Loading...
You are here:  Home  >  राजनीति  >  Current Article

चुनाव आचार संहिता बनी मज़ाक…

By   /  October 9, 2013  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

आचार संहिता बेक डेट लोकार्पण की जांच रिपोर्ट में देरी..जाखड़ो की ढाणी में स्कूल लोकार्पण का मामला, कार्रवाई में लेटलतीफी से प्रशासन की कार्यशैली पर लगा प्रश्न चिन्ह…

बाड़मेर, आचार संहिता लागू होने के बाद जाखड़ों की ढाणी स्कूल के लोकार्पण के मामले की जांच रिपोर्ट के बावजूद कार्रवाई में लेटलतीफी से प्रशासन की कार्यशैली पर प्रश्न चिन्ह लगा दिया है.election 2013

हालांकि एडीएम के निर्देशानुसार एसडीएम बाड़मेर ने जांच कर एडीएम को भी सौंपी है. लेकिन अभी तक खुलासा नहीं किया गया है. जानकारी के मुताबिक लोकार्पण समारोह की जांच में एसडीएम राकेश कुमार शर्मा ने कई अहम सबूत जुटाए है. 5 अक्टूबर को एसडीएम सुबह 11 बजे जांच के लिए जाखड़ों की ढाणी ग्राम पंचायत पहुंचे थे, जहां लोकार्पण स्थल का जायजा लेने के साथ ही अनावरण पट्टिका, समारोह स्थल का जायजा लिया. इसके अलावा वहां मौजूद कुछ लोगों से पूरे मामले की जानकारी ली गई.

इसके बाद दूसरे दिन इस संबंध में कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों से भी पूछताछ किए जाने के बाद पूरे मामले की रिपोर्ट एडीएम को सुपुर्द कर दी है. अभी तक आचार संहिता के उल्लंघन मामले का खुलासा नहीं हुआ है. जिससे जांच पर सवाल खड़े होने लगे है. एक तरफ प्रशासन की ओर से जांच पूरी की जा चुकी है, वहीं दूसरी तरफ इस जांच के मामले में अभी तक कोई खुलासा नहीं किया गया है. सवाल तो ये भी है कि क्या प्रशासन इस मामले में लिप्त अधिकारियों व अन्य लोगों को बचाए जाने के प्रयास कर रहा है.

 मैंने जांच रिपोर्ट सौंप दी

॥मैंने पूरे मामले की जांच कलेक्टर को सुपुर्द कर दी है. जांच में कौन-कौन दोषी है मैं नहीं बता सकता हूं. इस मामले में कलेक्टर ही फाइनल जानकारी दे सकते है.

राकेश कुमार, एसडीएम, बाड़मेर

प्रक्रिया चल रही है

॥जांच रिपोर्ट मेरे पास आ गई है, लेकिन अब तक जांच प्रक्रिया में है. बुधवार तक फाइनल रिपोर्ट जारी कर दी जाएगी.

अरुण पुरोहित, एडीएम बाड़मेर

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

एक क्रांतिकारी सफर का दर्दनाक अंत..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: