Loading...
You are here:  Home  >  मीडिया  >  Current Article

पत्रकारों के ख़िलाफ़ हो रही है साजिशें…

By   /  October 10, 2013  /  No Comments

    Print       Email
इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..

महाराष्ट्र में पत्रकारों के विरोध में पोस्टरबाजी..चंद्रपुर और आलंदी की घटना..पत्रकार संगठनों की तरफ से निंदा…

महाराष्ट्र में मीडिया की आवाज बंद करने के लिए राजनेता, माफिया और गुंडों की तरफ से पत्रकारों पर हो रहे हमले थमने का नाम नही ले रहे. लेकिन एक तरफ पत्रकारों के उपर हमले हो रहे है तो दुसरी तरफ पत्रकार भी अपना काम पूरे जोर शोर और इमानदारी से कर रहे हैं. मगर पत्रकारों के इस रवैये से विचलित कुछ लोगो ने अलग अलग रुप से पत्रकारों को बदनाम करने की मुहिम तेज कर दी है. इससे महाराष्ट्र के विभिन्न भूभागों में पत्रकारों के उपर खंडनी, ऍट्रॉसिटी, छेड़छाड़ की फ़र्ज़ी एफआईआऱ लिखवाई जा रही हैं. इससे पत्रकारों के सामने काफी दिक्कतें खड़ी हो गई है और वे निष्पक्ष होकर अपने काम को अंजाम देने में असमर्थ महसूस कर रहे हैं.chandrapur

चंद्रपुर के एक नेता ने तो अलग ही फंडा अपनाया है. उसने वहां के कुछ पत्रकारों के विरोध में शहर के विभिन्न भागो में बड़े बड़े पोस्टर लगाकर पत्रकारों के विरोध में मोर्चा ही खोल दिया है. आश्चर्य की बात यह है कि महापालिका ने ऐसा बैनर लगाने की भी अनुमति दे दी. इसमें जिस प्रकाशक का नाम प्रकाशित किया गया है यह फर्जी है. बताया जाता है कि इस नाम का कोई आदमी चंद्रपुर में रहता ही नही. इस घटना से चंद्रपुर के पत्रकार काफी क्रोधित है. चंद्रपुर जिला मराठी पत्रकार संघ तथा चंद्रपुर श्रमिक पत्रकार संघ की और से इस घटना की निदा की गई है. पत्रकार हल्ला विरोधी कृति समिति, मुंबई ने भी आरआर पाटील से निवेदन करके इस पोस्टरबाजी के पीछे छुपे व्यक्ति को ढूंढ कर दंडित करने का निवेदन दिया है.

इधर पूना के पास आलंदी में सकाल के पत्रकार के विरोध में गांव के स्थानीय नेता ने एक पत्रक गांव में वितरित किया है. पूना जिला मराठी पत्रकार संघ के अध्यक्ष शरद पाबळे ने इसका भी विरोध किया है और इस प्रकार की घटनायें रोकने के लिए शीघ्र से शीघ्र कड़े उपाय करने की मांग की है.

(पत्रकार हल्ला विरोधी कृति समिति, मुंबई के मेल पर आधारित)

Facebook Comments

इस खबर को अपने मित्रों से साझा करें..
    Print       Email

About the author

मीडिया दरबार के मॉडरेटर 1979 से पत्रकारिता से जुड़े हैं. एक साप्ताहिक से शुरूआत के बाद अस्सी के दशक में स्वतंत्र पत्रकार बतौर खोजी पत्रकारिता में कदम रखा, हिंदी के अधिकांश राष्ट्रीय अख़बारों में हस्ताक्षर. उसी दौरान राजस्थान के अजमेर जिले के एक सशक्त राजनैतिक परिवार द्वारा एक युवती के साथ किये गए खिलवाड़ पर नवभारत टाइम्स के लिए लिखी रिपोर्ट वरिष्ठ पत्रकार श्री मिलाप चंद डंडिया की पुस्तक “मुखौटों के पीछे – असली चेहरों को उजागर करते पचास वर्ष” में भी संकलित की गयी है. कुछ समय के लिए चौथी दुनियां के मुख्य उपसंपादक रहे किन्तु नौकरी कर पाने के लक्खन न होने से तेईस दिन में ही चौथी दुनिया को अलविदा कह आये. नब्बे के दशक से पिछले दशक तक दूरदर्शन पर समसामयिक विषयों पर प्रायोजित श्रेणी में कार्यक्रम बनाते रहे. अब वैकल्पिक मीडिया पर सक्रिय.

पाठक चाहे आलेखों से सहमत हों या असहमत, किसी भी लेख पर टिप्पणी करने को स्वतंत्र हैं. हम उन टिप्पणियों को बिना किसी भेद-भाव के निडरता से प्रकाशित भी करते हैं चाहे वह हमारी आलोचना ही क्यों न हो. आपसे अनुरोध है कि टिप्पणियों की भाषा संयत एवं शालीन रखें - मॉडरेटर

You might also like...

एक जज की मौत : The Caravan की सिहरा देने वाली वह स्‍टोरी जिस पर मीडिया चुप है..

Read More →
Page Reader Press Enter to Read Page Content Out Loud Press Enter to Pause or Restart Reading Page Content Out Loud Press Enter to Stop Reading Page Content Out Loud Screen Reader Support
%d bloggers like this: