकड़ लिया.’ इसके बाद पीड़ित महिला ने अपने साथ हुए बर्ताव का जिक्र किया है जो यहां आपको हूबहू नहीं बताया जा सकता.

युवती ने बताया कि नारायण साईं ने उसके साथ बलात्कार किया, साथ ही धमकी भी दी कि अगर किसी को बताया तो उसका घर बर्बाद कर देगा. इतना ही नहीं पीड़िता ने यह भी दावा किया है कि दो साल तक वह एक आश्रम की संचालिका रही और तब भी उसे नारायण साईं के जुल्म सहने पड़े और जब उसने आश्रम छोड़ने का फैसला किया तो उसे मारा-पीटा तक गया.
युवती ने कहा, ‘सुबह मोटा भगवान नारायण साईं दरवाजा खोलकर मेरे पास आए और गुस्सा होकर मुझे धमकी देने लगे. पूछा कि क्यों तुझे घर जाना है? तेरे लिए घर से ज्यादा यहां अच्छा है. आश्रम का संचालन कर वरना तुझे जिंदा नहीं छोड़ूंगा. उन्‍होंने मेरी पिटाई की. उसके बाद बार-बार इस बात को लेकर मैंने घर पर फोन करने की सोची लेकिन नारायण साईं ने मुझे कुटिया में ही बंद कर रखा. मुझे खूब पीटा और धमकियां दीं जिसके चलते मुझे फोन करने की हिम्मत नहीं हुई. आखिर मैंने घर फोन किया. भाई मां की बीमारी के बहाने से मुझे घर ले गया. लेकिन जब मैं नहीं लौटी को नारायण साईं ने मुझे फोन पर जान से मारने की धमकी दी. मेरे घर पर साधिकाओं से पत्थर फिंकवाए’. महिला का यह भी कहना है कि वह आज तक सिर्फ डर की वजह से ही चुप रही. उसका कहना है कि जब जोधपुर पुलिस ने आसाराम को गिरफ्तार किया तो उनमें यह हिम्मत आई कि वो नारायण साईं का विरोध कर सके.

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About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

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